नई दिल्ली,। बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारत के बाहर रहने वाले लोगों (पीआरओआई) के लिए भारतीय कंपनियों में इक्विटी निवेश की सीमा बढ़ाने की घोषणा की। व्यक्तिगत निवेश सीमा 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और सभी पीआरओआई के लिए कुल सीमा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 24 प्रतिशत कर दी गई है। सरकार का उद्देश्य विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करना है। इस पहल का स्वागत करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राघव चड्ढा ने सरकार से अहम सवाल भी पूछे हैं। उन्होंने पूछा कि जब एनआरआई निवेश सीमा बढ़ाई जा रही है, तब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफआईआईI) और अन्य विदेशी निवेशक भारत से पैसा क्यों निकाल रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राघव चड्ढा ने संसद में बजट पर दिए गए अपने भाषण का वीडियो भी साझा किया और कहा, कि एनआरआई निवेश सीमा बढ़ाने से ‘डायस्पोरा कैपिटल’ को प्रोत्साहन मिलेगा और करीब 3.2 करोड़ एनआरआई को निवेश का अवसर मिलेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक साल में विदेशी निवेशकों ने लगभग 23 बिलियन डॉलर की निकासी की है। उनके अनुसार, सिर्फ निवेश की सीमा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। अगर हम सस्टेनेबल कैपिटल फ्लो चाहते हैं तो सरकार को विदेशी पूंजी के बाहर जाने के वास्तविक कारणों पर ध्यान देना होगा और निवेशकों का भरोसा बहाल करना होगा। सांसद राघव चड्ढा के इस बयान से बजट के बाद विदेशी निवेश प्रवाह और पूंजी बाजार की स्थिरता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
