यह लेख माननीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता
मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा लिखा गया है।
‘भारत में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की प्रमात्रा रिपोर्ट सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (एमओएसई) तथा राष्ट्रीय ड्रग निर्भरता उपचार केन्द्र (एनडीडीटीसी) द्वारा वर्ष 2019 में जारी की गई थीजिसमें भारत में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की बढ़ती अभिवृत्ति को दर्शाया गया था। अनेक ड्रग परिपाटी के भाग रहे हैं तथा ये आज भी देश के कुछ हिस्सों में बने हैं। तथापि, ड्रग का दुरुपयोग परम्परागत उपयोग से परे पहुंच गया है यह युवा शीले पदार्थों के दुरुपयोग एक मुद्र हो रहा है। चिकित्स शोध के अनुसार यह स्वीकृत किया गया है कि ड्रग की लत अथवा नशीले पदार्थों के दुरुपयोग का विकार एक क्रोनिक व रिलेप्सिंग स्वास्थ्य संबंधी अवस्था है जो जेनेटिक जैविक परिवेश तथा जीवन शैली से संबंधित कारकों की वजह से होती है तथा इसका उपचार, परामर्श, जीवन शैली में बदलाव तथा दवाइयों से चिकित्सा उपचार करके किया जा सकता है। इसलिए किसी भी समाज में ड्रग संबंधी समस्याओं का समाधान करने के लिए एक सूचना संपन्न व बहु आयामी कार्यनीति अपनाने की जरूरत होती है जो समय के अनुसार ड्रग आपूर्ति का समाधान करती है और ड्रग की मांग में कटौती होती है। सरकार के नकोर्ड तंत्र ने बड़े पैमाने पर ड्रग के दुरुपयोग संबंधी समस्या का समाधान करने मदद की है। इसके दिशा तथा अभिसरण के परिणामस्वरूप सभी एजेंसियों एवं हितभागियों द्वारा एकीकृत कार्रवाई की गई है जो एकल प्लेटफार्म पर नशीले पदार्थों की दुरुपयोग की समस्या का समाधान कर रहे हैं।
ड्रग के दुरूपयोग तथा अवैध तस् करी के विरूद्ध अंतर्राष् ट्रीय दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री ने
ट्विट किया कि “मैं हमारे समाज से ड्रग के संकट का उन् मूलन करने के लिए जमीनी स् तर पर कार्यरत
सभी की प्रशंसा करता हूँ। जीवन को बचाने का प्रत् येक ऐसी प्रयास महत् वपूर्ण है। आखिरकार, ड्रग् स
अपने साथ अंधकार, विनाश तथा विध् वंस ही लेकर आती है।”
सरकार के कोई तंत्र ने ड्रग के दुरूपयोग की समस् या का समाधान करने के लिए बड़े स् तर पर सहायता की है। इसके निर्देशन एवं अभिसरण के फलस् वरूप नशीले पदार्थों के दुरूपयोग के विरुद्ध संघर्ष कर रहे सभी एजेंसियों तथा हितभागियों द्वारा एकल प्लेटफार्म पर एकीकृत कार्य करना संभव हुआ है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के नशामुक्त भारत अभियान, एक समुदाय आधारित जन आंदोलन अभियान की शुरूआत 15 अगस्त, 2020 को देश के 272 सर्वाधिक असुरक्षित जिलों में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध की गई थी। जन-आंदोलन के दूसरे कदम के रूप में वर्ष 2022 में अन्य 100 सर्वाधिक असुरक्षित जिलों को इस सूची में जोड़ा गया था।
नशामुक्त भारत अभियान के जन्म के समय से परामर्श संबंधी कार्यकलापों के माध्यम से बेहतरीन समुदाय
संपर्क हेतु सक्रिय रूप से संकल्पना बनाने एवं कार्य करने वाले हितभागियों की सहायता से ड्रग की माँग में
कटौती में बड़े परिवर्तन किए गए हैं। आज की तारीख तक 9.3 करोड़ से अधिक लोगों को नशीले पदार्थों के
दुरुपयोग के बारे में जागृत किया गया है जिनमें 3 करोड़ से अधिक युवा तथा 2 करोड़ से अधिक महिलाएं
शामिल हैं। इस मिशन में 2.7 लाख से अधिक शैक्षिक संस्थाओं ने भाग लिया है।
नशामुक् त भारत अभियान महिलाओं बच् चों, शैक्षिक संस् थाओं तथा सिविल सोसायटी संगठनों की सहायता कर उन् हें इस कार्रवाई में आगे लाता है। इस अभियान में 8000 से अधिक मास् टर स वयंसेवक का मजबूत बल है जो नशीले पदार्थों के उपयोग के प्रतिकूल प्रभावों, सबसे दुरस् त क्षेत्रों में नशीले पदार्थों के साथ संघर्षरत लोगों के पुनर्वास तथा निवारण की प्रक्रियों का संदेश देने के लिए प्रशिक्षित तथा जानकार हैं। क्षेत्रीय भाषाओं में जनसामान् य से जुड़ने तथा सांस् कृतिक रूप से गहरा प्रभाव डालने और नशीले पदार्थों की मांग को अंतः प्रभावित करने के लिए कदम उठाने हेतु कई कार्यक्रम जैसे मैराथन, लोक संगीत, स् थानीय खेल-कूद कार्यक्रम, नाव अथवा साईकिल रेलियां तथा कई अन् य कार्यकलाप आयोजित किए जाते हैं। यह आश्रित लोगों तक पहुंचने तथा उनकी पहचान के लिए उच् च शैक्षिक संस् थानों, विश् वविद्यालयों, परिसरों तथा स् कूलों के साथ भागीदारी करने को प्रतिबद्ध है। सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम के साथ अस् पतालों तथा पुनर्वास केन् द्रों में परामर्श और उपचार सुविधाओं पर बल देते हुए यह अभियान ड्रग् स के उपयोग के बढ़ते ट्रेंड के लिए आरंभ से अंत तक एक संकल् प है।
सामाजिक न् याय और अधिकारिता मंत्रालय की अम् बेला स् कीम नशीली दवा की मांग में कमी की राष् ट्रीय कार्य योजना निवारक शिक्षा, जागरूकता, पुनर्वास उपचार, समाज के हाशिए पर खड़े लोगों को वापस लाने तथा गरिमा जीवन जीने के लिए पर्याप्त सहायता प्रदान करने हेतु राज् य सरकारों, संघ राज् य क्षेत्रों, एनजीओ/ अन् य स् वैच्छिक संगठनों, जिला और सरकारी अस् पतालों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। ड्रग् स के साथ संघर्षरत लोगों को निःशुल् क सुविधाएं प्रदान करते हुए देश में नशीली दवाओं के दुरूपयोग के पीडितों हेतु 341 एकीकृत पुनर्वास केन्द्र (आईआरसीए), 19 समुदाय आधारित संगति परक इंटरवेंशन (सीपीएलआई) 72 आउटरिच और ड्रॉपइने केन् द्र (ओडीआईसी) तथा 14 जिला नशामुक्ति केन् द्र (डीडीएसी) हैं। लाभवंचितों, उनके परिवारों तथा सामाजिक दायरे को चुनौतयों की जानकारी देने में सहायता करनातथा उनके लिए सकारात् मक वातावरण तैयार करना।
प्रगति के इस दौर में सामाजिक न् याय और अधिकारिता मंत्रालय राष् ट्रीय ड्रग् स निर्भता
(एनडीडीटीसी) एम् स, नई दिल् ली के सहयोग से नशीली दवाओं के दुरूपयोग के पीडितों के लिए 25
उपचार सुविधाएं (एटीएफ) प्रदान करने को तैयार हैं।
सामाजिक न् याय और अधिकारिता मंत्रालय के अभियान, नशामुक् त भारत अभियान के बैन के तले राष् ट्र को नशीली दवाओं के दुरूपयोग के पीडितों के लिए 25 उपचार सुविधाएं समर्पित की। ये 25 नशीली दवाओं के दुरूपयोग के पीडितों के लिए उपचार सुविधाएं देशभर में सरकारी अस् पतालों में स्थित है इन् हें देश के अधिकतर शहरों तथा जिलों को कवर करने के लिए बढ़ाया जाएगा। सिमडेगा, झारखंड अथवा आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में जिला अस् पतालों से लेकर सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज, विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश अथवा शेर-ए-कश् मीर आयुर्विज्ञान संस् थान, बैनमिना, कश् मीर जैसी बढ़ी अकादमिक संस् थाएं
इसमें शामिल हैं।
ये नशीली दवाओं के दुरूपयोग के पीडितों हेतु उपचार सुविधाएं (एटीएफ) 25 जिलों के सरकारी अस् पतालों स्थापित की जाएंगी तथा सामान् य स् वास् थ् य देखभाल ढांचे के रूप में नशीली दवाओं के दुरूपयोग के रोगियों का उपचार करेगी। सामाजिक न् याय और अधिकारिता विभाग इस स् कीम को पूरी तरह से वित्तपोषित करता तथा प्रशिक्षित स् वास् थ् य पेशेवरों निःशुल् क दवाओं एवं टिकाऊ अवसंरचना सहायता सेवाओं के प्रावधान में भाग लेने वाले सरकारी असू तपालों की सहायता करता है।
जैसा कि गृह मंत्री ने संसद में कहा, “हमारी सरकारी नीति बहुत स् पष् ट है, जो ड्रग का सेवन कर रहे हैं ये पीड़ित हैं। हमें उनके प्रति संवेदनशील होना चाहिए तथा पीडितों को उनके पुनर्वास हेतु अनुकूल माहौल देना चाहिए”। नशीले पदार्थों के दुरूपयोग का मुद्दा अत् यधिक महत् वपूर्ण सामाजिक समस्या है जो आयु समूहों, लैंगिक भिन् नता, समुदायों एवं क्षेत्रों में समाज के वर्गों में कटौती करता है तथा परिवारों एवं व् यक्तियों की व् यक्तिगत वृद्धि को प्रभावित करता है। पुनर्वास के अवसर प्रदान करते हुए इससे पीडितों से जुड़े कलंक को समाप् त करने तथा युवाओं में ‘ड्रग् स की पहली बार न छूना के विचार को प्रभावी रूप से अतंगृहीत करते हुए नेशीले पदार्थों के मामले के समाधान के लिए बहुआयामी कार्यनीति आवश् यक है। अभियान सफलतापूर्वक इन विचारों को आकर्षित करता है तथा नशा मुक् त भारत के लक्ष् य को प्राप् त करने के लिए आगे आने हेतु जनता का समर्थन चाहता है।
