निप्र रतलाम मध्यप्रदेश शासन पर करोड़ों कर्ज और चुनावी साल में सत्ता और विपक्ष की चुनावी बहना योजना और कर्ज माफ़ी से और राज्य पर और कर्ज के आसार के बाद रतलाम जिले को संभाग और जावरा को जिला बनाने की कवायद चुनावी वर्ष में तेज हो गई हैं और हो भी क्यों ना जनता को गुमराह करने का जो समय है ,विगत 18 वर्षो से मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है लेकिन अब तक ना सांसद और ना विधायक के करीबी प्रतिनिधियों ने जिले को लेकर जमीनी लड़ाई लड़ी और ना ही कांग्रेस के 15महीने सत्ता में रहने पर जावरा को जिला बनाने के लिए कांग्रेस के बड़े समाजसेवी और वरिष्ठ नेता ने आवाज़ उठाई , वर्तमान में आगामी विधानसभा चुनाव आने से पहले 25 वर्षो की जावरा को जिला बनाने की मेहनत चुनावी दौड़ में पक्ष विपक्ष दलों के नेताओं को याद आ गईं, दोनों दलों के नेता अलग अलग तरीके से जावरा को जिला बनाने की नीतियां बना रहे हैं, कांग्रेस नेता विरेंद्र सिंह सोलंकी विधानसभा चुनाव की रणनीति में जावरा को जिला बनाने के लिए मावता से ग्रामीण क्षेत्र में पद यात्रा निकालने की योजना बना रहे हैं, वही भाजपा नेता पिंकेश मेहरा और कांग्रेस नेता वरुण शोत्रीय अन्य समाजिक संगठनो और समितियों के माध्यम से जावरा को जिला बनाने की मांग पर घर घर हस्ताक्षर अभियान चलाने की योजना बना रहे हैं, कागजों पर जावरा को जिला बनाने की सुध चुनावी साल में वो भी तब जब चुनाव को सिर्फ पांच माह बचे हैं , क्षेत्र में जावरा मंदसौर लोकसभा से सांसद सुधीर गुप्ता और जावरा विधायक राजेंद्र पांडे और रतलाम विधायक चैतन्य कश्यप जिले की मांग को लेकर अब तक आगे नहीं आए जहा रतलाम जिले की तहसील से लेकर जनपद क्षेत्रों के कई गावों में पानी की समस्या है, ग्रामीण क्षेत्र के दूरस्थ गावों में परिवहन की कमी है, ग्रामीण चिकित्सा व्यवस्था की कमी हैं ,शिक्षा व्यवस्था की कमी हैं जनभागीदारी से समाजिक मुद्दों से ध्यान हटा कर चहरे चमकाने की दौड़ में लगे क्षेत्रीय नेता जनभागीदारी से कार्य में भी फैल होकर जनहित के कोई कार्य नहीं करा पा रहे हैं। एक और रतलाम को ज़िला बने वर्षों बीत गए लेकिन आज भी सड़के खुदी हुई, और नदियों में जुड़ती नहरों में गंदगी ही नज़र आती हैं, विगत महीनों पूर्व प्रदेश नगर निगम और पंचायत चुनाव के बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया कई पंचायते जल समस्या से जूझ रही है, स्कूलों में शिक्षक की कमी है, जावरा नगर पालिका अध्यक्ष और सीईओ की उपस्थिति के बाद भी मलेनी नदी के बैराज में जावरा के लिए रोका गया बहुउपयोगी जल गेट न लगाने से बह गया क्षेत्रीय नेता अपनी गली और व्यवस्था की समस्या को छोड़ ज़िला तलासने में लगे है बड़े अफ़सोस कि बात है। जन समस्याओं के लिए ज़िले की नहीं जिम्मेदारी लेने की जरूरत है।
