Aaj ka Rashifal 05 November 2026: मेष से मीन तक कैसा रहेगा सभी 12 राशियों का दिन? पढ़ें 12 राशियों का दैनिक राशिफल
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नई दिल्ली,। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना हमेशा अश्लीलता के दायरे में नहीं आता है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि कोई शब्द तभी अश्लील माना जाएगा, जब वह कामुकता को बढ़ावा देने वाला हो या लोगों को भ्रष्ट करने की प्रवृत्ति रखता हो। कोर्ट ने यह टिप्पणी तमिलनाडु के एक मामले में सुनवाई करते हुए की। आरोपी मणि को जमीन विवाद के दौरान मां की गाली देने के लिए अश्लीलता के आरोप में दोषी ठहराया गया था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2017 में जमीन विवाद को लेकर आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ गाली-गलौज की थी। पीड़ित का आरोप था कि आरोपी ने जातिसूचक शब्द भी कहे। बाद में घर से हथियार लाकर हमला कर दिया, जिससे उसकी नाक की हड्डी टूट गई। सुप्रीम कोर्ट ने अश्लीलता और आपराधिक धमकी के आरोपों से आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गाली देने से किसी को परेशानी हुई, यह साबित नहीं हुआ। हालांकि, शिकायतकर्ता को गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में उसकी सजा बरकरार रखी है। आरोपी की उम्र करीब 70 साल होने और स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने उसकी सजा को घटाकर कोर्ट उठने तक की सजा दी। साथ ही, उसे 2 महीने के अंदर 50,000 रुपए का जुर्माना भरने का निर्देश दिया है।
