नई दिल्ली । इस वर्ष प्रतिष्ठित पद्म भूषण के लिए चुनी गईं लेखिका सुधा मूर्ति ने कहा है कि जो लोग सुर्खियों में रहते हैं उनके साथ हमेशा विवाद भी रहते हैं। उन्होंने इनसे और अन्य लोगों से नैतिक रूप से सही होने और ईमानदारी के साथ काम करने की अपील की। सुधा मूर्ति ने वर्ष 1981 में कंपनी स्थापित करने के अपने पति के विचार को पूरा समर्थन देते हुए उन्हें 10 हजार रुपये की राशि दी थी। देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए चुने जाने के बाद एनडीटीवी से एक इंटरव्यू में सुधा मूर्ति कहा हर किसी की अपनी क्षमताएं होती हैं और अपनी सीमितताएं भी।
महिलाओं खासतौर पर वे महिलाएं जो निजी जीवन के साथ पेशेवर जीवन में भी सक्रिय हैं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा मैं सभी भारतीय महिलाओं से कहना चाहती हूं कि जब बच्चे आते हैं तो वे प्राथमिकता बन जाते हैं। इसके बाद जब आप फिर अपने पेश से जुड़ते हैं तो उसी स्तर को हासिल नहीं कर पाते। याद रखिए आयु बंधन नहीं है। यह आपका जूनून है जो आपको शीर्ष पर ले जाता है। अपने खुद के जीवन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा जब मैंने अपने करियर को पीछे छोड़ दिया तो कभी नहीं सोचा था कि यह (लेखन का करियर) संभव होगा।। यह मेरे लिए मुश्किल था क्योंकि मैं टेक्नोक्रेट थी और टेक्निकल कंपनी में काम पसंद करती थी लेकिन मैंने शिकायत के बजाय कुछ और करना पसंद किया। गौरतलब है कि मूल रूप से इंजीनियर और कंप्यूटर साइंस एक्सपर्ट सुधा मूर्ति ने 20 से अधिक किताबें लिखी हैं।
उन्होंने एक समाचार चैनल से कहा मुझे लिखने का जुनून है। मैं कन्नड़ में लिखती थी।जब इंग्लिश में मेरी पहली पुस्तक प्रकाशित हुई तो यह मेरी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण मोड़ था क्योंकि तब इसका सभी भाषाओं में ट्रांसलेशन किया जा सकता था।।।मैं खुद को फिर से तराश सकती थी। इन्फोसिस दुनिया की शीर्ष आईटी कंपनियों में से एक हैं। उन्होंने कहा पैसा जीवन में बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि तब आप अधिक लोगों की मदद कर सकते हैं (लेकिन) संपत्ति में दिखाने के लिए क्या है? मुझसे पहले अमीर लोग थे और मेरे बाद भी होंगे।
