मोबाईल फोन को हम इतना देख समझ रहे है इससे कोई आज के समय में अछूता भी नहीं है । सारी दुनिया को हम देख , समझ ,बात आदि इससे कर सकते है । इसके पिछे सही से चलने का जरूरी है उपकरण वो है बैटरी चार्ज रखना । क्या इसी तरह हमारी जिन्दगी में भी हर दृष्टिकोण से यह आवश्यक नहीं है बैटरी की तरह चार्ज करना स्वयं को । एक घटना प्रसंग एक सम्पन्न व्यवसायी कार में मुम्बई से गोवा जा रहे थे । रास्ते में यूँ ही शौक़िया मोबाईल एप में ओशो का व्याख्यान सुन रहे थे । तभी अचानक एक छोटे से गतिअवरोधक के झटके ने तन्द्रा से उनको जगा दिया। उस समय यह एक वाक्य कान में टकराया की जो भी करना है करो अभी। अभी नहीं तो कभी पता नहीं । अवसर मिलेगा सही से कि नहीं फिर कभी जीवन में । यह बात दिमाग़ में चोट कर गई। तत्क्षण भीतर में अंतर्मन में घर कर गई। वह घड़ी नवजागरण की धड़ी बन गई। तुरन्त ड्राइवर को बोले कार की दिशा बदली और सीधे आ गये पुणे। बिना कुछ सोचे बिना कुछ गुणे आदि । और ओशो ध्यान केन्द्र में सीधे
प्रवेश ले लिया। पता नहीं क्यों उनको प्रवेश लेते ही मन में एक अजीब सा सन्तोष हुआ। यह उनके लिए आध्यात्मिकता की तरफ अकस्मात ही टर्निंग प्वाइंट था। यह सब सम्भव हुआ मोबाईल फोन से । तभी तो कहा है की इससे ( स्वयं से ) कितनी भी आप बात कर ले आपकी बैटरी कभी डिस्चार्ज नही होगी बल्कि जितनी बात करेंगे उतनी ही फुल चार्ज होगी ।इस से बात करने के लिए यह सब जगह संसार भर में रोमिग फ्री है । यह नया स्मार्ट फ़ोन हैं Meditation इसलिए थोडा सा ध्यान का स्पर्श तो करके देखिये और साथ में बैटरी चार्ज से अपना मन जोड़ेंगे तो हम पायेंगे की हम भी आत्म सूखो की और गतिमान है।
प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़ )
