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बीमार नवजात शिशुओं को जरूरी ईलाज देकर बचाई जा रही जान
रायपुर, 08 अगस्त 2025
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के गृह जिले के जिला अस्पताल में शुरू हुई नियोनेटल केयर यूनिट बीमार नवजात शिशुओं के लिए संजीवनी साबित हो रही है। यहां कम वजन के, फेफड़ों में संक्रमण, रक्त की कमी लेकर पैदा हुए बच्चों का सफलता पूर्वक ईलाज हो रहा है। इसके लिए यूनिट में ऑक्सीजन सपोर्ट, इन्क्यूबेटर से लेकर भोजन के लिए फिडिंग ट्युब जैसे आधुनिक उपकरणों की भी व्यवस्था है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस युनिट की शुरूआत तक प्रसन्नता जताई है। उन्होंने यूनिट में ईलाज कराकर स्वस्थ हुए नवजातों और उनके माता-पिता को अपनी बधाई और शुभकामनाएं भी दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्वस्थ बच्चों से ही मजबूत राष्ट्र बनता है। बच्चों का भविष्य इनके स्वास्थ्य पर निर्भर होता है। सरकार बच्चों के स्वास्थ्य, ईलाज, पोषण से लेकर पढ़ाई, लिखाई तक के लिए गंभीर है और जशपुर जैसे दूरस्थ अंचल में ऐसी यूनिट की स्थापना इसका प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि अब जशपुर ही नहीं बल्कि आसपास के दूसरे जिले के नवनिहालों को भी समय पर ईलाज मिल जाएगा इससे उन्हें ताउम्र भविष्य में होने वाले परेशानी और बीमारियों से बचाने में सहायता मिलेगी। बच्चों का भविष्य अब सुरक्षित और स्वस्थ होगा।
जशपुर के जिला चिकित्सालय के विशेष नवजात शिशु देखभाल ईकाई द्वारा बीमार नवजात शिशुओं को ना सिर्फ अति आवश्यक चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा रही है, बल्कि बीमार नवजात शिशुओं की जान बचाकर उनके परिवार में नयी उम्मीद और खुशियां दी जा रही है। पिछले साल अक्टूबर महीने में जिला चिकित्सालय में भर्ती कांसाबेल के ग्राम-खुटीटोली निवासी श्रीमती कंचन का प्रसव समय से पूर्व गर्भधारण के 30वें सप्ताह जनवरी 2025 में हो जाने के कारण बच्चा श्वसन संबंधी विकार आर.डी.एस., सांस लेने में कठिनाई, फेफड़े के संक्रमण, रक्त मे ऑक्सीजन की कमी व न्यूनतम वजन मात्र 940 ग्राम के साथ जन्म हुआ। बच्चे की अवस्था व जीवन के प्रति संघर्ष को देखते हुए उसके जीवत रहने की उम्मीद बेहद कम थी। जिसके कारण बच्चे को जिला चिकित्सालय में संचालित विशेष नवजात शिशु देखभाल ईकाई, एस.एन.सी.यू. में भर्ती कराया गया। जहां बच्चे की जीवन की रक्षा व शारिरिक विकास के लिये उसे सर्फेकटेंट थेरेपी फेफड़े के विकास के साथ-साथ अतिरिक्त ऑक्सीजन सर्पाेट, फिडिगं ट्युब के माध्यम से पोषण, तापमान नियंत्रण हेतु इनक्यूबेटर आदि सुविधायें लगभग 58 दिनों तक दिया गया। इस दौरान यूनिट में विशेषज्ञ डॉक्टरों एवं प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ द्वारा बच्चे को नियमित रूप देखभाल, उपचार व बच्चे के माता-पिता को परामर्श सुविधा प्रदान की गई।
