नलखेड़ा में विराजमान है महाभारत कालीन बल्डावदा हनुमान जी की चमत्कारी मूर्ति पहाड़ी के अंदर छिपी है अपार धन संपदा गुरु पूर्णिमा के दिन लगता है यहां मेला
नलखेड़ा (प्रदीप चौबे) -बिच्छू का धर्म है काटना। बिच्छू अगर काटना छोड़ दे तो उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा परंतु इस घोर कलयुग में आगर जिले के नलखेड़ा नगर से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित महाभारत कालीन बल्ड़ावदा हनुमान मंदिर हैं जहां वर्ष में एक बार गुरु पूर्णिमा के दिन मेला लगता है जिस दिन मंदिर के आसपास स्थित पहाड़ी पर छोटे पत्थरों के नीचे छोटे बिच्छू व बड़े पत्थरों के नीचे बड़े बिच्छू निकलते हैं जो यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं बच्चे बूढ़े सभी इन बिच्छू को हाथों में लेकर अठखेलियां करते हैं लेकिन बिच्छू उस दिन अपने काटने का धर्म छोड़ देते हैं क्या पता अपने गुरु हनुमान के चरणों में शीश नवाने आए हजारों बिच्छू अपने गुरु भाइयों को शायद उस दिन कष्ट नहीं देना चाहते हैं गुरु पूर्णिमा के दिन हनुमान जी के दर्शन हेतु आए बच्चे अपने हाथों एवं शरीर पर बिच्छूओ को उठाकर अपने शरीर पर चलाते हैं यह सब किसी चमत्कार से कम नहीं है
धूलकोट आंधी से नगर हो गया था तबाह सिर्फ मंदिर ही बचा था
पुरातत्वविदो का कहना है कि हजारों वर्ष पूर्व नलखेड़ा नगर इसी मंदिर के आसपास पहाड़ी के नीचे बसा हुआ था और यह मंदिर नगर के मध्य में स्थित पहाड़ी पर ऊंचे स्थान पर था परंतु हजारों वर्ष पूर्व नगर में आई धूलकोट आंधी के पश्चात पूरा नगर तबाह हो गया था और सिर्फ यह हनुमान जी का मंदिर ही बचा था जिसे धूलकोट आंधी भी कुछ नहीं कर पाई थी इतिहासकार अपने कथन की पुष्टि के लिए मंदिर के आसपास हुई खुदाई में मिली वस्तु को प्रमाण बताते हैं
महाभारत कालीन है यह मंदिर
बल्ड़ावदा हनुमान मंदिर
महाभारत कालीन है क्योंकि उस समय मूर्ति नाभि के ऊपर वाली रहती थी इस बात की पुष्टि पुरातत्व विभाग के श्री वाकणकर व वृंदावन से आए संत श्री राम जी कोकिल बाबा ने की
पहाड़ी के नीचे छिपीअपार धन संपदा
बल्डावदा हनुमान मंदिर के नीचे पहाड़ी पर व मंदिर के मुख्य हवन कुंड के नीचे अपार धन संपदा छिपी हुई हैं जिसको कोई हासिल नहीं कर सकता ना ही खोद सकता है कई वर्ष पूर्व एक व्यक्ति ने खोदने की कोशिश की थी तो उसको गंभीर परिणाम भुगतने पड़े
पर्यटन विभाग में आने से बदली मंदिर की रंगत
आज से कुछ वर्ष पूर्व यह बल्डावदा हनुमान जी का मंदिर पर्यटन विभाग में शामिल होने के बाद इस मंदिर की रंगत बदल गई यहां मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ साथ विशाल यज्ञशाला भी पर्यटन विभाग ने बनाई है यह हुए विकास कार्य के कारण मंदिर के सौंदर्यकरण में चार चांद लग गए हैं
घुटने घुटने कीचड़ में जाते थे लोग गुरु पूर्णिमा के दिन दर्शन करने
कई वर्षों से हर गुरु पूर्णिमा को बल्ड़ावदा हनुमान मंदिर पर मेला लगता है आज से 28 वर्ष पूर्व नलखेड़ा नगर से वहां जाने के लिए कच्चा रास्ता था जिस पर नगर के लोग घुटने घुटने कीचड़ में चल कर दर्शन करने जाते थे लेकिन 1996 मे कांग्रेस सरकार में विधायक रहे वल्लभभाई अंबावतिया ने अपनी विधायक निधि से सर्वप्रथम सड़क निर्माण कराकर नगर के नागरिकों को सौगात दी थी
माह की हर पूर्णिमा को होती है यहां महाआरती
बल्ड़ावदा हनुमान मंदिर पर गत एक वर्ष से हर माह की पूर्णिमा की रात्रि को नगर के श्रद्धालुओं द्वारा महा आरती की जाती है जिसमें हनुमान जी को चोला चढ़ाकर व आकर्षक श्रृंगार किया जाता है उसके बाद ढोल धमाके के साथ महाआरती की जाती है
कहीं हो चुके हैं मंदिर में चमत्कार
बल्डावदा हनुमान मंदिर में कहीं चमत्कार हो चुके हैं सन 1986 से यहां निवासरत हनुमान जी की सेवा करने वाले महामंडलेश्वर श्री रामदास जी त्यागी का कहना है कि हनुमान जी की मूर्ति चमत्कारिक है यहां आने वाले श्रद्धालुओं की हर मन्नत पूरी होती हैं अगर कोई व्यक्ति मंगलवार को सच्चे मन से यहां कामना करता है तो निश्चित उसकी मनोकामना पूर्ण होती हैं।
आज उमडेगा भक्तों का सैलाब
प्राचीन बल्डावदा हनुमान मंदिर पर गुरु पूर्णिमा पर एक दिवसीय मेला लगता है मेले में खाने-पीने की चीजों सहित बच्चों के खिलौने की दुकान लगती है मेले में नलखेड़ा नगर सहित आसपास के ग्रामों के लोग आते हैं वह हनुमान जी के दर्शन कर अपनी मनोकामना पूर्ण करते हैं।
