*इंदौर।* सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर चोट लगने के बाद कई बार मरीज की जान बचा लेना ही बड़ी चुनौती होती है। लेकिन कुछ मामलों में सामान्य सांस और आवाज वापस दिलाना उससे भी मुश्किल होता है। ऐसा ही एक मामला केयर सीएचएल हॉस्पिटल में सामने आया, जहां सड़क हादसे में श्वासनली (ट्रेकिया/विंड पाइप) गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने वाले 20 वर्षीय युवक की जटिल सर्जरी कर उसकी सांस और आवाज दोनों को सुरक्षित बचाया गया। पोस्ट-ट्रॉमैटिक ट्रेकियल स्टेनोसिस (चोट के बाद श्वासनली का संकरा होना) का यह इंदौर में अपनी तरह का पहला सफल ऑपरेशन माना जा रहा है।
दुर्घटना के बाद युवक का प्रारंभिक उपचार एक स्थानीय अस्पताल में किया गया था। सांस लेने में गंभीर तकलीफ बढ़ने पर उसे केयर सीएचएल हॉस्पिटल लाया गया, जहां आईसीयू में भर्ती कर उसकी जान बचाने के लिए तत्काल ट्रेकियोस्टॉमी की गई। उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कुछ सप्ताह बाद घायल हिस्से में श्वासनली गंभीर रूप से संकरी हो गई, जिससे उसे दोबारा सांस लेने में परेशानी होने लगी। विस्तृत जांच के बाद विशेषज्ञों ने ऑपरेशन का निर्णय लिया।
वरिष्ठ सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रितेश तपकिरे के नेतृत्व में हुई इस जटिल सर्जरी के दौरान लगभग चार सेंटीमीटर संकरी हो चुकी श्वासनली का हिस्सा निकालकर दोनों स्वस्थ सिरों को एंड-टू-एंड ट्रेकियल एनास्टोमोसिस तकनीक से जोड़ा गया। ऑपरेशन के तुरंत बाद मरीज सामान्य रूप से सांस लेने लगा और उसकी आवाज भी सुरक्षित रही। इस जटिल उपचार में डॉ. निखिलेश पसारी (चेस्ट फिजिशियन), डॉ. निखिलेश जैन (इंटेंसिविस्ट), डॉ. अपूर्व (हेड एंड नेक सर्जन), डॉ. रवि मसंद (सीनियर रेडियोलॉजिस्ट), डॉ. मीनू चड्ढा, डॉ. अमित चौरसिया, डॉ. सुप्रिया अग्रवाल सहित इमरजेंसी, एनेस्थीसिया, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और नर्सिंग टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
*डॉ. रितेश तपकिरे ने कहा,* “ट्रेकियल रिसेक्शन एवं रिकंस्ट्रक्शन अत्यंत जटिल सर्जरी है, जिसे सामान्यतः चुनिंदा मामलों में ही किया जाता है। दुर्घटना के बाद श्वासनली को हुई क्षति में यह ऑपरेशन और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। पूर्व की चोट और ट्रेकियोस्टॉमी से बने फाइब्रोसिस के बीच सर्जरी करते समय आवाज नियंत्रित करने वाली रिकरेंट लेरिंजियल नर्व और श्वासनली की रक्त आपूर्ति को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। समय पर उपचार, सटीक सर्जिकल तकनीक और पूरी टीम के समर्पित प्रयासों से न केवल मरीज की जान बचाई जा सकी, बल्कि उसकी सामान्य सांस और आवाज भी सुरक्षित रखी जा सकी। वर्तमान में मरीज स्वस्थ है और तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।”