CG : दंतैल हाथी की दस्तक: 10 किमी दायरे के गांवों में हाई अलर्ट; वन विभाग ने जारी की एडवाइजरी
Spread the loveधमतरी।जिले के केरेगांव वन परिक्षेत्र के...
Spread the loveधमतरी।जिले के केरेगांव वन परिक्षेत्र के...
Spread the love‘छत्तीसगढ़ में इवेंट मैनेजमेंट और पर्यटन...
Spread the loveडीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन में...
पडाना (राजगढ़)। माधव एक्सप्रेस,भीषण गर्मी के इस दौर में क्षेत्र के मगराना, रामपुरिया, साधनखेड़ी और पडाना सहित आसपास के गांवों के लोग गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। एक तरफ जहां गांवों के प्राकृतिक जल स्रोत दम तोड़ चुके हैं और हैंडपंपों का जलस्तर पाताल में चला गया है, वहीं दूसरी तरफ करोड़ों की सरकारी योजनाएं विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी हैं। ‘जल जीवन मिशन’ के तहत ग्रामीणों को घर-घर पानी पहुंचाने का दावा पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है।
एक साल से शोपीस बनी है 2.60 लाख लीटर की टंकी
कुंडालिया डैम नल-जल योजना के तहत करीब एक साल पहले साधनखेड़ी गांव के समीप रेशम केंद्र परिसर में 2 लाख 60 हजार लीटर क्षमता की एक विशाल पानी की टंकी का निर्माण किया गया था। इस टंकी पर बकायदा रंग-रोगन कर इसे चमका तो दिया गया, लेकिन इसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल सका। इस टंकी से साधनखेड़ी, मगराना और रामपुरिया सहित अन्य गांवों में पानी की सप्लाई होनी थी। निर्माण एजेंसी एलएनटी (L&T) कंपनी द्वारा पाइपलाइन बिछाने और घरेलू कनेक्शन का काम अधूरा छोड़ दिए जाने के कारण यह पूरी योजना सिर्फ एक ‘शोपीस’ बनकर रह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2021 में ही पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू हुआ था, लेकिन 6 साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी आज तक नलों में पानी की एक बूंद नहीं टपकी है।
मगराना: 4 हजार की आबादी 3 किमी दूर से पानी लाने को मजबूर
लगभग 4 हजार की आबादी वाले मगराना गांव की स्थिति सबसे बदतर है। गांव के 11 हैंडपंपों में से आधे से अधिक पूरी तरह सूख चुके हैं। जो दो-तीन हैंडपंप चालू हैं, वे भी रुक-रुक कर थोड़ा-बहुत पानी उगलते हैं। पानी के लिए लोग दो से तीन किलोमीटर दूर भटकने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत ने केसरीनंदन कॉलोनी के पास एक ट्यूबवेल में मोटर डालकर अस्थाई व्यवस्था तो की है, लेकिन वहां दिनभर पानी भरने वालों की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में जैसे ही बिजली गुल होती है, ग्रामीणों का संकट और गहरा जाता है।
रामपुरिया और साधनखेड़ी का भी यही हाल
कमोबेश यही स्थिति रामपुरिया गांव की भी है, जहां सात हैंडपंपों में से अधिकांश ने पानी देना बंद कर दिया है। यहां के निवासियों को पानी के इंतजाम के लिए पास के जंगली इलाकों की खाक छाननी पड़ रही है। वहीं, साधनखेड़ी में भी घरों के सामने नल के कनेक्शन तो दिखते हैं, लेकिन उनमें पानी गायब है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी यह महत्वाकांक्षी योजना सिर्फ कागजों और सूखी टंकियों तक ही सीमित है। स्थानीय सरपंच महेश गुर्जर सहित तमाम ग्रामीण कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जलापूर्ति शुरू करने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा।
जिम्मेदारों का पक्ष:
“जिन गांवों में जल संकट की स्थिति है और जहां भी कार्य अधूरे पड़े हैं, वहां तत्काल अधिकारियों की टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। जल्द से जल्द पाइपलाइन दुरुस्त कर जलापूर्ति शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं।”
— यू.के. चौधरी, महाप्रबंधक (जल निगम)
“अधूरी पाइपलाइन को जोड़ने और बाकी बचे नल कनेक्शनों का कार्य तेजी से पूरा कराया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को इस भीषण गर्मी में जल संकट से निजात मिल सके।”
— देवेंद्र टेमरे, सहायक प्रबंधक (एलएनटी कंपनी)
