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जावरा भगत सिंह शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के रसायन विभाग की दीवार में क्रैक छत से रिसता बारिश का पानी, द्वितीय गेट के बाहर मिट्टी का ढेर दे रहा हादसों को न्यौता
निप्र, जावरा मध्यप्रदेश के रतलाम ज़िले के जावरा में बने भगतसिंह शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय इन दिनों किसी दुर्दराज गांव में मौजूदा हालात जहां रख रखाव से परे शासकीय भवन की तरह अस्त व्यस्त नज़र आ रहा हैं, रसायन विभाग की बिल्डिंग को गत वर्ष पूर्व जर्जर होने पर ज़मीनी कार्य को लेकर रिनोवेशन करवाया था लेकीन बारिश में बिल्डिग में पानी रिसना, चूहों का निकलना और दीवारों का क्रैक होना संभवत वर्तमान में जारी है, इससे साफ़ है की कॉलेज प्रशासन सिर्फ़ खाना पूर्ति पर ध्यान देता है न की सुधार कार्य पर कॉलेज में छात्रों की संख्या ज्यादा है तो पढ़ाने वाले प्रोफेसरों की कमी, समस्या को लेकर कॉलेज प्राचार्य ए.जी पठान का कहना हैं की शासन को कई बार हिंदी , इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति के विषय में प्रोफेसरों की मांग को लेकर अवगत करवाया लेकीन कोई सुनवाई नहीं है, एक और अतिथि शिक्षकों के द्वारा विषय पर प्रोफेसरों की कमी को पूरा किया जा रहा हैं भवन निर्माण में नई बिल्डिग बनाए जाने के बाद भी कॉलेज को अधीन नहीं की है जहां चढ़ाव की छत को ढकने के लिए प्लास्टिक की छत सीट लगाई वो भी बहाल हो चुकी हैं,वही कॉलेज में चार कक्ष की नई बिल्डिंग के साथ केंटीन का कार्य पुर्ण किया जा रहा हैं जहां केंटीन सुनसान होने से रात में असमाजिक तत्व द्वारा बड़ी घटना घटित होने का अंदेशा बना रहता हैं जिस संबंध में कॉलेज प्राचार्य पठान से कॉलेज की गतिविधियों और विद्यार्थी सुरक्षा को लेकर प्रश्न किया तो बताया की अभी केंटीन और कक्ष हमारे अधीन नहीं है उनका कार्य चल रहा हैं, जब अधीन होंगे तब उन पर कैमरे लगाए जाएंगे वहीं एक वर्ष से द्वितीय गेट बंद होने और गेट के बाहर मिट्टी के ढेर से हादसे होने की बात पर बारिश बाद हटाने का कहा गया ऐसे में कॉलेज के मुख्य बीए, बीकॉम कक्षा के मध्य ग्राउंड में भी गाजर घास पाई गई जिससे विद्यार्थियों को डेंगू ,मलेरिया,डरमेटाइटिस, एक्जिमा, एलर्जी, बुखार, होने की संभावना बनी हुई हैं बावजूद इसके कॉलेज प्रशासन कॉलेज में सफ़ाई और जल भराव नियंत्रण रख रखाव नहीं कर पा रहा हैं।
