*इंदौर, मध्य प्रदेश, 11 फरवरी, 2026:* ब्रिकवर्क रेटिंग्स की ‘मेड फॉर भारत – कस्टमर इम्पैक्ट सीरीज़’ के इंदौर संस्करण में विशेषज्ञों ने देश के व्याोपक आर्थिक परिदृश्यट पर चर्चा की। इस दौरान बताया गया कि यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ हाल ही में घोषित व्यापार समझौतों से भारत के लिए नए निर्यात अवसर खुल रहे हैं और इससे देश के प्रमुख क्षेत्रों की आगे की दिशा तय हो रही है।देश की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए ब्रिकवर्क रेटिंग्स के सीईओ मनु सहगल ने कहा,* “भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वित्त वर्ष 2026 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि लगभग 7.4% रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2027 में यह 6.8 से 7.2% के उच्चव स्तर पर बने रहने की संभावना है। इसकी मुख्य वजह मजबूत घरेलू मांग, नरम मौद्रिक नीति और यूरोपीय संघ तथा अमेरिका के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौते हैं।
भारत में महंगाई में तेज गिरावट आई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर भारतीय रिज़र्व बैंक के मध्यम अवधि के लक्ष्य से काफी नीचे बनी हुई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी और आपूर्ति से जुड़े कदमों ने इसमें मदद की है। महंगाई के इस अनुकूल माहौल ने रिज़र्व बैंक को नरम मौद्रिक रुख अपनाने का अवसर दिया है। इसमें रेपो दर में कई बार कटौती भी शामिल है, जिससे कारोबारियों और निर्यातकों के लिएपूंजी जुटानापहले की तुलना में अधिक सुलभ हुआ है।”
इस पृष्ठभूमि में ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने भारत के नए व्यापार समझौतों की अहमियत पर जोर दिया। *क्राइटेरिया, मॉडल डेवलपमेंट एंड रिसर्च के प्रमुख राजीव शरण ने कहा,* ‘‘भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के तहत यूरोपीय संघ के लगभग 90% उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क में तत्कााल राहत मिलेगी। टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र कोजीरो-ड्यूटीपहुंच मिलेगी। इसके साथ ही सेवा क्षेत्र को और खोलने तथा टिकाऊ विकास से जुड़े मानकों के आधार पर बाजार तक पहुंच जैसे प्रावधान लंबे समय में और बड़े फायदे की राह तैयार करते हैं। भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क में काफी कमी की है। इससे उन क्षेत्रों को राहत मिलेगी, जो 2025 के मध्य से लगाए गए उच्च शुल्कों की मार झेल रहे थे।”
इन समझौतों का सबसे बड़ा फायदा टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है। टेक्सटाइल निर्यात को अब दूसरे देशों के बराबर शुल्क का लाभ मिलेगा, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़तमिलेगी। राजीव शरण ने कहा, ‘‘यह क्षेत्र 2030 तक 350 अरब डॉलर का आकार छू सकता है और इसमें 12% की सीएजीआर दर से बढ़ोतरी होने की उम्मीेद है। मजबूत घरेलू मांग और मुक्त व्यापार समझौते इसकी वृद्धि को गति देंगे। दशक के अंत तक इस क्षेत्र का निर्यात 105 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे भारत, बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों के बराबरआ जाएगा।”
वहीं, फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र के वर्ष 2030 तक 700 अरब डॉलर का आकार छूने की उम्मीद है। बेहतर बाजार पहुंच और गुणवत्ता मानकों का सीधा फायदा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को मिलेगा। कुल मिलाकर, ये व्यापार समझौते आने वाले कुछ वर्षों में कई अरब डॉलर के नए निर्यात अवसर पैदा कर सकते हैं। कर्ज की बेहतर उपलब्धता और ट्रेड फाइनेंस की बढ़ती मांग इससे जुड़ी गतिविधियों को सहारा देगी।
मध्य प्रदेश तेजी से टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग का अहम केंद्र बन रहा है। राज्य अपनी मजबूत कपास और कृषि पैदावार, कुशल कार्यबल औरबेहतर औद्योगिक इकोसिस्टमका लाभ उठा रहा है। इंदौर, उज्जैन और बुरहानपुर के टेक्सटाइल क्लस्टर और सोयाबीन, दालें, अनाज तथा कपास से जुड़ा मजबूत एग्रो-प्रोसेसिंग आधार राज्य को वैश्विकवैल्यू चेन से जुड़ने और निर्यात बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में है।समर्पित टेक्सटाइल पार्क, पीएम मित्रा पार्क, टेक्सटाइल पीएलआई योजना के तहत प्रोत्साहन और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग ढांचे के लिए चलाई जा रही योजनाएं नए निवेश और रोजगार को बढ़ावा दे रही हैं। इससे राज्य दोनों क्षेत्रों के लिए एक मजबूत विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है।
मजबूत आर्थिक वृद्धि, कम महंगाई और नरम होती मौद्रिक नीति देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता दे रही है। ऐसे माहौल में यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ भारत के व्यापार समझौते न केवल बाजार तक पहुंच बढ़ाते हैं, बल्कि यहटिकाऊ और क्षेत्र-आधारित निर्यात वृद्धि के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेंगे।
