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धनतेरस विशेष |
भगवान धन्वंतरि की परंपरा हमें याद दिलाती है कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और लंबा निरोगी जीवन ही वास्तविक समृद्धि है। धनतेरस आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। कहीं सोने-चांदी की खरीदारी की तैयारी होती है, तो कहीं नए बर्तन और घर के लिए शुभ वस्तुएं खरीदी जाती हैं। हर परिवार चाहता है कि मां लक्ष्मी की कृपा उसके घर में बनी रहे और जीवन में सुख-समृद्धि आए। लेकिन इस उत्सव के बीच एक बात पर हमें जरूर विचार करना चाहिए—क्या समृद्धि का अर्थ केवल धन और संपत्ति है? क्या जीवन में इससे भी अधिक कीमती कोई चीज है?निश्चित रूप से है, और वह है हमारा स्वास्थ्य।हम सभी अपने परिवार की खुशियों के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। बच्चों का भविष्य संवारने, घर बनाने, व्यवसाय बढ़ाने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने में अपना पूरा जीवन लगा देते हैं। लेकिन कई बार इसी दौड़ में अपने स्वास्थ्य को पीछे छोड़ देते हैं। जब शरीर स्वस्थ रहता है, तब छोटी-छोटी खुशियां भी बड़ी लगती हैं। वहीं जब स्वास्थ्य साथ नहीं देता, तब बड़ी से बड़ी संपत्ति भी खुशी नहीं दे पाती। शायद इसी जीवन सत्य को हमारी भारतीय परंपरा ने हजारों वर्षों पहले समझ लिया था। यही कारण है कि धनतेरस का संबंध केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि आरोग्य और आयुर्वेद से भी जुड़ा हुआ है।भगवान धन्वंतरि : आयुर्वेद और आरोग्य की प्राचीन विरासतपौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। भगवान धन्वंतरि का स्मरण हमें यह संदेश देता है कि जीवन में स्वास्थ्य का स्थान सर्वोपरि है। हमारी भारतीय चिकित्सा परंपरा आयुर्वेद केवल बीमारियों का इलाज करने तक सीमित नहीं है। आयुर्वेद का मूल उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोग को दूर करना है।आयुर्वेद में शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को स्वस्थ जीवन का आधार माना गया है। यह हमें सिखाता है कि स्वास्थ्य केवल बीमारी का न होना नहीं है, बल्कि शारीरिक ऊर्जा, मानसिक शांति, अच्छी पाचन शक्ति, पर्याप्त नींद और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी अच्छे स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।आज के समय में आयुर्वेद की जरूरत पहले से अधिक क्यों?आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित भोजन, मोबाइल और स्क्रीन पर बढ़ता समय, देर रात तक जागना, काम का तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनते जा रहे हैं। कम उम्र में ही लोग एसिडिटी, कब्ज, माइग्रेन, नींद की परेशानी, एलर्जी, तनाव और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। अक्सर हम छोटी-छोटी परेशानियों को नजरअंदाज करते रहते हैं और जब समस्या बढ़ जाती है, तभी स्वास्थ्य के प्रति गंभीर होते हैं। आयुर्वेद हमें अपने शरीर के संकेतों को समझने और समय रहते अपनी जीवनशैली में सुधार करने की प्रेरणा देता है। सही समय पर भोजन करना, अपनी प्रकृति और जरूरत के अनुसार आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना और मन को तनावमुक्त रखने का प्रयास करना स्वस्थ जीवन की बुनियादी आदतें हैं। यह समझना भी जरूरी है कि आयुर्वेद का अर्थ केवल जड़ी-बूटियां या औषधियां लेना नहीं है। आयुर्वेद एक संपूर्ण जीवन पद्धति है, जिसमें आहार, विहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या और मानसिक स्वास्थ्य सभी का अपना महत्व है।हमारी रसोई में भी छिपा है स्वास्थ्य का खजानाभारतीय रसोई में सदियों से हल्दी, अदरक, जीरा, धनिया, सौंफ, अजवाइन और कई अन्य पारंपरिक सामग्रियों का उपयोग होता आया है। ये केवल भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि हमारी पारंपरिक खानपान संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं।आयुर्वेद ऋतु के अनुसार खानपान अपनाने पर विशेष जोर देता है। हर मौसम में शरीर की जरूरतें बदलती हैं और उसी के अनुसार भोजन तथा दिनचर्या में बदलाव करना उपयोगी होता है।बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लिए जरूरी है स्वास्थ्य जागरूकताएक स्वस्थ परिवार ही एक खुशहाल समाज की नींव होता है। बच्चों के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, खेलकूद और अच्छी दिनचर्या जरूरी है। युवाओं के लिए तनाव प्रबंधन और जीवनशैली का संतुलन महत्वपूर्ण है। वहीं बुजुर्गों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, उचित आहार और उनकी शारीरिक क्षमता के अनुसार सक्रिय रहना जरूरी है। परिवार में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की शुरुआत घर से ही होती है। अगर माता-पिता स्वयं अच्छी आदतें अपनाते हैं, तो बच्चे भी उनसे बहुत कुछ सीखते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि स्वास्थ्य की देखभाल किसी एक दिन का संकल्प नहीं, बल्कि जीवनभर निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।इस धनतेरस पर एक नया संकल्प लेंइस बार जब आप धनतेरस पर सोना, चांदी या कोई नई वस्तु खरीदें, तो अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य के लिए भी कुछ समय निकालें।* रोज कुछ समय योग और व्यायाम के लिए निकालें।* समय पर और संतुलित भोजन करने की आदत डालें।* पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने का प्रयास करें।* मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या में बदलाव करें।* बीमारी को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय सलाह लें।* अपने परिवार को भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें।डॉ. सुषमा खंडेलवाल द्वारा विशेष संदेश”एक आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में अपने अनुभव में मैंने एक बात बहुत करीब से महसूस की है कि लोग अक्सर अपने स्वास्थ्य की कीमत तब समझते हैं, जब शरीर किसी परेशानी का संकेत देने लगता है। मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है कि लोगों को केवल बीमारी के उपचार के बारे में ही नहीं, बल्कि स्वस्थ रहने के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जाए। मेरा मानना है कि आयुर्वेद हमें अपने शरीर को समझना सिखाता है। हर व्यक्ति की प्रकृति, खानपान, दिनचर्या और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें अलग होती हैं। इसलिए स्वास्थ्य के लिए एक ही उपाय सभी पर लागू नहीं हो सकता। व्यक्तिगत प्रकृति और आवश्यकता के अनुसार उचित मार्गदर्शन बहुत महत्वपूर्ण है।आज जरूरत है कि हम अपनी पुरानी स्वस्थ परंपराओं को आधुनिक जीवनशैली के साथ संतुलित करें। छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाकर हम अपने जीवन की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।इस धनतेरस पर मैं सभी से यही कहना चाहूंगी कि सोना-चांदी खरीदना शुभ हो सकता है, लेकिन अपने स्वास्थ्य की रक्षा करना जीवन का सबसे बड़ा निवेश है। आइए, इस धनतेरस पर केवल धनवान बनने का नहीं, बल्कि स्वस्थ और खुशहाल बनने का भी संकल्प लें।आप सभी को धनतेरस एवं भगवान धन्वंतरि जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।”डॉ. सुषमा खंडेलवालM.D. (Ayurved) | Naadi Vaidya 22+ वर्षों का आयुर्वेदिक चिकित्सा अनुभवडॉ. सुषमा का आयुर्वेद हब (Dr. Sushma’s Ayurveda Hub) सपना संगीता मेन रोड, इंदौर संपर्क: 9424216317
