रिपोर्ट का चौथा संस्करण 2023-24 में खुदरा स्टोर पर महिलाओं की वित्तीय खपत का विस्तृत विश्लेषण पेश करता है
• भारत में 63% से अधिक महिलाएं उद्यमशीलता की राह तलाश रही हैं
• उनमें से 85% के पास आवर्ती (रेकरिंग) आय स्रोत तक सीमित या फिर कोई पहुंच नहीं है
• 48% महिलाएं नकदी में लेनदेन पसंद करती हैं, इसके बाद यूपीआई क्यूआर और कार्ड का स्थान आता है, 95% से अधिक महिलाएं नकद निकासी के लिए एईपीएस को प्राथमिकता देती हैं
• 71% महिलाओं ने अल्पकालिक निवेश के प्रति अधिक रुझान प्रदर्शित किया
• महिलाओं में बीमा के प्रति जागरूकता बढ़कर 29% हो गई, लेकिन खपत केवल 2% है
• 70% महिलाओं के पास बचत खाते हैं, और 68% महिलाओं ने औपचारिक ऋण लेने की इच्छा ज़ाहिर की
मुंबई, 11 मार्च, 2024: देश में 50 लाख से अधिक खुदरा टचप्वाइंट वाले अग्रणी शाखा रहित बैंकिंग और डिजिटल नेटवर्क, पेनियरबाय के सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत में 63% से अधिक महिलाएं अपना व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं, जो वित्तीय स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की तीव्र इच्छा को दर्शाती है। यह बात, खुदरा दुकानों पर महिलाओं द्वारा वित्तीय खपत को दर्शाने वाली अखिल भारतीय सर्वेक्षण रिपोर्ट, “पेनियरबाय वीमेन फाइनेंशियल इंडेक्स (पीडब्ल्यूएफआई)” के अंग के रूप में साझा की गई थी। कंपनी ने देश में 5,000 से अधिक खुदरा स्टोरों का सर्वेक्षण किया, जिसमें वहां दिखे महिला उपभोक्ताओं के वित्तीय लेन-देन को रिकॉर्ड किया गया।
रिपोर्ट में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की प्राथमिकता पर रोशनी डाली गई, जिसमें 95% से अधिक महिला ग्राहक नकद निकासी के लिए एईपीएस का विकल्प चुनती हैं। नकद लेन-देन का पसंदीदा तरीका बना हुआ है, 48% महिलाएं इसके पक्ष में हैं, आधार-आधारित लेनदेन और यूपीआई क्यूआर कोड दहाई अंक में प्रगति पर हैं। इस खंड में कार्डों की उपस्थिति न्यूनतम बनी हुई है। विशेष रूप से, 18-30 साल की आयु की महिलाएं, उसके बाद 31-40 वर्ष की महिलाएं, डिजिटल रूप से सबसे अधिक कुशल हैं, जो वित्तीय लेनदेन के प्रति एक मज़बूत रुझान दिखाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि 41% महिलाओं ने उल्लेख किया कि वे अपने फोन पर किसी भी भुगतान ऐप का उपयोग नहीं करती हैं।
पेनियरबाय खुदरा दुकानों पर महिलाओं द्वारा प्राप्त की जाने वाली शीर्ष तीन सेवा है, नकद निकासी, मोबाइल रिचार्ज और बिल भुगतान। सबसे आम निकासी सीमा ₹1000-2500 के बीच है, जबकि ईएमआई भुगतान आमतौर पर ₹500-1000 के बीच है। रिपोर्ट से पता चलता है कि 70% महिलाओं के पास जन-धन बचत खाते हैं जिनका उपयोग मुख्य रूप से नकद निकासी के लिए किया जाता है। 25% से अधिक महिलाओं ने स्वीकार किया कि उनके बैंक खाते उनके बजाय उनके पति संभालते हैं।
शीर्ष तीन बचत लक्ष्यों में, ‘बच्चों की शिक्षा’ शीर्ष पर है, इसके बाद ‘बीमारी से जुड़ी आपातकालीन परिस्थिति’ और ‘घरेलू इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने’ का स्थान है। 54% महिलाओं ने मासिक बचत के लिए अपनी पसंदीदा सीमा ₹750-1000 बताई, जो वित्तीय नियोजन के प्रति उनके दृष्टिकोण को उजागर करती है। केवल 27% उत्तरदाताओं ने लंबी अवधि में एक कोष जमा करने के लिए ₹1500 से अधिक की बचत करना पसंद किया। 71% महिलाओं ने 3-5 साल के बीच बचत अवधि के साथ अल्पकालिक निवेश के प्रति अधिक झुकाव प्रदर्शित किया। रिपोर्ट में निवेश विविधीकरण की दिशा में मामूली लेकिन उल्लेखनीय रुझान देखा गया है, विशेष रूप से आवर्ती और निश्चित लक्ष्य-आधारित जमा में। यह वैकल्पिक निवेश मार्गों के बारे में महिलाओं के बीच बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है, जो वित्तीय प्रबंधन और धन सृजन में बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
दिलचस्प बात यह है कि 74% महिलाएं निवेश संबंधी निर्णय लेते समय अपने परिवार के सदस्यों पर भरोसा करती हैं, जबकि 11% महिलाएं वित्तीय सलाहकारों से मार्गदर्शन लेती हैं। वित्तीय सलाहकारों में आम तौर पर उनके दायरे की प्रभावशाली महिलाएं थीं। सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि 16% महिलाएं बेहद जागरूक थीं, और 55% वित्तीय कल्याण से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं और पहलों के बारे में मामूली तौर पर जागरूक थीं। प्रभावशाली ढंग से, 45% महिलाओं ने सरकार समर्थित पहलों से लाभ प्राप्त करने की सूचना दी है जो इन योजनाओं का लाभ उठाने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या को दर्शाता है।
महिलाओं (29%) के बीच बीमा उत्पादों के बारे में बढ़ती जागरूकता के बावजूद, खपत 2% पर ही बनी हुई है। 45% महिलाओं ने सरकार समर्थित योजनाओं से लाभान्वित होने की बात कही। सर्वेक्षण से पता चलता है कि 68% महिलाओं में औपचारिक ऋण लेने की इच्छा है, जिससे किफायती ऋण समाधान की आवश्यकता स्पष्ट होती है। महिलाओं ने ऋण लेने की वजह के रूप में चिकित्सा खर्च, घर की मरम्मत, और बच्चों की शिक्षा या बीज, उर्वरक या उपकरण खरीदने जैसी कृषि जरूरतों के लिए आपातकालीन खर्चों का हवाला दिया।
पीडब्ल्यूएफआई रिपोर्ट में महिलाओं के बीच ऑनलाइन कॉमर्स (24%) और ऑनलाइन मनोरंजन (18%) की बढ़ती स्वीकार्यता की भी बात कही गई है। ऑनलाइन कॉमर्स की खुदरा स्टोरों पर महिलाओं के बीच अच्छी स्वीकार्यता देखी गई, जिसमें दैनिक किराने का सामान और घरेलू सामान (27%) सबसे अधिक ऑर्डर की जाने वाली श्रेणी रही। इसके बाद क्रमश: 24% और 23% पर कपड़े और एक्सेसरी और घर तथा रसोई के सामान थे। यह इस तथ्य की पुष्टि करता है कि दूर-दराज इलाकों में रहने वाली महिलाएं आकांक्षी हैं और इससे उनके बीच ऐसी सेवाओं की छिपी मांग भी ज़ाहिर होती है। यात्रा बुकिंग और पैन कार्ड जारी करने में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है, 96% उत्तरदाताओं ने अपने नज़दीकी स्टोर से रेल टिकट बुक करने की इच्छा दिखाई। यह महिलाओं की आत्मनिर्भर और आर्थिक प्रक्रिया में शामिल होने की इच्छा को प्रदर्शित करता है।
उक्त निष्कर्षों पर अपनी टिप्पणी में, पेनियरबाय के संस्थापक, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी, आनंद कुमार बजाज ने कहा, “यह देखना सुखद है कि भारत में महिलाएं अपनी उद्यमशीलता की भावना को पहले से कहीं अधिक बढ़ा रही हैं और 63% से अधिक महिलाएं आय बढ़ाने के रास्ते तलाश रही हैं। देश के विकास के सफ़र में, महिलाओं को समान हितधारक होना चाहिए। पेनियरबाय में, हम महिलाओं को हमारे देश के सकल घरेलू उत्पाद के रिज़र्व के रूप में देखते हैं, जो सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाने की शक्ति रखती हैं। हम एक संगठन के रूप में सरकार के इस विचार से सहमत हैं कि हमें अब महिला विकास से महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की ओर रुख करना चाहिए।”
बजाज ने कहा “ई-कॉमर्स, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी नई सेवाओं को अपनाना ग्रामीण क्षेत्रों में एक आशाजनक प्रवृत्ति का संकेत देता है, जहां महिलाएं औपचारिक आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए तैयार हो रही हैं। हमारा लक्ष्य है, महिलाओं को बचत, निवेश और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर अधिक स्वायत्तता देकर सशक्त बनाना और ‘सशक्त नारी, सशक्त देश’ के विचार को सार्थक करना।“
पेनियरबाय की सीएमओ जयत्री दासगुप्ता ने कहा, “भारत गहन डिजिटल परिवर्तन की दहलीज पर खड़ा है। फिर भी, इसकी क्षमता को पूरी तरह से अनलॉक करने के लिए, हमें अपनी महिलाओं को इस तेज़ी से विकसित हो रहे डिजिटल परिदृश्य में सहजता से जुड़ने के लिए आवश्यक उपकरणों से लैस करना होगा। पीडब्ल्यूएफआई के हमारे चौथे संस्करण के लॉन्च के साथ, हम अपनी प्रगति का व्यापक मूल्यांकन कर रहे हैं और भारत की विकास यात्रा में महिलाओं को समान भागीदार बनाने के लिए खाका तैयार कर रहे हैं।”
दासगुप्ता ने कहा, “हमारी हाल ही में लॉन्च की गई डिजिटल नारी पहल के साथ, हम दूर-दराज के इलाकों में रहने वाली महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान कर रहे हैं, जिससे उन्हें समय, स्थान (घर/स्टोर से) की सुविधा, और उत्पाद प्राथमिकताओं के अनुसार अपने समुदायों तक वित्तीय और डिजिटल पहुंच प्रदान करने में सक्षम बनाया जा रहा है। हमारा उद्देश्य है, महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास दर्ज करना, जिससे तकनीकी और वित्तीय बाधाएं दूर हों और अधिक न्यायसंगत समाज का निर्माण हो।“