
मंदिर के पास स्थित है भगवान मार्कण्डेश्वर महादेव का मंदिर। यहां भगवान के दर्शन मात्र से ही भक्त की आयु बढ़ती है।
रात तीन बजे खुलते हैं मंदिर के पट
मार्कण्डेश्वर महादेव मंदिर मे वैसे तो हर त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन सावन मास में मंदिर की दिनचर्या बदल जाती है। यहां मंदिर के पट रात तीन बजे खुल जाते हैं। भगवान का विशेष पूजन-अर्चन कपूर आरती के बाद भगवान का पंचामृत अभिषेक पूजन होता है। मंगला आरती के बाद भक्त दिनभर भगवान का अभिषेक पूजन करते हैं। इस पूजन-अर्चन के बाद शाम चार बजे से पुन: भगवान का पंचामृत अभिषेक पूजन, शृंगार व सांध्य आरती का क्रम जारी रहता है। मंदिर में यमराज की जंजीरों से बंदी प्रतिमा के साथ ही समीप में नृत्यकार हनुमान जी की भी चमत्कारी प्रतिमा है।
मंदिर के पास स्थित है भगवान मार्कण्डेश्वर महादेव का मंदिर। यहां भगवान के दर्शन मात्र से ही भक्त की आयु बढ़ती है। .
उज्जैन .// विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की वजह से प्रसिद्ध है, लेकिन यहां कई ऐसे मंदिर हैं जो विशेष महत्व रखते हैं। एक ऐसा ही भगवान मार्कंडेश्वर महादेव मंदिर है। यहां दर्शन मात्र से मृत्यु को परास्त करने का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। आज भी इस मंदिर में मृत्यु के देवता यमराज की प्रतिमा जंजीरों में बंधी दिखाई देती है।
विष्णु सागर के तट पर रामजनार्दन मंदिर के पास स्थित है भगवान मार्कण्डेश्वर महादेव का मंदिर। यहां भगवान के दर्शन मात्र से ही भक्त की आयु बढ़ती है। संपन्नता का आशीर्वाद भी मिलता है। इसी मान्यता की वजह से भक्त यहां जन्मदिन और विवाह वर्षगांठ पर आरोग्य की प्राप्ति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर के पुजारी जय गुरु का कहना है कि मार्कण्डेश्वर ऋषि ने यहां काल को परास्त कर मृत्यु पर विजय प्राप्त की थी। ऐसा कर वे चिरंजीवी हुए थे। इस मंदिर में काल अर्थात यमराज बंधन में बंधे हुए हैं। मंदिर में विराजित सिद्ध शिवलिंग दक्षिण दिशा की ओर है। यह मंदिर अत्यंत चमत्कारी है। पूजन-अर्चन करने से आयु और आरोग्यता की प्राप्ति तो होती ही है इसके साथ ही चौरियासी महादेव में से इस मंदिर का क्रम 36वे नंबर पर आता है। मंदिर में प्रतिदिन ही काफी भीड़ रहती है लेकिन तीन वर्षों में एक बार आने वाले अधिक मास में सैकड़ों श्रद्धालु भगवान का पूजन-अर्चन करने पहुंचते हैं।
ऐसे चिरंजीवी हुए थे ऋषि मार्कण्डेय
पद्म पुराण के उत्तरकांड में मार्कण्डेय के चिरंजीवी होने की कथा मिलती है। कथा के अनुसार ऋषि मृकंड मुनी ने पुत्र प्राप्ति के लिए पत्नी के साथ घोर तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने ऋषि से पूछा तुम्हें गुणहीन दीर्घायु पुत्र चाहिए या गुणवान अल्प आयु। इस पर ऋषि ने गुणवान पुत्र का वरदान मांगा जिस पर भगवान ने तथास्तु कहां और अंर्तध्यान हो गए। इसके उन्हें ऋषि मार्कण्डेय पुत्र रूप में प्राप्त हुए। जब मार्कण्डेय 12 वर्ष के हुए तो पिता मृकंड उनकी आयु को लेकर चिंतित रहने लगे। पुत्र के पूछने पर उन्होंने सारा वृतांत सुनाया। मार्कण्डेय आयु प्राप्त करने तथा चिरंजीवी होने की कामना से तपस्या करने लगे। अंत समय आने पर यमराज उनके प्राण हरने आए। तब मार्कण्डेय महामृत्युंजय का जाप कर रहे थे और शिवलिंग से लिपट गए। भक्त को संकट में देख शिव प्रकट हुए और उन्होंने यमराज को यहीं बांध दिया। साथ ही मार्कण्डेय का चिरंजीवी होने का वरदान दिया।
