मीरपुर, 10 सितंबर: रोजमर्रा के तनाव और भागदौड़ से दूर, राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित 1,300 वर्ष पुराने श्री हमीरपुरा पार्श्वनाथ जैन तीर्थ ने आध्यात्मिक साधना के एक अनूठे केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यहां चल रहे ‘निज में निवास–मीरपुर चातुर्मास’ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौन व्रत धारण कर तथा स्वेच्छा से मोबाइल फोन का त्याग कर आध्यात्मिक साधना में लीन हैं। 50 दिवसीय यह आध्यात्मिक साधना शिविर 28 जुलाई से शुरू हुआ है और 16 सितंबर तक चलेगा।
इस चातुर्मास में 300 से अधिक श्रद्धालु, साथ ही पूज्य जैन साधु-साध्वियां, प्रतिदिन होने वाली आध्यात्मिक साधनाओं में भाग ले रहे हैं। ‘निज में निवास–मीरपुर चातुर्मास’ का दूसरा आयोजन आचार्य भगवंत विजय लब्धिवल्लभसूरिश्वरजी महाराज के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
पिछले वर्ष पहला ‘निज में निवास–सिद्धवड़ चातुर्मास’ पालीताना स्थित सिद्धवड़ तीर्थ में आयोजित किया गया था। इस अनूठी पहल को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी और इसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया था। पहले चातुर्मास की सफलता के बाद अब इसका दूसरा संस्करण मीरपुर में आयोजित किया गया है।
इस वर्ष के चातुर्मास की प्रमुख विशेषताओं में कार्यक्रम के लिए स्थायी बुनियादी ढांचे का निर्माण भी शामिल है। महज चार महीनों में 50,000 वर्ग फुट क्षेत्र में एक विशेष परिसर तैयार किया गया। इसमें प्रवचन सभागार, उपाश्रय, भोजनशाला, धर्मशाला और अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं। इस चातुर्मास को मौन साधना और आध्यात्मिक अनुशासन के प्रति समर्पित मुंबई के परिवारों का सहयोग प्राप्त हो रहा है।
चातुर्मास की दैनिक दिनचर्या अत्यंत कठोर और अनुशासित है। आध्यात्मिक साधना सुबह 4 बजे शुरू होकर रात 9:30 बजे तक चलती है। प्रतिभागियों के लिए सफेद वस्त्र धारण करना और पूर्ण मौन का पालन करना अनिवार्य है। मोबाइल फोन के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध है। प्रत्येक सुबह लगभग 45 मिनट योग और प्राणायाम करना भी अनिवार्य है।
कार्यक्रम में दार्शनिक प्रवचन और चिंतन-सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य प्रतिभागियों को अपने अंतर्मन को जानने तथा आध्यात्मिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।
लब्धिवल्लभसूरिश्वरजी महाराज ने बताया कि चातुर्मास के दौरान दो आध्यात्मिक शिविर और नवपदजी ओली का भी आयोजन किया जाएगा। पहला आध्यात्मिक शिविर 23 से 27 सितंबर तक और दूसरा शिविर 7 से 11 अक्टूबर तक आयोजित होगा। वहीं नवपदजी ओली 18 से 26 अक्टूबर तक आयोजित की जाएगी।
‘निज में निवास–मीरपुर चातुर्मास’ को ऋषभनिधिश्रीजी महाराज का भी मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। वे साध्वी मंदिरनिधिश्रीजी महाराज के शिष्य हैं और आचार्य श्रीमद् विजय अभयशेखरसूरिश्वरजी महाराज की शिक्षाओं के अनुयायी हैं। आचार्य श्रीमद् विजय लब्धिवल्लभसूरिश्वरजी महाराज, धर्मचक्र तपप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जगवल्लभसूरिश्वरजी महाराज के श्रद्धेय शिष्य हैं।