लघु उद्योगों और एमएसएमई को मजबूत बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का रोडमैप तैयार कर रही सरकार : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी
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25 जनवरी को फ़िल्म रईस अपने नौ वर्ष पूरे कर रही है। यह फ़िल्म आज भी अपनी सशक्त कहानी, भावनात्मक गहराई और प्रभावशाली अभिनय के कारण लोकप्रिय सिनेमा में एक विशेष स्थान रखती है। राहुल ढोलकिया के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म ने गुजरात में एक शराब माफ़िया के उत्थान की कहानी को दर्शाया, जिसमें महत्वाकांक्षा, सत्ता, वफ़ादारी और उसके परिणामों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। दमदार कथानक, असरदार संवाद और यादगार संगीत के साथ रईस ने न केवल व्यावसायिक सफलता हासिल की, बल्कि अपनी परतदार कहानी के लिए समीक्षकों की सराहना भी प्राप्त की।फ़िल्म की सबसे मज़बूत कड़ियों में से एक नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी द्वारा निभाया गया एसीपी मज़मुदार का किरदार रहा। शाहरुख़ ख़ान जैसी विशाल स्क्रीन उपस्थिति के सामने नवाज़ुद्दीन ने संयम, अनुशासन और नैतिक दृढ़ता से भरपूर अभिनय प्रस्तुत किया। उनका किरदार क़ानून, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की सशक्त आवाज़ बनकर सामने आया। एसीपी मज़मुदार और रईस के बीच के टकराव केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं थे, बल्कि विचारधाराओं की टक्कर को दर्शाते थे, जिसने हर दृश्य को गहन, प्रभावशाली और अविस्मरणीय बना दिया।
शाहरुख़ ख़ान और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने रईस को एक अलग ही ऊँचाई पर पहुँचा दिया, जिससे फ़िल्म को भावनात्मक संतुलन और कथानक की गहराई मिली। दोनों कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों में सच्चाई, प्रतिबद्धता और प्रामाणिकता झोंक दी, जिससे ये पात्र आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं। नौ वर्षों बाद भी रईस सशक्त लेखन, संवेदनशील निर्देशन और उत्कृष्ट अभिनय का प्रमाण बनी हुई है—और यह याद दिलाती है कि अर्थपूर्ण सिनेमा पीढ़ियों तक अपनी छाप छोड़ सकता है।
