भगवान श्री कृष्ण की पांचवी पटरानी मित्रविंदा
उज्जैन ,(अभिजीत दुबे माधव एक्सप्रेस) अवंतिका नगरी की परम पावन धरा पर समय-समय पर दिव्य शक्तियों का प्राकट्य होता आ रहा है ऐसी ही दिव्य शक्ति का प्राकट्य द्वापर युग के चतुर्थ चरण में हुआ श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण में वर्णित कथा के अनुसार अवंती नरेश श्री जयसेन एवं रानी राजाधीदेवी के गर्भ से श्री राधा अंशा अवतार मां मित्रविंदा का प्राकट्य हुआ राजकुमारी मित्रविंदा का विवाह श्री कृष्ण के साथ हुआ और वह श्री कृष्ण की पांचवी पटरानी कहलाई मां मित्रविंदा को वर्क हर्ष अनिल आदि 10 पुत्र हुए अवंतिका नरेश की ह्रदय दुलारी राजकुमारी मित्रविंदा का मंदिर भेरूगढ़ रोड शिप्रा नदी के पावन तट पर, वैसे तो अवंतिका भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली के नाम से जानी जाती है पर भगवान का एक और नाता है भगवान का ससुराल है अवंतिका नगरी मित्रविंदा धाम, श्री कृष्ण के ससुराल मित्रविंदा धाम आश्रम मैं प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी 19′ अगस्त श्री कृष्ण जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाया गया श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मंदिर में भजन संध्या का आयोजन किया गया जिसमें सभी श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर आनंद प्राप्त किया हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ लेकर महा प्रसादी ग्रहण करी मित्रविंदा धाम का मंदिर का निर्माण 2014 मे परम पूज्य संत श्री शंकर गुरुजी महाराज *देहावसान हो चुका था (बालक) के द्वारा किए संकल्पित कार्य को साकार रूप देने के लिए प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उनकी कृपा से मंदिर की स्थापना व्यवस्थापक गिरीश गुरुजी एवं अन्य धर्मावलंबियों की उपस्थिति में की गई यह सभी जानकारी व्यवस्थापक गिरीश गुरु जी महाराज ने दी
