इंदौर / चौबीस तीर्थंकरों में सबसे पहले भगवान आदिनाथ थे जिन्हें सभी धर्मो का संस्थापक आदि पुरुष माना जाता है, वे वर्तमान समय चक्र के पहले राजा थे ! तीर्थंकर भव से पहले उनके बारह भव हुए आज गुमास्तानगर श्री संघ के लिए महत्वपूर्ण दिन था क्योंकि नाकोड़ा जैन श्वे.मंदिर में प.पू.साध्वी समृद्धि श्रीजी महाराज साब ने आदिनाथ भगवान के बारह भवों का वर्णन किया, इन भवों के वर्णन सुनने का महत्व बताते हुए महाराज श्री ने कहा कि भव यात्रा सुनने से हमारी आत्मा जो भव-भव यात्रा कर रही है वह समाप्त हो जाती है ।
भव यात्रा सुनने से भगवान द्वारा पूर्व भव में किए गए अच्छे कार्यो को करने के भाव जाग्रत होते हैं ।हमारे अंदर सेवा भावना , दान भावना , तप भावना शील भावना , संयम , त्याग, परिश्रम और जो परमात्मा के गुण है उन्हें अपनाने की भावना जागृत होती है , आगे आपने बताते हुए कहा की मतिज्ञान , श्रुतज्ञान, और अवधिज्ञान के साथ इक्ष्वाकुभूमि के नाभि कुलकर की देवी मरुदेवी माता की कुक्षी से भगवान आदिनाथ का जन्म हुआ !
समृद्धि श्री जी ने आगे कहा कि *”जिसका दिल बड़ा होता है वही भगवान बनता है !”* *”संसार हमेशा पुण्य के सहारे चलता है “*
प.पू.शुद्धि प्रसन्ना श्री जी ने अपनी मधुर वाणी से नवकार महामंत्र का सामूहिक पाठ कराया ! प.पू. प्रवृद्धि श्री जी की प्रेरणा से युवा मण्डल के सदस्यों ने भगवान आदिनाथ के अनेक भजन अपनी मधुर वाणी में प्रस्तुत कर भक्ति का माहौल बना दिया ।कार्यक्रम की वीडियो रिकार्डिंग आशिता सुराणा ने की ! इस अवसर समाज के वरिष्ठ लाभचंदजी सुराणा , भूपेन्द्र कुमार जी जैन , प्रो.सतीश चोपड़ा , डा.एन.के .जैन , मनोज रांका , प्रदीप पोरवाल , हसमुख पोरवाल , अनिल जी बोहरा सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष उपस्थित थे !