नई दिल्ली,। सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का संसद मार्च दिल्ली पुलिस की घेराबंदी को तोड़कर संसद भवन के पास तक पहुंच गया। यह कई वर्षों बाद हुआ है कि कोई प्रदर्शन संसद मार्ग थाने से आगे बढ़कर रेल और कृषि भवन के गोलंबर तक पहुंचा हो, जिससे सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं। संसद के गेट तुरंत बंद किए गए और अंदर-बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे, इससे इलाके में अफरातफरी मच गई। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार खुद संसद मार्ग थाने से हालात पर नजर रख रहे थे।
यह मार्च नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में शुरू हुआ था। आंदोलन के 23वें दिन, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के संदेश पर अपना 3 दिन पुराना अनशन तोड़ दिया। वांगचुक ने सरकार के समक्ष कुछ शर्तें रखी हैं, हालांकि प्रधान का इस्तीफा फिलहाल उसमें शामिल नहीं है।
स्थिति को शांत करने के लिए केंद्रीय सरकार ने सीजेपी को बातचीत के लिए बुलाया। पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। करीब दो घंटे इंतजार के बाद हुई 10 मिनट की बातचीत में नड्डा ने मांगों का लिखित पत्र मांगा और उन पर सरकार के भीतर चर्चा का आश्वासन दिया। दास ने बताया कि वे मांग पत्र बनाने की प्रक्रिया में हैं। इस बीच, दास ने बाद में ट्वीट कर दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को जंतर-मंतर से उठा लिया है।
सोमवार से ही संसद का मानसून सत्र भी शुरू हुआ। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज का मुद्दा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में उठाया, जिसके बाद सदन को मंगलवार तक के लिए स्थगित किया गया। लोकसभा भी शाम 3 बजे तक के लिए स्थगित हुई। समाजवादी पार्टी के सांसद डिंपल यादव के नेतृत्व में जंतर-मंतर पहुंचे।