शुजालपुर / इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार साल का पहला महीना मुहर्रम होता है. इसे ‘गम का महीना’ भी माना जाता है. इसी मुहर्रम के महीने में हजरत मोहम्मद के नाती हजरत इमाम हुसैन को कर्बला की जंग (680 ईसवी) में परिवार और दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया था. हर साल मुस्लिम समुदाय के लोग इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कर्बला में हुई शहादत को याद करते हैं. इस मौके पर ताजिया (मोहर्रम का जुलूस) निकाले जाते हैं।
इसी तारतम्य में सोमवार को शुजालपुर सिटी बस स्टैंड से ताजिए बुरराकों और दुलदुल का जुलूस अखाड़े के साथ नगर के विभिन्न मार्गो से होता हुआ सायं कॉल 4:00 बजे सिटी बस स्टैंड पहुंचा जहां मोहर्रम ताजिया कमेटी की ओर से कल्लू सदर,नफीस पठान ( सदर मोहर्रम कमेटी) की सर परस्ती में कमेटी के सदर एवं अन्य पदाधिकारी शफीक खान मुन्ना पठान,आजम खान एवं अन्य सदस्यों ने ताजिए दारों एवं प्रशासनिक अधिकारियों का सम्मान किया।यह ऐतिहासिक जुलूस लगभग 2 किलोमीटर का का मार्ग तय कर छोटा बाजार, पथरोड़ी, मलकपुरा , तलाबपुरा, मनिहारपुरा , कन्या शाला मार्ग होते हुए सिटी बस स्टैंड पर पहुंचा । जुलूस में लगभग 2000 महिला पुरुष बच्चे शामिल थे, लगभग 10 डी.जे. और नगर के सभी बैंड बाजों के साथ कई अखाड़ों के नौजवान अपने करतब दिखाते हुए जुलूस के साथ चल रहे थे, इस बार पिछले वर्षों से अधिक ताजिए बनाए गए थे ।
जुलूस में डॉक्टर आरिफ दिल्लू भाई , जावेद भाई, साबिर भाई योगी, वहीद खान, मल पहलवान , संतु खान , परवेज खान, बशारत भाई, इस्लाम पहलवान , इमाम भाई , याकूब भाई के सुंदर एवं कलात्मक ताजिए मनोरम दृश्य उपस्थित कर रहे थे। इस जुलूस में ताजियों के साथ अनवर भाई जावेद सलमान और भाई की बुरराकों के साथ मुबारक खान हमजा जागीरदार और समद भाई का दुल दुल भी(घोड़े) जुलूस की शान बड़ा रहा था। जुलूस में दो छोटे-छोटे 10- 12 साल के बच्चे आरिफ एवं जुनैद भी छोटा सा ताजिया लेकर 2 किलोमीटर तक चले।
सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल पेश करते हुए कल्लू और बने सिंह अहिरवार भी अपना ताजिया कंधे पर उठा कर चल रहे थे । शुजालपुर में सप्ताह भर चलने वाले मोहर्रम के कार्यक्रम में प्रशासन चुस्त और दुरुस्त रहा ।
स्थानीय एसडीएम अर्चना कुमारी एस.डी.ओ.पी. निमेष देशमुख और नगर निरीक्षक पुलिस पाठक जी अपने अधीनस्थ जवानों और कर्मचारियों के साथ मोहर्रम की हर गतिविधि को सफलतापूर्वक पूरा करने में लग रहे।