(निरुक्त भार्गव)
नेता नगरी को छोटे से छोटे और बड़े से बड़े चुनाव में पार्टी की उम्मीदवारी हथियाने और मलाईदार पदों पर कब्जा करने के लिए देवी-देवताओं की परिक्रमा लगाते सबने देखा और सुना होगा। अपने राजनीतिक विरोधियों पर मारण अस्त्र छोड़ने की गरज से उक्त प्रकार के प्राणियों को ज्योतिष और तंत्र विद्याओं के जानकारों की शरण में जाने के किस्से भी सबके सामने पहले से उजागर हैं। मगर, क्या कोई मंत्री अपने ही मुख्यमंत्री की गद्दी पर वक्र दृष्टि डाल खुद को उस पर विराजमान करने का कोई उपाय और क्रिया कर सकता है? जी हां, विधानसभा चुनावों के ऐलान से ठीक पहले मध्यप्रदेश में ऐसा घटनाक्रम सामने आया है। चर्चा गर्म है कि इस तरह की राजनीतिक चालें सत्तारूढ़ भाजपा के अंदरखाने तूफान ला सकती हैं! पढ़िए, ये खोजी डिस्पैच…..
पता चला है कि शीर्ष खुफिया एजेंसियों ने शिवराज सिंह चौहान सरकार के उन कद्दावर मंत्री की तलाश शुरू कर दी है, जिन्होंने मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के लिए एक विशेष ‘महा-अनुष्ठान’ को प्रायोजित किया। दिल्ली से मिले संकेतों के अनुसार यह 21 दिवसीय अनुष्ठान हाल ही में उज्जैन के एक बाहरी इलाके में इंदौर रोड और देवास रोड के बीच स्थित एक आश्रम में आयोजित किया गया। अनुष्ठान के लिए दक्षिणी राज्य से लगभग 100 से 150 वैदिक ब्राह्मणों को यहां बुलाया गया। उज्जैन को छोड़ मप्र के विभिन्न स्थानों से लगभग एक दर्जन पुजारी भी विधि-विधान में शामिल हुए।
बताया गया है कि अनुष्ठान में संलग्न ब्राह्मणों के निवास स्थान और उनके परिचय को अत्यधिक गुप्त रखा गया। इस सभी कर्मकांड और सिद्धहस्थ विप्र जनों ने उक्त आश्रम में ही रहकर अनुष्ठान किया और अनुष्ठान के तुरंत बाद उन सभी को तुरंत उनसे संबंधित स्थानों पर वापस भेज दिया गया। जानकारी मिली है कि यज्ञशाला में उक्त विशिष्ट लोग हर रोज 18 घंटे तक बिना किसी ब्रेक के चार से पांच तरह के खास किस्म के अनुष्ठान करते थे।
जो सूचनाएं छन-छन कर आ रही हैं, वो बताती हैं कि मालवा क्षेत्र के एक कैबिनेट मंत्री ने मप्र का सीएम बनने के लिए इस महा-अनुष्ठान को प्रायोजित किया था, इसीलिए इससे जुड़े घटनाक्रम ने दिल्ली और भोपाल में उच्च अधिकारियों के कान खड़े कर दिए हैं। यह भी पता चला है कि भाजपा के एक प्रमुख राष्ट्रीय पदाधिकारी, जो यूपी से हैं और वर्तमान में भोपाल में डेरा डाले हुए हैं, भी अगस्त के अंतिम सप्ताह में इस अनुष्ठान में आहूति डालने आए थे।
