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अंकारा,। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की के अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन से वापसी के दौरान अपने विमान को बीच रास्ते में ही बदल लिया। उन्होंने कतर द्वारा उपहार में मिले नए बोइंग 747-8 जेट को छोड़कर अपने पुराने एयरफोर्स वन से उड़ान भरी। ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल में एक संक्षिप्त ठहराव के बाद विमान बदलने के इस फैसले ने राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए सैन्य संघर्ष के बाद, यूएस सीक्रेट सर्विस ने राष्ट्रपति ट्रंप को विमान बदलने की सलाह दी थी। अधिकारियों ने बताया कि यह कदम किसी विशेष खतरे की प्रतिक्रिया के बजाय, एहतियात के तौर पर उठाया गया था, क्योंकि कतर से मिले नए विमान में अभी तक वे सभी उन्नत सुरक्षा सुविधाएँ स्थापित नहीं की गई थीं जो मौजूदा एयरफोर्स वन बेड़े में मौजूद हैं।
हालांकि, व्हाइट हाउस ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज किया कि नया विमान असुरक्षित है। व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने स्पष्ट किया कि नया जेट उच्च-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल से लैस है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए ध्यान भटकाने और गुमराह करने समेत अपने हर उपलब्ध उपकरण का इस्तेमाल करता है। खुद ट्रंप ने भी विमान बदलने के पीछे सुरक्षा चिंताओं की बात को खारिज कर दिया। ब्रिटेन से रवाना होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, मुझ पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। मैं उनकी लिस्ट में नंबर वन हूं। ट्रंप ने बताया कि ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल में रुकने का असली मकसद वहां तैनात अमेरिकी सैन्यकर्मियों को नया विमान दिखाना था। उन्होंने नए विमान को बिल्कुल नया और शानदार बताते हुए सैन्यकर्मियों के साथ इसकी तस्वीरें भी साझा कीं और कहा कि वे लोग इसे देखकर काफी उत्साहित थे। पुरानी एयरफोर्स वन से सफर करने के पीछे ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करने के लिए ऐसा किया है। इस यात्रा के दौरान, पुरानी एयरफोर्स वन में सफर कर रहे पत्रकारों को फ्लाइट में खिड़कियों के ब्लाइंड्स (पर्दे) बंद रखने का सख्त निर्देश दिया गया था। ट्रंप ने बताया कि यह पाबंदी उनके निजी कंपार्टमेंट पर लागू नहीं थी। उन्होंने ईरान की ओर स्पष्ट रूप से इशारा करते हुए कहा कि शायद ऐसा यहां मौजूद स्लीजबैग्स की वजह से किया गया हो। विमान बदलने का यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष तेज हो गया है। अमेरिका ने तेहरान पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए ईरानी ठिकानों पर नए सिरे से हवाई हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर है और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा हो गई हैं।
