ग्राम बरोदापंथ, देपालपुर, जिला इंदौर: ग्राम बरोदापंथ, देपालपुर क्षेत्र में एक –भूमि विवाद का मामला सामने आया है, जिसमें ग्राम देपालपुर निवासी बुजुर्ग किसान कनीराम डोंड पिछले कई महीनो से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कनीराम डोंड का कहना है कि वह लगभग 50 वर्षों से स्वर्गीय कैलाशचंद्र महाजन के साथ रहकर उनकी सेवा, देखभाल और सहयोग करते रहे और उसी भूमि की देखरेख करते आए हैं।
कनीराम डोंड के अनुसार स्वर्गीय कैलाशचंद्र महाजन के जीवन के अंतिम वर्षों में उनके साथ कोई पारिवारिक सदस्य नहीं था और वे पूरी तरह से कनीराम डोंड पर ही निर्भर थे। लंबे समय तक उनकी सेवा और देखभाल करने के कारण स्वर्गीय कैलाशचंद्र महाजन ने अपने अंतिम दिनों में, लगभग 1980 के दशक के उत्तरार्ध में, उक्त संपत्ति कनीराम डोंड को देने की इच्छा व्यक्त की थी। तब से कनीराम डोंड उस भूमि की देखभाल करते हुए वहीं रह रहे हैं।
कनीराम डोंड के अनुसार सन २०२५ में उक्त भूमि के नामांतरण (नमांतरण) को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। उनका कहना है कि एक महिला, रचना कनाडिया उर्फ रचना भगोरे, द्वारा स्वयं को संबंधित बताते हुए राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रक्रिया के दौरान आधार कार्ड, पैन कार्ड, मृत्यु प्रमाणपत्र तथा अन्य दस्तावेज़ प्रस्तुत किए गए, जिनकी सत्यता को लेकर कनीराम डोंड ने आपत्ति दर्ज कराई है।
*कनीराम डोंड का यह भी कहना है कि पहले पटवारी करण मिश्रा ने कनीराम से पैसों की मांग की और पैसे नहीं देने पर पूरे नामांतरण को उलझा कर रख दिया इस पूरे प्रकरण में उस समय क्षेत्र के पटवारी रहे करन मिश्रा की भूमिका को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। कनीराम डोंड के अनुसार नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान कई दस्तावेज़ तैयार किए गए और राजस्व रिपोर्ट बनाई गई, जिनकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। उनका आरोप है कि यदि इन दस्तावेज़ों और राजस्व रिकॉर्ड की गहराई से जांच की जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। उन्होंने यह भी मांग की है कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए।*
कनीराम डोंड का यह भी आरोप है कि इस विवाद के दौरान रचना कनाडिया, प्रसन्ना चंदक तथा कुछ स्थानीय लोगों द्वारा उन्हें डराने-धमकाने और मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि वह अपनी जमीन और आजीविका के स्थान को छोड़कर कहीं और चले जाएँ। कनीराम का कहना है कि वह पिछले कई दशकों से इसी स्थान पर रह रहे यह संपत्ति उन्हें उनके पिता तुल्य कैलाशचंद्र द्वारा दी गयी बाकायदा वसीयत द्वारा दी गयी हे सभी दस्तावेज दिए जाने के बावजूद भी उन्हें न्यायालय से न्याय न मिलते हुए सिफत लम्बे समय का इंतज़ार करना पड़रहा हैं और इसी भूमि पर चुकी उनका जीवन एवं आजीविका निर्भर है कई भूमाफिया यह भी हड़पना चाहते हे ।
कनीराम डोंड का कहना है कि उन्होंने इन दस्तावेज़ों के संबंध में विभिन्न विभागों से जानकारी प्राप्त कर संबंधित प्रमाण न्यायालय में प्रस्तुत किए हैं और यह भी कहा है कि इन दस्तावेज़ों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। बताया जाता है कि नामांतरण के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद भी राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टि की प्रक्रिया आगे बढ़ी, जिसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंच गया। वर्तमान में यह प्रकरण राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है।
62 वर्ष से अधिक आयु के किसान कनीराम डोंड का कहना है कि जिस भूमि पर वे पिछले कई दशकों से रह रहे हैं, उसी भूमि के अधिकार के लिए उन्हें लगातार अदालतों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने न्यायालय के समक्ष अपने सभी दस्तावेज़ प्रस्तुत कर दिए हैं, फिर भी उन्हें बार-बार तारीखें मिल रही हैं और अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।
कनीराम डोंड का कहना है कि एक साधारण किसान होने के कारण उनके लिए लगातार न्यायालय जाना और लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना अत्यंत कठिन हो गया है। उनका कहना है कि वह केवल यह चाहते हैं सम्पूर्ण दस्तावेज हमारे द्वारा सत्यता के प्रमाण के साथ दिए जा चुके हे फीर भी न्याय में देर क्यों, राजस्व रिकॉर्ड की सत्यता स्पष्ट हो और उन्हें न्याय मिले।
वर्तमान में यह मामला राजस्व तेहेसिल देपालपुर न्यायालय में लंबित है और आगे की कार्यवाही न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगी।
