कनासिया । “जाते-जाते भी जो दूसरों की दुनिया रोशन कर जाए, वही सच्चा जीवन है।” मानव सेवा और परोपकार की इसी भावना को साकार करते हुए सरजू बाई पलसावदिया (पत्नी डॉ. रामचरण पलसावदिया) ने मरणोपरांत नेत्रदान कर समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
राधा स्वामी सत्संग व्यास के पूजनीय महाराज के इस संदेश— “अगर हम किसी के काम आ सकें, तो हमें अवश्य काम आना चाहिए, क्योंकि मृत्यु के बाद यह देह मिट्टी या अग्नि के सुपुर्द हो जाती है”—से प्रेरित होकर सरजू बाई पलसावदिया एवं उनके पति डॉ. रामचरण पलसावदिया ने 27 फरवरी 2026 को नेत्रदान का संकल्प लिया था। दोनों ने अमलतास हॉस्पिटल, देवास में आवश्यक दस्तावेज जमा कर अपनी इच्छा औपचारिक रूप से दर्ज कराई थी।
ब्रह्मलीन होने के बाद शोक की इस घड़ी में भी उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए ज्येष्ठ पुत्र ओमप्रकाश पलसावदिया सहित समूचे परिवार ने तत्परता दिखाते हुए चिकित्सकों की टीम को बुलाकर ससम्मान नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई।
इस पुनीत कार्य के समन्वय में डॉ. मोहम्मद बकास खान, आई बैंक इंचार्ज मोहम्मद रिहान तथा आई बैंक अध्यक्ष मयंक भदौरिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके सहयोग से समय रहते नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की जा सकी।
पलसावदिया परिवार के इस साहसिक और प्रेरणादायी निर्णय की क्षेत्रवासियों ने सराहना करते हुए सरजू बाई पलसावदिया को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। लोगों का कहना है कि मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में उजाला भरने का यह संदेश समाज के लिए अनुकरणीय है तथा नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला है।