शुजालपुर/भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर (आईआईटी इंदौर) में आयोजित 13वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर डॉ. रूपेन्द्र प्रताप सिंह हाड़ा को कम्प्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट (Ph.D.) की उपाधि प्रदान की गई। यह उपाधि उन्हें उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए प्रदान की गई, जो जंगलों में आग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान और नियंत्रण पर केंद्रित था। डॉ. हाड़ा ने अपनी शिक्षा शुजालपुर के सरस्वती शिशु मंदिर और नवोदय विद्यालय शाजापुर से ग्रहण की।
डॉ. हाड़ा ने यह शोध कार्य आईआईटी इंदौर के ‘यूबीक्विटस कंप्यूटिंग लैब’ में प्रोफेसर अभिषेक श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में पूरा किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और मानवीय लापरवाही के कारण वनाग्नि की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे न केवल जैवविविधता को नुकसान होता है, बल्कि मानव जीवन, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।
अपने शोध में उन्होंने मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वायरलेस सेंसर नेटवर्क्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए एक ऐसा प्रणाली विकसित किया जो जंगल में आग लगने की स्थिति को प्रारंभिक स्तर पर पहचान सके और संबंधित विभाग को तुरंत सतर्क कर सके।
डॉ. हाड़ा का यह कार्य न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका व्यावहारिक उपयोग भी संभव है। उन्होंने इस प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट भारत के मेलघाट टाइगर रिजर्व में लागू किया, जहाँ इस तकनीक ने प्राथमिक स्तर पर आग का पता लगाकर संरक्षण अधिकारियों को त्वरित प्रतिक्रिया देने में सहायता की।
उनके इस नवोन्मेषी शोध के परिणामस्वरूप अब तक चार अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं, जो वैश्विक स्तर पर उनकी प्रतिभा और मेहनत को दर्शाते हैं।
दीक्षांत समारोह के दौरान एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ के संस्थापक श्री अजय चौधरी, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. सिवान तथा आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रो. सुभाष जोशी जैसे महानुभावों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इन सभी विशिष्ट अतिथियों ने नव-स्नातकों को वैज्ञानिक सोच, नवाचार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा दी।
अपने अनुभव साझा करते हुए डॉ. हाड़ा ने कहा,
“आईआईटी इंदौर न केवल अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र है, बल्कि यह संस्थान अनुसंधान को समाज की समस्याओं से जोड़ने में भी अग्रणी है। मैं अपने मार्गदर्शक, संस्थान और परिवार का आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग के बिना यह संभव नहीं हो पाता।”
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर डॉ. हाड़ा के माता-पिता, ताऊजी पूर्व विधायक शुजालपुर श्री जसवंत सिंह जी हाड़ा, परिवारजनों, मित्रों एवं शिक्षकों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
डॉ. रूपेन्द्र प्रताप सिंह हाड़ा की यह उपलब्धि देश के युवा शोधार्थियों के लिए एक प्रेरणा है, जो विज्ञान और तकनीक के माध्यम से समाजहित में योगदान देने को तत्पर हैं।