इंदौर: इंदौर के दाऊदी बोहरा समाज ने पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) की जयंती मिलाद-उन-नबी के अवसर पर शहरभर में जश्न के साथ जुलूस निकाला। इस जुलूस में इंदौर के 17 अलग-अलग इलाकों से समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस अवसर पर *इंदौर के शहर काज़ी डॉ. इशरत अली साहब एवं इंदौर में परम पूज्य हुज़ूर सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन* के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
जुलूस सियागंज से शुरू हुआ और जवाहर मार्ग, यशवंत रोड चौराहा और नर्सिंग बाजार चौराहा सहित शहर के प्रमुख स्थानों से होकर गुजरा। इसके बाद यह छत्रीबाग स्थित समाज के एबीएन स्कूल में समाप्त हुआ। समाज के स्वयंसेवकों ने जुलूस की व्यवस्था संभालने और स्थानीय लोगों को होने वाली असुविधा को कम करने में मदद की। जुलूस में पारंपरिक समाज के बैंड और स्कूल के छात्र भी शामिल हुए।
समाज ने पारंपरिक मिलाद समारोह के साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने और पूरे शहर में पेड़ लगाने का संकल्प लेकर जमीनी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की पहल भी की।
*इंदौर के दाऊदी बोहरा समाज के आउटरीच कोऑर्डिनेटर खोजेमा पेटीवाला* ने कहा, “पैगंबर मोहम्मद का जीवन और उनकी शिक्षाएं आज भी हमारे हर काम में हमारा मार्गदर्शन करती हैं। इसमें पर्यावरण की देखभाल की उनकी सीख भी शामिल है। पेड़ लगाना करुणा का ऐसा कार्य है, जिसका लाभ हमारे बाद भी बना रहता है। इस मिलाद-उन-नबी पर 1,000 से अधिक पेड़ लगाना इन शिक्षाओं को अमल में लाने और इंदौर के लिए एक स्थायी योगदान देने का हमारा तरीका है।”
जिस शहर ने लगातार भारत के ‘सबसे स्वच्छ शहर’ का खिताब अपने नाम किया है, वहां आस्था और पर्यावरण संरक्षण पर एक साथ जोर देने की इस पहल को लोगों का अच्छा समर्थन मिला। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सैकड़ों समाजजनों ने सुबह-सुबह एकत्र होकर इस आयोजन में हिस्सा लिया और लगाए गए नए पौधों को पेड़ बनने तक उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया।
*मज़हर हुसैन सेठजीवाला कम्युनिटी सदस्य* ने कहा, “इंदौर पहले से ही स्वच्छता में नंबर वन है, लेकिन हम यहीं नहीं रुक सकते। अगर हममें से हर कोई सिर्फ एक पौधे की जिम्मेदारी ले, तो सोचिए इसका कितना बड़ा असर हो सकता है। यह उस शहर के प्रति हमारा योगदान है, जिसे अपना घर कहने पर हमें गर्व है।”