इंदौर:पार्श्वनाथ नगर स्थित आदिनाथ जिनालय में आचार्य भगवंत डॉ. मुक्तिसागरजी, आचार्य अचलमुक्तिसागरजी, वरिष्ठ साध्वी दमिता श्रीजी और अनेक साधु-साध्वियों की निश्रा में तथा इन्दौर स्थित विभिन्न मंदिरों के ट्रस्ट मंडल के सदस्यों तथा बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं की उपस्थिति में ओम पुण्याहाम-पुण्याहाम, प्रियंताम-प्रियंताम” के उद्घोष के मध्य रजत जयंती ध्वजारोहण संपन्न हुआ।
सुबह सत्तरभेदी पूजन के साथ कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। पूजा की नौवीं पूजन में ध्वजा का प्रसंग आता है जिसका लाभ मनसुखलाल पोरवाल परिवार ने लिया। हमारे प्रतिनिधि प्रोफेसर सतीश चोपड़ा को ध्वजा का महत्त्व बताते हुए आचार्य डॉ. मुक्तिसागरजी ने कहा कि मंदिर पर चढ़ाई जाने वाली ध्वजा का बहुत महत्त्व होता है। मंदिर से ऊपर मंदिर का शिखर होता है, शिखर से भी ऊपर ध्वजा दण्ड रहता है और उससे भी ऊपर ध्वजा फहराती है जो यह संदेश देती है कि हमें अपना जीवन उन्नत बनाना है। जो परिवार ध्वजा फहराता है वह आगे की ओर बढ़ता चला जाता है। ध्वजा चढ़ाने वाले परिवार की 101 पीढ़ियां तर जाती हैं—50 पीछे की, 50 आगे की और एक स्वयं उसकी।
इस अवसर पर एक मंदिर जी में सिद्धाचलजी एवं शत्रुंजय पट की स्थापना भी की गई। संघ के ट्रस्टी मनोज रांका,हंसमुख पोरवाल और डॉ. एन.के. जैन ने बताया कि आज से 25 वर्ष पूर्व पार्श्वनाथ नगर की धरा पर शिखरबद्ध देरासर की स्थापना हुई थी, तभी से लेकर आज तक ध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है जिसके परिणामस्वरूप यह छोटा सा संघ निरन्तर प्रगति की ओर अग्रसर हो रहा है।
ध्वजारोहण के पश्चात् विशाल जन सभा को संबोधित करते हुए आचार्य मुक्ति सागर जी ने कहा कि जैन धर्म में कई अनुष्ठान होते हैं जैसे – उपधान, उपधान की माल, तपस्या करने वाले तपस्वी का वर घोड़ा, नववाणु यात्रा, जिनालय के दर्शन आदि , किसी कारणवश हम इन कार्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा सकते हैं तो ध्वजा और दीक्षा ऐसे अनुष्ठान हैं जिनमें अवश्य अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहिए क्योंकि इससे कर्मों की निर्जरा होती है।आचार्य श्री जी ने आगे कहा कि यह मानव शरीर नश्वर है, यह हमारा साथ कब छोड़ देगा पता ही नहीं चलेगा इसलिए श्रेष्ठ कार्य करते हुए अपने जीवन का उद्धार करने का प्रयास करते रहना चाहिए ।
ध्वजारोहण महोत्सव के विभिन्न आयोजनों में अपनी संपत्ति का सदुपयोग करने वाले दानदाताओं और ट्रस्ट मंडल के सदस्यों का पाँच दिवसीय श्रेष्ठ आयोजन के लिए बहुमान किया गया। आज के इस कार्यक्रम में डा.जयंतीलाल भंडारी , लाभचंद सुराणा, संतोष मामा ,सुजानमल चोपड़ा, अभय कटारिया , संजय नाहर , सतीश जैन ( नवकार परिवार ),राजेश भंडारी ,नरीमन सिटी, पीपली बाजार, गुमाश्ता नगर, द्वारकापुरी सहित अनेक मंदिरों के ट्रस्टी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रवीण गुरुजी ने किया और आभार पीयूष नांदेचा और अरविन्द चोरड़िया ने ज्ञापित किया ।