ग्वालियर (माधव एक्सप्रेस)

पंडित दीपक शर्मा जी ने बताया कि हनुमान अष्टमी के बारे में अपनी सनातन संस्कृति के बारे में बहुत लोगों को मालूम ही नहीं है राम भक्त श्री हनुमानजी के विजय का उत्सव हनुमान अष्टमी यानी कि पौष कृष्ण अष्टमी के दिन मनाया जाता है। ।इस दिन हनुमान जी ने पाताल लोक में अहिरावण पर विजय प्राप्त की थी। हनुमान अष्टमी के दिन हनुमानजी के दर्शन-पूजन का विशेष महत्व होता है। कई भक्त इस दिन व्रत भी रखते हैं।इस दिन हनुमानजी का पूजन-दर्शन करने से मनुष्य को जीवन में विजयश्री प्राप्त होती है और उसके सारे संकटों का नाश होता है।पुराणों के अनुसार त्रेता युग में लंका युद्ध के दौरान अहिरावण राम और लक्ष्मण को बंदी बनाकर पाताल लोक में ले गया था और उनकी बलि देना चाहता था। तब हनुमानजी ने पाताल लोक में जाकर अहिरावण का वध करके राम-लक्ष्मण को बंधन मुक्त कराया था तथा पृथ्वी के नाभि स्थल कहे जाने वाले अवंतिका नामक स्थान पर जाकर विश्राम किया था।तब प्रभु श्रीराम ने प्रसन्न होकर हनुमानजी को आशीर्वाद दिया था कि जो भी भक्त पौष कृष्ण अष्टमी के दिन तुम्हारा पूजन करेगा उसे सर्वत्र विजय प्राप्त होगी। वह जीवन के किसी प्रसंग में कभी हार का सामना नहीं करेगा।तब से पौष कृष्ण अष्टमी के दिन हनुमानजी के विजय उत्सव के रूप में मनाया जाता है। हनुमान अष्टमी के दिन देशभर के प्रमुख हनुमान मंदिरों से बड़े पैमाने पर हनुमानजी की विजय यात्रा निकाली जाती है। इनमें लाखों भक्त शामिल होते हैं।यदि आपको किसी काम में सफलता नहीं मिल पा रही है, आप शत्रुओं से हर बार मात खा जाते हैं, आर्थिक मोर्चे पर विफल हैं तो हनुमान अष्टमी के दिन किसी सिद्ध हनुमान मंदिर में शुद्ध तन और मन से शुद्ध वस्त्र पहनकर जाएं और हनुमानजी को अपने हाथों से चमेली के तेल से सिंदूर का चोल चढ़ाएं।हनुमान जी को चमेली या मोगरे के पुष्पों की माला पहनाएं। तुलसी पत्र डालकर गुड़-चने का नैवेद्य लगाएं।हनुमान अष्टमी की संध्या को किसी हनुमान मंदिर में एक सरसों के तेल का दीपक और एक शुद्ध घी का दीपक लगाएं और वहीं बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
हनुमान अष्टमी के दिन हनुमान मंदिर में या अपने घर में हनुमानजी की फोटो या मूर्ति के सामने बैठकर राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
