Aaj ka Panchang 30 August 2026: क्या रहेगी आज की तिथि? नोट करें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूरा पंचांग
Spread the loveAaj ka Panchang 30 August 2026: हिंदू धर्म में पंचांग का...
Spread the loveAaj ka Panchang 30 August 2026: हिंदू धर्म में पंचांग का...
Spread the loveAaj Ka Rashifal, 30 August 2026: आज चंद्रमा के गोचर का...
Spread the love ~ यह प्रोग्राम 6+6 इंडिया-इटली मॉडल पर आधारित है,...
नई दिल्ली, 30 जनवरी । केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल की उपस्थिति में राज्य में तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान शाह ने गुजरात सरकार को 30 अप्रैल तक सभी कमिश्नरेट में नए आपराधिक कानूनों का शत-प्रतिशत कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
बैठक में चर्चा के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने गुजरात सरकार द्वारा नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन को लेकर अब तक किए गए कार्यों की सराहना करते हुए राज्य सरकार से 30 अप्रैल 2025 तक सभी कमिश्नरेट में नए कानूनों का शत-प्रतिशत कार्यान्वयन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री से इसकी मासिक, राज्य के गृह मंत्री पाक्षिक और मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) एवं महानिदेशक पुलिस स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा की जानी चाहिए।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि गुजरात ने 10 वर्ष से अधिक सजा वाले मामलों में 92 प्रतिशत से अधिक चार्जशीट समय पर दाखिल करने का सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बचे हुए मामलों में अधिनियम में कोर्ट से अनुमति लेने के प्रावधान के उपयोग को सुनिश्चित करने की समीक्षा की जानी चाहिए। गुजरात ने जीरो एफआईआर को शत-प्रतिशत एफआईआर में बदलने का प्रशंसनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए जिसमें अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (सीसीटीएनएस) के जरिए दो राज्यों के बीच एफआईआर ट्रांसफर किया जा सके। गुजरात को सीसीटीएनएस 2.0 को अपनाना चाहिए।
नए कानूनों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के प्रावधान पर शाह ने कहा कि इसके उचित क्रियान्वयन के लिए राज्य के गृह एवं स्वास्थ्य विभाग को बैठक कर अस्पतालों से पोस्टमार्टम और अन्य मेडिकल रिपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्त करने पर जोर देना चाहिए। उन्होंने जेलों, सरकारी अस्पतालों, बैंक, फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) इत्यादि परिसरों में भी वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए साक्ष्य दर्ज करने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जेलों में हर न्यायालय के लिए एक वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग क्यूबिकल होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुलिस को पूछताछ के लिए हिरासत में रखे गए लोगों की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक डैशबोर्ड पर प्रदान करनी चाहिए। साथ ही जब्ती सूची और अदालतों में भेजे जाने वाले मामलों की जानकारी भी डैशबोर्ड पर रखनी चाहिए। उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक को इन मामलों की निरंतर मॉनिटरिंग का भी निर्देश दिया। उन्होंने पुलिस थानों में नेटवर्क कनेक्टिविटी स्पीड को निर्धारित मानकों से 30 एमबीपीएस अधिक करने को कहा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को परिपत्र जारी कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संगठित अपराध, आतंकवाद, मॉब लिन्चिंग के प्रावधानों का दुरुपयोग न हो। इसके लिए उच्च स्तर से अनुमति के सख्त प्रावधान किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में ट्रायल इन एबसेंसिया का प्रावधान किया गया है जिसके तहत भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में लंबे समय से देश से फरार आरोपित भगोड़ों के खिलाफ ट्रायल इन एबसेंसिया की शुरुआत की जानी चाहिए।
गृह मंत्री ने हर जिले में दो से अधिक फॉरेंसिक साइंस मोबाइल वैन्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रयास करना चाहिए जिससे मोबाइल फोरेंसिक वैन्स में काम में आने वाली सभी 12 किट्स भारत में ही निर्मित हो। शाह ने कहा कि गुजरात द्वारा फोरेंसिक क्राइम मैनेजर की पहल को अन्य राज्यों को भी अपनाना चाहिए। साथ ही लंबित फोरेंसिक मामलों को अभियान चला कर खत्म करना चाहिए। उन्होंने फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भर्ती पर जोर देते हुए फॉरेन्सिक विभाग में खाली पदों पर भर्ती शीघ्र सुनिश्चित करने को कहा।
गृह मंत्री शाह ने कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय ने 22 जनवरी को सभी अधीनस्थ न्यायालयों को ई-प्रोसेसेज जारी करने के निर्देश जारी किए हैं, जो एक अच्छी पहल है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में भी इसके लिए प्रयास किए जाने चाहिए। शाह ने डायरेक्टरेट ऑफ प्रॉसिक्यूशन में खाली पदों पर जल्द से जल्द भर्ती सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में न्यायिक अधिकारियों को भी जोड़ा जाना चाहिए और ज्यूडिशियल अकैडमी से समन्वय कर प्रशिक्षण आयोजित किये जाने चाहिए। बैठक में पुलिस, जेल, कोर्ट, अभियोजन और फॉरेन्सिक से संबंधित विभिन्न नए प्रावधानों के गुजरात में कार्यान्वयन और वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई।
बैठक में गुजरात के गृह राज्य मंत्री, केन्द्रीय गृह सचिव, गुजरात के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक, राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के महानिदेशक और केन्द्रीय गृह मंत्रालय एवं राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
