सोमेश्वर महादेव मंदिर के लिए अन्न छोड़ चुकीं एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती बेगमगंज पहुंचीं.
रायसेन. सोमेश्वर महादेव मंदिर का ताला खुलवाने के लिए अन्न छोड़ चुकीं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अब ये जिम्मेदारी सांसद, मंत्री और विधायक को दी है. उन्होंने सिलवानी विधायक रामपाल सिंह से कहा है कि इसका ताला जल्द खुलवाएं और मुझे अन्न खिलाएं. क्योंकि, दवाईयों के चलते केवल फलाहार स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. खरगोन की घटना पर उमा ने कहा कि हम कोई भी ऐसी स्थिति नहीं बनाएंगे जिससे विरोधियों को मौका मिले. उमा रविवार को निजी कार्यक्रम भाग लेने बेगमगंज पहुची
गौरतलब है कि उमा भारती ने हाल ही में रायसेन स्थित सोमेश्वर महादेव के ताले खोलने की कोशिश की थी, लेकिन प्रशासन ने ऐसा होने नहीं दिया था. उस वक्त उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक मंदिर का ताला नहीं खुलता, तब तक वे अन्न नहीं खाएंगी. उसके बाद उन्होंने दरवाजे पर जल अर्पण किया और चली गईं. अब कई दिनों बाद भी मंदिर का ताला नहीं खुला है और वे बिना अन्न के ही गुजारा कर रही हैं.
इस बीच प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती रविवार को शादी में शामिल होने बेगमगंज पहुंचीं. इस मौके पर उन्होंने मीडिया से कहा कि पहले ताला खुला हुआ था. लेकिन कांग्रेस की दो मुखी नीति के कारण दोबारा ताला लग गया. हालांकि, ताला बहुत छोटा है. दरवाजा जो लगा है, वह भी खुला हुआ है. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि रायसेन का वातावरण खराब नहीं है. जिस जगह किले पर नवाज पढ़ी जाती है, वह मंदिर से काफी दूर है. उन्होंने कहा कि खरगोन की घटना के बाद तय किया है कि हम कोई भी ऐसी स्थिति नहीं बनाएंगे, जिससे हमारे विरोधियों को वातावरण खराब करने का मौका मिले.
उमा भारती ने कहा कि ताला खुलवाने की जिम्मेदारी यहां के सांसद रमाकांत भार्गव मंत्री, मंत्री प्रभुराम चौधरी और विधायक रामपाल सिंह को दी है. ये लोग केंद्रीय पुरातत्व विभाग से बात करें. ताला खोलने पर उनके नियम का पालन किया जाएगा. वहीं, उन्होंने विधायक रामपाल सिंह से कहा कि मंदिर का ताला खुलवा कर मुझे अन्न खिलाइए, अभी फलाहार तो कर रही हूं, लेकिन दवाई के कारण फलाहार स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. बता दें, रायसेन के किले पर स्थित सोमेश्वर शिव मंदिर का ताला साल में एक बार शिवरात्रि को खोला जाता है. शिव महापुराण कथा के दौरान रायसेन में पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा उठाए गए भगवान कैद मुक्त के मुद्दे के बाद उमा भारती यहां अभिषेक करने पहुंचीं थीं. इस दौरान उन्हें बाहर से ही जल चढ़ाना पड़ा.
