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इंदौर। प्रो . सतीश चोपड़ा केशरी वाटिका में चल रहे द्विशताब्दी चातुर्मास के अंतर्गत गुरुवार को नवकार महामंत्र आराधना के प्रथम दिवस धर्मसभा का आयोजन हुआ। गच्छाधिपति आचार्य श्री नित्यसेनसूरीश्वरजी म.सा. ने नवकार महामंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि इसके 68 अक्षर अपने भीतर अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मशुद्धि एवं आत्मकल्याण का संदेश समेटे हुए हैं। उन्होंने नवकार महामंत्र के प्रथम शब्द ‘णमो’ के गूढ़ अर्थ को समझाते हुए कहा कि ‘णमो’ पूर्ण विनय, नमस्कार और अहंकार के त्याग का प्रतीक है।
आचार्यश्री ने कहा कि नवकार महामंत्र केवल मंत्रोच्चार नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, विनय और कर्मनिर्जरा की दिव्य साधना है। जब व्यक्ति के भीतर विनय और सरलता आती है, तभी वह नवकार की वास्तविक शक्ति का अनुभव कर सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नवकार के प्रत्येक अक्षर के भाव को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
अष्टापद तीर्थ की भावयात्रा ने कराया आत्मचिंतन
परम पूज्य विद्वतरत्न विजयजी म.सा. ने नवकार महामंत्र की भावयात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं को अष्टापद तीर्थ का आध्यात्मिक दर्शन कराया। उन्होंने भगवान आदिनाथ एवं अष्टापद तीर्थ की महिमा बताते हुए कहा कि भगवान आदिनाथ ने इसी पावन भूमि से मोक्ष प्राप्त किया था। भरत चक्रवर्ती द्वारा अष्टापद पर 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ स्थापित करवाने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिनालय, प्रतिमा एवं तीर्थ निर्माण में किया गया योगदान व्यक्ति के पुण्य को प्रबल करने वाला होता है।
उन्होंने भगवान महावीर एवं गौतम स्वामी से जुड़े अष्टापद यात्रा के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु की कृपा, प्रभु का आशीर्वाद और दृढ़ भावना हो तो असंभव प्रतीत होने वाला कार्य भी संभव हो सकता है।
आत्मा के वास्तविक शत्रुओं पर विजय का आह्वान
मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु बाहर नहीं, बल्कि उसके भीतर हैं। क्रोध, मान, माया, लोभ, राग, द्वेष और मत्सर आत्मा के वास्तविक शत्रु हैं। बाहरी शत्रुओं से दूरी बनाई जा सकती है, लेकिन आत्मा के भीतर बैठे विकारों पर विजय पाने के लिए नवकार महामंत्र की शरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नवकार की आराधना व्यक्ति को अपने भीतर के विकारों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करती है।
सात तीर्थों की भावयात्रा में धर्म और श्रद्धा का संदेश
धर्मसभा में नवकार महामंत्र की भावयात्रा के माध्यम से *1. नवकार तीर्थ*, *2. मोहनखेड़ा तीर्थ*, *3. अष्टापद तीर्थ भावयात्रा*, *4. रिंगनोद तीर्थ*, *5. हत्थुंडी तीर्थ*, *6. तालनपुर तीर्थ*, *7. नंदीवर्धनपुर / नांदियाजी तीर्थ सहित 7 तीर्थों की महिमा का स्मरण कराया गया। राजेश जैन युवा ने बताया कि रिंगनोद तीर्थ के संदर्भ में पुण्यसम्राट आचार्य भगवंत की चातुर्मासिक परंपरा एवं वहाँ की धार्मिक चेतना से जुड़े प्रसंग सुनाए गए। हत्थुंडी तीर्थ की प्राचीन धार्मिक परंपरा तथा तालनपुर तीर्थ से जुड़े ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक प्रसंगों का भी वर्णन किया गया।
विद्वतरत्न विजयजी ने मालवा की आध्यात्मिक समृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि “मालव माटी गहन गंभीर, डग-डग रोटी, पग-पग नीर” की यह पुण्यभूमि सदैव धर्म, सेवा और उदारता की भूमि रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मालवा की धरती अन्न और समृद्धि प्रदान करती है, उसी प्रकार नवकार महामंत्र आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिक संपदा प्रदान करता है।
तप आराधना में श्रद्धालुओं ने बढ़ाया आध्यात्मिक उत्साह
धर्मसभा में चोला में विराजित 54 तपस्वी भाई-बहनों की सिद्धि तप आराधना जारी रही। गुरुराज द्विशताब्दी वर्ष के अंतर्गत 36 भाई-बहनों ने पारणा आराधना की। वहीं विभिन्न तपस्वियों द्वारा दीर्घ तपश्चर्या जारी है, जिनमें 32 उपवास, 23 उपवास, 22 उपवास एवं 19 उपवास की आराधना करने वाले तपस्वियों का अभिनंदन किया गया।
आज दादा गुरुदेव एवं पुण्यसम्राट की आरती का लाभ सुनीलजी राजमलजी कापड़िया परिवार ने लिया। नवकार आराधना का लाभ हजारीमलजी एवं कांतिलालजी रांका की पावन स्मृति में रांका परिवार, इंदौर द्वारा लिया गया।
राकेश–प्रीति जैन बने सम्प्रति महाराजा एवं महारानी
नवकार महामंत्र आराधना के प्रथम दिवस राकेश एवं प्रीति जैन, पार्श्वनाथ साड़ी वालों ने *सम्प्रति महाराजा एवं महारानी* बनने का लाभ लिया। इस अवसर पर धार्मिक विधि-विधान के साथ आराधना में सहभागिता की गई।
धर्मसभा में भेरूलाल लुणावत, जयंतिलाल बागवाला, शांतिलाल रुणवाल, विपिन जैन सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। धर्मसभा का संचालन महेंद्र बागवाला ने किया तथा आभार धनराज संघवी ने व्यक्त किया। सूचनाएँ नीरज सुराणा ने दीं।
कल कुमारपाल महाराज के परिवार का भव्य प्रवेश
धर्मसभा में जानकारी दी गई कि शुक्रवार को कुमारपाल महाराज के परिवार का प्रातः 9 बजकर 9 मिनट और 9 सेकंड पर केशरी वाटिका से प्रवचन मंडप की ओर गाजे-बाजे के साथ भव्य प्रवेश होगा। इसके लाभार्थी सुरेशजी मदनलालजी अक्षयजी मेहता दसाईवाले रहेंगे ।
