विपक्ष का सवाल…जनगणना से पहले लागू नहीं हो सकता विधेयक, तो विशेष सत्र बुलाने का क्या मतलब
नई दिल्ली l संसद के विशेष सत्र में बुधवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन विधेयक) पर चर्चा हुई। सबसे पहले कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने सदन को बिल के बारे में बताया। उनके बाद कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी ने 10 मिनट तक अपनी बात कही। सोनिया ने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि बिल को फौरन अमल में लाया जाए। सरकार को इसे परिसीमन तक नहीं रोकना चाहिए। इससे पहले जातिगत जनगणना कराकर इस बिल में एससी-एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की जाए। चर्चा के दौरान टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण देने की मांग की। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने महुआ मोइत्रा का नाम लिए बगैर कहा- मुस्लिम आरक्षण मांगने वालों को मैं बताना चाहती हूं कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण वर्जित है। जिस प्रकार से विपक्ष भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है, उसमें ना फंसें। यानी सरकार ने साफ कर दिया की आरक्षण में आरक्षण नहीं मिलेगा।
चर्चा के दौरान विपक्षी दलों राकांपा और सपा ने बुधवार को महिला आरक्षण विधेयक में ओबीसी के लिए कोटा की मांग की और पूछा कि जब जनगणना और परिसीमन से पहले विधेयक को लागू नहीं किया जा सकता है तो विशेष सत्र बुलाने का क्या कारण है। लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले ने इस कानून को पोस्ट डेटेड चेक बताया और मांग की कि सरकार इसे लागू करने की तारीख और समयसीमा बताए। सुले ने 128वें संविधान संशोधन विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम को मंजूरी देने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को लेकर सवाल उठाया जबकि जनगणना और परिसीमन के बिना इसे लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि चूंकि जनगणना और परिसीमन की तारीख अभी तय नहीं हुई है, इसलिए विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में भी पेश किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि देश में सूखा है। इस विशेष सत्र में सूखे पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? सरकार से मेरा सवाल है कि अगली जनगणना की तारीख क्या है… परिसीमन की तारीख अनिश्चित है। अत, (महिला) आरक्षण विधेयक जो दो अनिश्चित तिथियों पर निर्भर है, हम उसे कैसे प्राप्त करेंगे? जनगणना या परिसीमन के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है, इसके लिए तारीख और समय सीमा क्या है।
महिला आरक्षण का बिल सबसे पहले राजीव लाए
सोनिया ने कहा कि स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने वाला कानून सबसे पहले मेरे पति राजीव गांधी लाए थे, जो राज्यसभा में 7 वोटों से गिर गया था। बाद में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने उसे पास करवाया। इसी का नतीजा है कि देशभर के स्थानीय निकायों में 15 लाख चुनी हुई महिला नेता हैं। राजीव का सपना अभी आधा ही पूरा हुआ है, यह बिल पास होने से सपना पूरा हो जाएगा। इस पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि ये सिर्फ पीएम मोदी का बिल है, जिसने गोल किया, नाम उसी का होता है। हमारे प्रधानमंत्री और हमारी पार्टी ये बिल लेकर आई है तो इनके पेट में दर्द हो रहा है। भाजपा द्वारा निशिकांत दुबे को चर्चा के मुख्य वक्ता के रूप में मैदान में उतारने पर सुले ने कहा कि उन्हें लगता है कि भाजपा अग्रिम जमानत ले रही है क्योंकि दुबे ने वही सवाल उठाए जो विपक्ष ने कल पूछे थे। उन्होंने कहा, हमें ओबीसी आरक्षण की मांग क्यों नहीं करनी चाहिए? यह एक सुनहरा अवसर है… बड़े दिल से विशेष सत्र में एससी, एसटी, ओबीसी के लिए संविधान संशोधन करते हैं। आइए देश को एक संदेश भेजें कि हम एससी, एसटी और ओबीसी के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसमें गलत क्या है? अगर उनका नजरिया अलग है तो भाजपा को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। समाजवादी पार्टी की सदस्य डिंपल यादव ने विधेयक में पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान करने की मांग की।
सांसदों को बांटी गई संविधान की कॉपी पर विवाद,कांग्रेस का आरोप-
प्रस्तावना से समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाए
संसद में जारी स्पेशल सेशन के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नई संसद के उद्घाटन के दौरान सांसदों को संविधान की जो कॉपी बांटी गई है, उसमें छपी प्रस्तावना से सेक्युलर और सोशलिस्ट शब्द हटा दिए गए हैं। इसके जवाब में सरकार ने कहा है कि संविधान की कॉपी में मूल संविधान की प्रस्तावना शामिल की गई है। जिसमें सेक्युलर और सोशलिस्ट शब्द नहीं थे। दरअसल, संविधान की प्रस्तावना में ये दोनों शब्द 1976 में 42वें संशोधन के जरिए शामिल किए गए थे। इस विवाद का कानूनी पहलू भी है। सुप्रीम कोर्ट अपने एक फैसले में संविधान की प्रस्तावना को संविधान का हिस्सा मान चुका है। ऐसे में अगर इसमें से कोई भी शब्द हटाना या शामिल करना है तो एक अन्य संविधान संशोधन की जरूरत पड़ेगी। कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया है कि हम जानते हैं ये शब्द 1976 में एक संशोधन के बाद जोड़े गए थे, लेकिन अगर आज कोई हमें संविधान देता है और उसमें ये शब्द नहीं हैं, तो यह चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि भाजपा की मंशा संदिग्ध है। ये बड़ी चतुराई से किया गया है। यह मेरे लिए चिंता का विषय है। मैंने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की, लेकिन मुझे इस मुद्दे को उठाने का मौका नहीं मिला। अधीर रंजन के आरोपों पर कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा, जब संविधान अस्तित्व में आया, तब समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द नहीं थे। ये शब्द संविधान के 42वें संशोधन में जोड़े गए।
90 में से केवल 3 सचिव ओबीसी कैसे होगा न्याय?
संसद में महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि मैं बिल (महिला आरक्षण) का समर्थन करता हूं। सब इस बात को मानते हैं कि महिलाओं को और जगह मिलनी चाहिए। लेकिन ये बिल पूरा नहीं है। ओबीसी आरक्षण होना चाहिए था। परिसीमन और जनगणना पूरी होने के प्रावधान के बजाय इसे फौरन लागू किया जाना चाहिए। जब भी विपक्ष जातीय जनगणना की बात करता है, भटकाने वाले मुद्दे लाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि 90 सचिव सरकार को संभाल रहे हैं। और इसमें से कितने ओबीसी से आते हैं? सिर्फ 3 ओबीसी से आते हैं। ये 5 प्रतिशत ही बजट कंट्रोल करते हैं। यह चर्चा भारत के लोगों को सत्ता का हस्तांतरण है। यह ओबीसी समुदाय का अपमान है। आप बिल आज लागू कीजिए और आज ही महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण दीजिए। ये लिस्ट ओबीसी समाज का अपमान है। आप कास्ट सेंसस रिलीज कीजिए, जो हमने किया था और आप नहीं करेंगे तो हम कर डालेंगे।
