माता पिता रहे या न रहे उनकी दुआ जरूर काम करेगी : प्रवृद्धि श्री जी

इंदौर : नाकोड़ा पार्श्वनाथ मंदिर में चातुर्मास हेतु विराजित शुद्धिप्रसन्ना श्री महाराज साब और साध्वी मंडल के विदाई का कार्यक्रम आयोजित किया गया इस अवसर पर बोलते हुए सुभाष पावेचा ने कहा –

नाकोड़ा मंदिर परिसर में कई साधु-साध्वी आए और चले गए किंतु शुद्धिप्रसन्ना श्री जी ,प्रवृद्धिश्री जी और समृद्धि श्री जी ने धर्म और ज्ञान की ज्योति जलाई उसकी कोई मिसाल नहीं है । अपनी कविता उड़ी जा रही कोयला हरी भरी डाल से रोको रे रोको कोई तो इन तीनों सतियों को विहार से , ने सभी लोगो भाव विभोर कर दिया । इस अवसर पर बोलते हुए प्रोफेसर सतीश चोपड़ा ने कहा –
पिछले चार माह से महाराज श्री जी के मुखाग्र बिन्दु से ज्ञान की गंगा बह रही थी , हमने उनकी बातों को बड़े ही ध्यान से सुना वह हमारी पढ़ाई के दिन थे , अब हमारी परीक्षा के दिन आए है , हम उनकी बातों का जीवन में उतारकर इस परीक्षा में पास होने का प्रयास करे । आपने प्रवृद्धि और समृद्धि श्री से कहा की आप शीध्र ही अपनी पी.एच डी की थीसिस जमा कर डाक्टरेट उपाधि प्राप्त करे , मेरी और से आपको शुभकामना है । इस अवसर पर भूपेंद्र जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए,संगीता चोरड़िया ,रेखा शाह और नरेन्द्र नाहर ने गीतों के माध्यम से चातुर्मास की सफलता के गीत प्रस्तुत किए ।पाठशाला के बच्चों जिन्होंने सामयिक और दीपावली पर पटाखे नहीं चलाने के पचक्खान लिए थे उन्हें सम्मानित किया गया, इस अवसर पर बोलते हुए प्रवृद्धि श्री जी ने कहा –
सोमवार को खीर पूरी ,मंगल को पानी पूरी ,बुध को भेल पूरी ,गुरु को चाटपूरी ,शुक्र को रसपूरी ,शनि को श्री खंड पूरी और रवि को सैलरीपूरी और यूं ही जिंदगी पूरी हो जाएगी । बड़ी संख्या में उपस्थित बच्चों को संबोधित करते हुए आपने कहा की आप माता पिता के भक्त बन जाए आपने बच्चों से पूछा की कितने बच्चे अपने माता पिता के चरण स्पर्श करते है संतोषजनक जवाब न मिलने पर आपने कहा की भगवान भी अपने माता पिता को प्रणाम करते थे तो हमे शर्म किस बात की भगवान महावीर स्वामी ने गर्भ से ही माता पिता की सेवा प्रारम्भ कर दी थी , भगवान मल्लिनाथ प्रतिदिन अपने माता पिता को प्रणाम करते थे , भगवान पार्श्वनाथ पिता के इशारे पर युद्ध में आगे बढ़ रहे थे , भरत,बाहुबली जैसे अनेक लोग अपने माता पिता के कारण महान बन पाए , हम भी आज जो कुछ है उसके पीछे हमारे माता पिता का आशीर्वाद है । घर में कोई चीज कम होती है तो माँ कहती है मुझे भूख नहीं है और पिता ख़ुद कपड़े कम पहन लेगा लेकिन अपने बच्चों को अच्छे कपड़े पहनायेगा , माता पिता त्याग की मूर्ति होते हैं । आपने कभी अपने माता पिता से पूछा की हम आपके हाथ पैर दबाए अभी अभी दीपावली गई है आप तो स्कूल कालेज में पढ़ाई और मस्ती में मस्त होगे ,आपने कभी अपने माता पिता से पूछा की आप दिन भर काम करते हुए थक गए होगे हम आपकी सेवा करदे । आप उनको कभी ऐसे अपशब्द मत बोलना जिससे उनकी आत्मा को कष्ट पहुँचे ।आप कितने भी आगे बढ़ जाओ , कितनी भी किताबे पढ़ लो आप हमेशा उनके सामने छोटे ही रहोगे । आप अपने माता पिता की दुआ जरूर लेना ,उनकी दुआओं का असर जरूर रहेगा वो रहे या नहीं उनकी दुआ जरूर काम आएगी । महाराज साब की विदाई की बातें सुनते हुए आँखों के आँसू अभी सूखे भी नहीं थे , लेकिन माता पिता पर आपके विचार से उपस्थित लोगो की आँखे और भर आई ।दिनांक 5.11.25 ( बुधवार) को शुद्धिप्रसन्ना श्री जी आदि ठाणा के चातुर्मास परिवर्तन का सौभाग्य अर्पित राजेन्द्र कुमार छजलानी परिवार को प्राप्त हुआ है । छजलानी परिवार ने अनुरोध किया है की पुण्य के इस अवसर पर सामैया के साथ हमारे निवास पर पधारने का कष्ट करे ।
