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श्रीमद् दयानन्द कन्या गुरुकुल, चोटीपुरा के नारी शक्ति जागरण शिविर के सम्पूर्ति समारोह में आयुर्वेद मनीषी श्रद्धेय श्री बालकृष्ण जी महाराज, आध्यात्मिक एवम् ध्यान गुरू डॉ. अर्चिका सुधांशु दीदी जी और मंडलायुक्त श्री आन्जनेय कुमार सिंह की रही गरिमामयी उपस्थिति
ख़ास बातें
चोटीपुरा गुरूकुल में एकाग्रता, संतुलन और आत्मबल से अतिथि मंत्रमुग्ध
आयुर्वेद मनीषी आचार्य बालकृष्ण बोले, नारी समाज परिवर्तन की प्रेरणा
शिक्षा का उद्देश्य हो बेटियों का सर्वांगीण विकासः डॉ. अर्चिका सुधांशु
आचार्या डॉ. सुमेधा बोलीं, नारी शक्ति समाज की मुख्य अधाराशिला
मुरादाबाद/ अमरोहा (प्रो. श्याम सुंदर भाटिया/ माधव एक्सप्रेस) विश्वविख्यात परम पूज्य स्वामी चिदानन्द जी महाराज ने नारी शक्ति को जागृत करने के लिए ओजपूर्ण विचार प्रस्तुत करते हुए कहा, परमात्मा साकार रूप में सब जगह नहीं हो सकते थे इसीलिए उन्होंने धरती पर नारी शक्ति को बनाया। आचार्या डॉ. सुमेधा जी तो सशक्त नारी की एक साक्षात प्रतिमूर्ति हैं। आचार्या डॉ सुमेधा जी का यह श्रीमद् दयानन्द कन्या गुरुकुल, चोटीपुरा बेटियों को सशक्त बनाने के महत्वपूर्ण कार्य में जुटा है। आज नारी इतनी सशक्त है, उसका डंका पूरे विश्व में बज रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से नारी शक्ति का प्रतीक सिंदूर पूरी दुनिया में भारतीय नारी की शक्ति की पहचान बन चुका है। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द जी महाराज श्रीमद् दयानन्द कन्या गुरुकुल, चोटीपुरा के नारी शक्ति जागरण शिविर के सम्पूर्ति सत्र में बोल रहे थे। उल्लेखनीय है, परम पूज्य स्वामी जी का चोटीपुरा में प्रथम बार मंगलागमन हुआ है। सम्पूर्ति सत्र में आयुर्वेद मनीषी श्रद्धेय श्री बालकृष्ण जी महाराज के पावन सानिध्य में बतौर मुख्य अतिथि- विश्व जागृति मिशन की आध्यात्मिक एवम् ध्यान गुरू डॉ. अर्चिका सुधांशु दीदी जी और मंडलायुक्त श्री आन्जनेय कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। चोटीपुरा गुरूकुल की आचार्या डॉ. सुमेधा ने मेहमानों के मंगलागमन पर तिलक, पुष्पवर्षा, स्वागतगीत और दिव्य घोष के बीच सभी का गर्मजोशी से स्वागत किया। आचार्या डॉ. सुमेधा एक-एक करके सभी अतिथियों को गुरूकुल के प्रांगण द्वार से समारोह स्थल तक भव्यता के संग लेकर गई। समारोह में श्रीमद् दयानन्द कन्या गुरुकुल, चोटीपुरा की प्राचार्या आचार्या डॉ. सुमेधा ने अतिथियों को गुरूकुल की विकास यात्रा और उपलब्धियों से परिचित कराया। डॉ. सुमेधा अपने संक्षिप्त एवम् सारगर्भित संबोधन में बोलीं, नारी शक्ति समाज की मुख्य अधाराशिला है। संचालन की बागडोर डॉ. अमिता और डॉ. सविता ने बारी-बारी से संभाली।
सम्पूर्ति समारोह में दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात के निदेशक पूज्य स्वामी विवेकानन्द जी परिव्राजक, अमरोहा की डीएम श्रीमती निधि गुप्ता वत्स, संभल के डीएम डॉ. राजेन्द्र पेंसिया, अमरोहा की नगरपालिकाध्यक्षा श्रीमती शशि जैन, शास्त्र संकाय कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय, बंगलुरू में व्याकरण विभाग की डीन प्रो. शिवानी वीजी, आर्यवीर दल के संगठन मंत्री श्री हरि सिंह आर्य, सत्य सनातन चैनल के संचालक और प्रखर वक्ता आचार्य अंकुर, सनातन महासंघ के संस्थापक एवम् ओजस्वी वक्ता श्री गौतम खट्टर, केरल के कल्लरी प्रशिक्षक श्री सुव्रतन सीएस, उपज के प्रांतीय अध्यक्ष श्री सर्वेश कुमार सिंह, टीएमयू के मीडिया मैनेजर प्रो. श्याम सुंदर भाटिया, सीनियर जर्नलिस्ट श्री बसंत सारस्वत ने अपनी उल्लेखनीय मौजूदगी से समारोह की शोभा बढ़ाई। समापन समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के संग-संग वीरता प्रदर्शन में गुरूकुल की कन्याओं ने तलवार संचालन, कल्लरीपयट्टु के अद्भुत कौशल ने दर्शकों को दक्षिण भारत की प्राचीन युद्धकला से परिचित कराया, जिसमें आत्मरक्षा की शक्ति और मानसिक एकाग्रता का समन्वय स्पष्ट झलका। युद्धकला, योगासन और म्यूजियम प्रदर्शन के माध्यम से अपनी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय दिया। चोटीपुरा की कन्याओं की एकाग्रता, संतुलन और आत्मबल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयुर्वेद मनीषी आचार्य बालकृष्ण जी बोले, समाज के सर्वांगीण विकास के लिए पूज्या आचार्या जी जो प्रयास करती हैं, नारी जागरण शिविर उसी का एक मूर्त उदाहरण है। आचार्य बालकृष्ण जी बोले, नारी सशक्त होगी, तो राष्ट्र समृद्ध होगा। मातृशक्ति के जागरण से ही संस्कृति और सभ्यता को नई दिशा मिलती है। नारी केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की प्रेरणा है। आचार्य बालकृष्ण जी ने कन्याओं को उनके कर्तव्य एवं अधिकारों के प्रति सजग किया। साथ ही उन्होंने जीवन की परिस्थितियों से जूझने और वीरतापूर्वक सामना करने का मार्गदर्शन किया।
आध्यात्मिक एवम् ध्यान गुरू डॉ. अर्चिका सुधांशु दीदी जी ने कहा, प्रत्येक बच्चा ईश्वर की एक अनोखी कृति होता है। उसकी प्रतिभा, रुचियां, समझने की क्षमता और विकास की गति अन्य बच्चों से भिन्न होती है, इसीलिए यह आवश्यक है कि हम बच्चों की तुलना न करके उनकी विशेषताओं को पहचानें और उसी के अनुसार उनके मानसिक और शारीरिक विकास की दिशा तय करें। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बालक के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना होना चाहिए। कुछ बच्चे शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट होते हैं, तो कुछ खेल, कला, संगीत या तकनीकी क्षेत्रों में रुचि रखते हैं। उल्लेखनीय है, गुरुकुल चोटीपुरा में पहली जून से नारी शक्ति जागरण शिविर का शंखनाद हुआ था। इस शिविर का उद्देश्य नारी सशक्तिकरण, आत्मबोध और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना था। शिविर का मुख्य आकर्षण सम्पूर्ति सत्र रहा, जिसमें देश के प्रतिष्ठित विद्वान् सम्मिलित हुए। उन्होंने नारी चेतना, आत्मगौरव और सांस्कृतिक मूल्यों पर सारगर्भित भाषण दिए। चोटीपुरा गुरूकुल की छात्राओं में आत्मविश्वास और प्रेरणा का संचार किया। यह शिविर न केवल एक शैक्षणिक अनुभव रहा, बल्कि एक भावनात्मक और प्रेरणादायी यात्रा भी सिद्ध हुआ, जिसमें सहभागियों को अपनी पहचान और शक्ति को समझने का अवसर मिला।
