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तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कैंपस में 77वें गणतंत्र दिवस पर बड़ी आन,बान और शान से कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने किया ध्वजारोहण
उज्जैन (माधव एक्सप्रेस) तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने विकसित एवम् आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना पर बल देते हुए कहा, आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि बौद्धिक, तकनीकी और नैतिक भी होनी चाहिए। ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसे अभियानों ने देश को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। श्री जैन बोले, विश्वविद्यालयों की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसे युवा तैयार करें, जो नवाचार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण हों। कुलाधिपति श्री जैन यूनिवर्सिटी के कैंपस में आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर बोल रहे थे। गरिमामय एवम् राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत इस समारोह में कुलाधिपति ने विधिवत ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। संपूर्ण विश्वविद्यालय कैंपस देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रीय गौरव की भावना से ओतप्रोत दिखाई दिया। परेड के दौरान यूनिवर्सिटी के सुरक्षा बलों ने कुलाधिपति को सलामी दी। संचालन का दायित्व चीफ वार्डन डॉ. विपिन जैन ने निभाया तो एनएसएस समन्वयक डॉ. रत्नेश जैन ने बतौर कॉर्डिनेटर भूमिका निभाई। इसके अलावा कुंदरकी के हरियाणा इंटर कॉलेज, टिमिट,फैकल्टी ऑफ एजुकेशन, कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर में गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया।
कुलाधिपति ने भारत को विश्व महागुरु के रूप में निरूपित करते हुए कहा कि यह भूमि सदैव ज्ञान, दर्शन, योग, आयुर्वेद और मानव मूल्यों की मार्गदर्शक रही है। आज आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ भारत पुनः विश्व को दिशा देने की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने स्टुडेंट्स से आह्वान किया कि वे ज्ञान को केवल डिग्री तक सीमित न रखें, बल्कि समाज और मानवता के कल्याण में उसका सार्थक उपयोग करें। श्री जैन बोले, आज का भारत केवल लक्ष्य निर्धारित करने वाला राष्ट्र नहीं है, बल्कि उन्हें रिकॉर्ड उपलब्धियों में परिवर्तित करने वाला सशक्त देश बन चुका है। शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, स्टार्टअप, रक्षा एवं खेल के क्षेत्र में भारत निरंतर नई ऊँचाइयों को छू रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ राष्ट्रहित को भी अपना प्रमुख उद्देश्य बनाएं।
कुलाधिपति ने गर्व के साथ कहा कि आज भारत के नागरिक विश्व के लगभग हर कोने में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। भारतीय मूल के लोग अनेक देशों में प्रधानमंत्री, मंत्री और उच्च प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हैं। यह भारत की सुदृढ़ शिक्षा प्रणाली, सांस्कृतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारतीय जहाँ भी जाते हैं, अपने कर्म, अनुशासन और संस्कारों से भारत की सकारात्मक एवम् सशक्त पहचान स्थापित करते हैं।यूनिवर्सिटी कैंपस के गणतंत्र दिवस समारोह में प्रो. एमपी सिंह,प्रो. आरके द्विवेदी, प्रो. विपिन जैन, प्रो. पीके जैन,प्रो. आशु मित्तल, प्रो. आरके जैन
चीफ लाइब्रेरियन विनीता जैन, डॉ. मधुसूदन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
