*लेखक: श्री संजय अग्रवाल*
*अध्यक्ष, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन, मध्य प्रदेश*
*दिनांक: 13 मार्च, 2026*
*धरती थरथराई! आकाश गूंज उठा!*
8 मार्च, 2026 – अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम! भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से कुचल डाला! टी20 विश्व कप हमारा! तीसरी बार! इतिहास रच दिया! सूर्यकुमार यादव की तलवार-सी बल्लेबाजी, गौतम गंभीर की रणनीतिक आग, जय शाह की दूरदृष्टि – 1.4 अरब भारतीयों का लहू उबल पड़ा! गर्व से सीना फटने लगा!
फाइनल खत्म होते ही क्या हुआ? कप्तान सूर्यकुमार, कोच गंभीर और आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने ट्रॉफी को कंधे पर सवार किया और सीधे पास के हनुमान मंदिर पहुंचे! ट्रॉफी को भगवान हनुमान के चरणों में रखा! आरती की लपटें उठीं! घंटियां बजीं! आशीर्वाद बरसा! यह कोई साधारण दर्शन नहीं था – यह सनातन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा की *महागर्जना* थी! विजय का फल ईश्वर को अर्पित करना! कृतज्ञता की ज्वाला!
*लेकिन तभी… आंधी-तूफान उठ खड़ा हुआ!*
कीर्ति आजाद – 1983 का विश्व कप विजेता, अब तृणमूल कांग्रेस का सांसद – ने X पर आग लगा दी! “शर्मनाक!” उन्होंने गरज कर कहा! “ट्रॉफी किसी एक धर्म की नहीं – 1.4 अरब भारतीयों की है! सिराज ने मस्जिद नहीं ले जाया, तो मंदिर क्यों? यह एक धर्म का विजय-लैप है! शर्म आनी चाहिए टीम इंडिया को!”
*यह बयान नहीं – यह खुला युद्ध है!*
सनातन धर्म पर सीधा हमला! भारत की आत्मा पर प्रहार! राम ने लंका जीतकर पूजा की थी – क्या तब कोई कीर्ति आजाद चिल्लाया था? पांडवों ने महाभारत के बाद यज्ञ किए – क्या तब सेकुलरिज्म का ढोंग हुआ था? कपिल देव ने 1983 में भी मंदिर दर्शन किए थे – तब क्यों चुप थे ये लोग?
आज जब हिंदू जाग रहा है, अपनी जड़ों से जुड़ रहा है, अपनी आस्था को गर्व से जी रहा है – तब ये लोग ट्रॉफी को “एक धर्म का प्रचार” कहकर अपमानित करते हैं! क्या यह सेकुलरिज्म है? नहीं! यह *हिंदू-विरोधी जहर* है! वोट बैंक की भूख! राजनीतिक साजिश!
*क्रिकेट जगत की आग बुझ नहीं रही!*
गौतम गंभीर ने सीधे मुंह पर थप्पड़ मारा – “खिलाड़ियों को अपमानित मत करो! जीत को धर्म से मत जोड़ो! यह degrading है!” ईशान किशन ने पत्रकारों को लताड़ा – “बेकार सवाल! हमने विश्व कप जीता है – उस पर बात करो, न कि ऐसे लोगों पर!” हरभजन सिंह ने ठप्पा लगाया – “बेतुका! आस्था व्यक्तिगत है – राजनीति मत घोलो!”
सोशल मीडिया पर तूफान! लाखों हिंदू एकजुट! ट्रोल्स ने आजाद को “वोट बैंक का ठेकेदार” कहा! लेकिन आजाद नहीं झुके – उन्होंने बचाव में कहा, “खिलाड़ियों का अपमान नहीं होना चाहिए… सभी धर्मों का सम्मान!”
सम्मान? हम तो करते हैं! अगर कोई मुस्लिम खिलाड़ी ट्रॉफी मस्जिद ले जाता – क्या कोई हिंदू संगठन विरोध करता? बिल्कुल नहीं! हमारी संस्कृति सहिष्णु है, उदार है, महान है! लेकिन जब हिंदू अपनी भक्ति दिखाता है, तो “शर्मनाक” क्यों? यह दोहरा मापदंड क्यों? यह *हिंदूफोबिया* नहीं तो क्या है?
*वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन की रण-घोषणा!*
हम, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन, मध्य प्रदेश, इस घृणित हमले की कड़ी निंदा करते हैं! ट्रॉफी को मंदिर ले जाना कोई अपराध नहीं – यह हमारी *प्राचीन गौरव-परंपरा* है! यह भक्ति है! यह शक्ति है! यह सनातन की अमर ज्योति है!
कीर्ति आजाद जैसे लोग राजनीति के लिए धर्म को हथियार बनाते हैं, देश को बांटने की कोशिश करते हैं! लेकिन वे भूल जाते हैं – *भारत अब जाग चुका है!* हिंदू अब चुप नहीं रहेगा! हम अपनी आस्था की रक्षा करेंगे – और अन्य सभी का भी सम्मान करेंगे!
(लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं , इनसे माधव एक्सप्रेस प्रबंधन एवं संपादक की सहमति आवश्यक नहीं है)
