शिक्षा मंत्री की पहल पर विद्यार्थियों को बड़ी राहत, अब शैक्षणिक दस्तावेजों के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर
Spread the loveरायपुर – विद्यार्थियों को शैक्षणिक दस्तावेजों...
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Spread the loveनिप्र,जावरा मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में...
Spread the loveरायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व...
निप्र,जावरा मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में हुई रविवार कि कार्यवाही में काश्तकार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार में खुद को ठगा महसूस किया जब काश्तकार को बिना नोटिश तलब किए रास्ता निकासी हेतु पॉकलेन से कार्य शुरू कर दिया गया । काश्तकार पवन हरा ने बताया कि 265/1, 265/2, 267 एवं 269 सर्वे नंबरों से संबंधित भूमि विवाद का प्रकरण राजस्व विभाग में लंबित हैं। 267 सर्वे नंबर से संबंधित प्रकरण तहसीलदार के समक्ष चल रहा है और उसका निराकरण प्रक्रिया में है। इसके बाद भी रविवार को तहसीलदार द्वारा मौके पर पहुंचकर भूमि की नपती की कार्रवाई किए जाने को लेकर संबंधित भूमि मालिकों ने आपत्ति जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भूमि की नपती से पूर्व न तो आसपास के भूमि मालिकों को विधिवत सूचना दी गई और न ही दूसरी ओर स्थित शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज को इसकी सूचना दी गई। इसके बावजूद मौके पर नपती कर पोल लगाकर रास्ता बनाने की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।इस कार्रवाई को लेकर संबंधित भूमि मालिकों एवं अन्य पक्षों में आपत्ति एवं असहमति बनी हुई है। उनका कहना है कि जब प्रकरण न्यायिक/राजस्व प्रक्रिया में चल रहा है और 267 सर्वे नंबर का निराकरण तहसीलदार स्तर पर होना है, तो अंतिम स्थिति स्पष्ट होने से पहले इस प्रकार रास्ता बनाए जाने की कार्रवाई क्यों की जा रही है। वहीं, मौके पर फैक्ट्री के आगे भी शासकीय भूमि मौजूद होने की बात कही जा रही है। लोगों का सवाल है कि यदि शासकीय भूमि से रास्ता निकाला जा रहा है तो रास्ते की पूरी स्थिति स्पष्ट की जाए।बताया जा रहा है कि वर्तमान कार्रवाई में तहसीलदार द्वारा केवल फैक्ट्री तक रास्ता दिए जाने की बात सामने आ रही है, जबकि उसके आगे रास्ता नहीं बनाया जा रहा है। इससे भी स्थानीय लोगों में सवाल खड़े हो रहे हैं कि रास्ते का निर्धारण किस आधार पर किया जा रहा है और पूरी भूमि एवं संबंधित सर्वे नंबरों की स्थिति को ध्यान में रखकर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। संबंधित लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि 265/1, 265/2, 267 एवं 269 सर्वे नंबरों से जुड़े पूरे मामले की राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही सभी संबंधित भूमि मालिकों एवं शासकीय संस्थाओं को सूचना देकर उनकी उपस्थिति में नपती एवं रास्ते की स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में सभी पक्षों की आपत्तियों और राजस्व रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए क्या निर्णय लेता है। मीडिया जानकारी के अनुसार सदस्य डीपी धाकड़ के नेतृत्व में थाने में धरना देकर पुलिस पर एकपक्षीय कार्रवाई के आरोप लगाए। तब प्रभावित किसान का कहना था असल रास्ता सिर्फ 8 फीट है, जो हमने छोड़ रखा व चालू है। हालांकि इतने कम रास्ते में फैक्टरी तक ट्रक जाना मुश्किल है। इसलिए फैक्टरी संचालक रोहित गंगवाल ने तहसील कोर्ट में रास्ता खुलवाने का आवेदन दिया। इस बीच पॉलिटेक्निक कॉलेज प्रबंधन ने भी 1 अक्टूबर को पत्र एसडीएम को लिखा। इसी क्षेत्र में 54 हजार वर्गफीट भूमि रिकॉर्ड में कम होने का आरोप लगाते हुए सीमांकन की मांग की। दरअसल रास्ते के एक तरफ किसान और दूसरी तरफ कॉलेज भूमि है। कॉलेज प्रबंधन ने रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका जाहिर कर शिकायत की। इस बीच रविवार को प्रशासनिक अमला वहां रास्ता दिलवाने पहुंचा तो मामला गरमाया और मौके पर भीड़ जुटी गई। वहीं काश्तकार पवन धाकड़ ने कहा कि प्रशासन सिर्फ फैक्टरी तक चौड़ा रास्ता दे रहा। पीछे किसानों के : खेत हैं। यदि रास्ता इतना चौड़ा है तो पीछे तक दें। सिर्फ फैक्टरी तक क्यों। कॉलेज प्राचार्य इंदल सिंह का कहना है कि उक्त भूमि शुरू से कॉलेज के कब्जे में है। रिकॉर्ड में भी हमारी है। हाल ही में रिकॉर्ड में रकबा कम हुआ। इसकी शिकायत की। इधर तहसीलदार ने छुट्टी के दिन पॉकलेन चलवाकर वहां रास्ता बनवा दिया जो गलत है।कॉलेज प्राचार्य सिंह और जिपं सदस्य धाकड़ ने एसडीएम से शिकायत की है। कॉलेज प्रबंधन दस्तावेज पेश करे, हम जांच करेंगे।तहसीलदार रिकॉर्ड में सरकारी सर्वे नंबर 266 रास्ता ही दर्ज है। पुराने रास्ते को लेकर फैक्टरी संचालक व काश्तकार में विवाद था। एफआईआर भी हुई। संवेदनशील मामला होने से रविवार को कार्रवाई की। तहसील कोर्ट में आवेदन लगा व रिकॉर्ड दिखवाया तो रास्ता दर्ज निकला। सीमांकन करवाया और सीमा चिह्न के साथ फील्ड बुक तैयार की। फिर नियम से रास्ता खुलवाया। कॉलेज प्रबंधन दस्तावेज पेश करें, जांच करेंगे। सीमांकन कर जो वास्तविक भूमि रिकॉर्ड में है, दिलवाएंगे। पंकज पवैया द्वारा मीडिया को बताया गया।
