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ग्रीन ग्रोथ और जलवायु-लचीले शहरी विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित
इंदौर, मध्य प्रदेश: भारतीय उद्योग परिसंघ – इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (CII IGBC) ने 25 अप्रैल 2026 को इंदौर में मध्य प्रदेश सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव का सफलतापूर्वक आयोजन किया। मैरियट होटल में आयोजित इस कॉन्क्लेव का विषय था “ड्राइविंग ग्रीन ग्रोथ, क्लाइमेट रेजिलिएंस एवं जिम्मेदार शहरी विकास”। इस आयोजन में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, शहरी योजनाकारों और सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों ने भाग लेकर राज्य में ग्रीन बिल्डिंग अपनाने और सतत शहरीकरण को तेज करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
मध्य प्रदेश सतत विकास के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है, जहाँ 510 मिलियन वर्ग फुट से अधिक का ग्रीन बिल्डिंग क्षेत्र और 549 से अधिक आईजीबीसी-पंजीकृत परियोजनाएँ हैं, जो वाणिज्यिक, आवासीय, औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स और ट्रांजिट इंफ्रास्ट्रक्चर सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई हैं। इस कॉन्क्लेव ने प्रगतिशील नीतिगत ढांचे, उभरती प्रौद्योगिकियों और सहयोगात्मक दृष्टिकोणों पर चर्चा के लिए एक रणनीतिक मंच प्रदान किया, जिसका उद्देश्य संसाधन दक्षता को बढ़ाना और निर्मित वातावरण में जलवायु लचीलापन को मजबूत करना है।
उद्घाटन सत्र में श्री संजय दुबे (आईएएस), अतिरिक्त मुख्य सचिव, शहरी विकास एवं आवास विभाग, मध्य प्रदेश शासन; डॉ. पारिक्षित जाड़े (आईएएस), मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इंदौर विकास निगम; श्री संदीप श्रीवास्तव, अध्यक्ष, क्रेडाई इंदौर; श्री सी. शेखर रेड्डी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईजीबीसी; श्री सौरभ सिंह मेहता, उपाध्यक्ष, सीआईआई मध्य प्रदेश राज्य परिषद एवं कार्यकारी निदेशक, कृति न्यूट्रिएंट्स लिमिटेड; आर्किटेक्ट जितेंद्र मेहता, राष्ट्रीय कार्यकारी बोर्ड सदस्य, आईजीबीसी; श्री विनोद बापना, अध्यक्ष, आईजीबीसी इंदौर चैप्टर एवं प्रबंध निदेशक, बोंटन फर्नीचर प्रा. लि.; श्री कुशाग्र अग्रवाल, सह-अध्यक्ष, आईजीबीसी इंदौर चैप्टर एवं निदेशक, अपोलो क्रिएशन प्रा. लि., तथा उद्योग और शिक्षाविदों के अन्य विशिष्ट गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
अपने मुख्य भाषण में श्री संजय दुबे (आईएएस) ने सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकीकृत शासन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश तकनीकी नवाचार के साथ नीतिगत ढाँचों को समन्वित कर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा,
“मध्य प्रदेश शहरी विकास के केंद्र में सततता को स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। तकनीकी नवाचार के साथ नीतियों के समन्वय के माध्यम से हम जलवायु लचीलापन को तेज करना चाहते हैं और सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारे शहर स्मार्ट और कुशल होने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और समावेशी भी हों। राज्य आईजीबीसी सिल्वर और गोल्ड रेटेड परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहन पर विचार कर रहा है तथा रियायतों और छूट से जुड़े सुझावों का परीक्षण किया जा रहा है। भवन उपविधियों में संशोधन की प्रक्रिया भी जारी है ताकि ग्रीन निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके, साथ ही शहरी हरित क्षेत्रों के विस्तार और टिकाऊ निर्माण सामग्री के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।”
कॉन्क्लेव में सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट सिटी, ऊर्जा दक्षता और सतत आवास जैसे विषयों पर गहन चर्चा की। चर्चाओं में भारत की व्यापक सततता और नेट-जीरो प्रतिबद्धताओं के अनुरूप शहरी नियोजन में पर्यावरणीय पहलुओं को शामिल करने के महत्व पर जोर दिया गया।
डॉ. पारिक्षित जाड़े (आईएएस), मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इंदौर विकास निगम, ने इंदौर के प्रगतिशील शहरी विकास मॉडल पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा,
“इंदौर नीतिगत हस्तक्षेपों, नियामक प्रोत्साहनों और जमीनी स्तर की पहलों के माध्यम से एक जलवायु-लचीले और कार्बन-न्यूट्रल शहर की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आईजीबीसी-रेटेड ग्रीन बिल्डिंग्स के लिए अतिरिक्त एफएआर, मास्टर प्लान 2035 में ग्रीन अनुपालन, 60 मेगावाट जलूद सोलर प्लांट में निवेश, तथा पीपीपी आधारित ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग जैसे सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल—ये सभी पहलें सतत विकास को गति दे रही हैं। हरित क्षेत्र के विस्तार, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन बॉन्ड जैसे नवाचार वित्तीय साधनों के माध्यम से हम एक स्वस्थ और टिकाऊ शहरी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सरकार, उद्योग और नागरिकों के बीच निरंतर सहयोग इस परिवर्तन को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगा।”
अपने विशेष संबोधन में श्री सी. शेखर रेड्डी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईजीबीसी, ने भविष्य के शहरों के निर्माण में ग्रीन बिल्डिंग्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा,
“इंदौर, जो स्वच्छता और नवाचार के लिए जाना जाता है, स्वच्छ सर्वेक्षण में अपने प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन और बायो-सीएनजी जैसी पहलों के माध्यम से नए मानक स्थापित कर रहा है। एक अग्रणी स्मार्ट सिटी के रूप में यह दर्शाता है कि मजबूत प्रशासन और नागरिक सहभागिता जलवायु-लचीले विकास को कैसे आगे बढ़ा सकती है। यह कॉन्क्लेव नीति, नवाचार और उद्योग को एक साथ लाकर सतत विकास को गति देने का मंच है। मध्य प्रदेश ग्रीन बिल्डिंग्स के क्षेत्र में अग्रणी बन चुका है और आईजीबीसी इस गति को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
श्री विनोद बापना, अध्यक्ष, आईजीबीसी इंदौर चैप्टर, ने कहा कि इंदौर की सफलता मजबूत प्रशासन और जनभागीदारी का परिणाम है। वहीं, श्री कुशाग्र अग्रवाल, सह-अध्यक्ष, आईजीबीसी इंदौर चैप्टर, ने सतत विकास के लिए सभी हितधारकों के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
कॉन्क्लेव में “क्लाइमेट-रेजिलिएंट अर्बन ग्रोथ एंड हाई-परफॉर्मेंस बिल्ट एनवायरनमेंट” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें शहरी नियोजन में जलवायु लचीलापन शामिल करने की रणनीतियों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने संसाधन-कुशल प्रणालियों, टिकाऊ निर्माण सामग्री और दीर्घकालिक योजना के महत्व को रेखांकित किया।
“एमपी के बिल्ट एनवायरनमेंट के लिए इनोवेटिव एवं सस्टेनेबल सॉल्यूशंस” विषय पर तकनीकी सत्र में ऊर्जा दक्ष तकनीकों, स्मार्ट बिल्डिंग समाधानों और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने वाली सामग्रियों पर चर्चा की गई।
कॉन्क्लेव का समापन सभी हितधारकों से सामूहिक रूप से कार्य करने की अपील के साथ हुआ। इस आयोजन ने राज्य में जलवायु लचीलापन, ग्रीन ग्रोथ और जिम्मेदार शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए आईजीबीसी की प्रतिबद्धता को दोहराया।
