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रायगढ़, 26 जून । रायगढ़ जिले के तमनार तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत सराईटोला के आश्रित ग्राम मुडागांव में एक उद्याेगपति समूह द्वारा शुरू की गई जंगल कटाई ने एक बार फिर पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे को गरमा दिया है। इस कटाई के लिए सैकड़ों पुलिस बल की तैनाती की गई है और आरोप है कि स्थानीय आदिवासियों को उनके घरों में कैद कर जंगल काटा जा रहा है। पेड़ कटाई के विरोध में आज गुरुवार सुबह ग्रामीणों का समर्थन करने पहुंची लैलूंगा कांग्रेस विधायक विद्यावती सिदार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, मुडागांव में एक परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर जंगल कटाई शुरू की गई है। इस कार्य के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, और स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है ताकि वे कटाई का विरोध न कर सकें। ग्रामीणों का कहना है कि यह जंगल उनकी आजीविका, संस्कृति और पर्यावरण का आधार है, जिसे बिना उनकी सहमति के नष्ट किया जा रहा है। इसके विराेध में ग्रामीणाें का समर्थन करने पहुंची लैलूंगा विधायक विद्यायक सिदार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
आदिवासियों का कहना है कि जंगल कटाई न केवल उनके पारंपरिक जीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि क्षेत्र की जैव-विविधता को भी भारी नुकसान पहुंचा रही है। एक स्थानीय आदिवासी ने कहा कि “हमारे जंगल हमारी माँ हैं। इन्हें काटना हमारे अस्तित्व पर हमला है। हमें घरों में कैद कर जंगल काटा जा रहा है। यह कैसा रामराज्य है?
उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने तमनार में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। स्थानीय आदिवासियों ने उनका स्वागत किया था, लेकिन अगले ही दिन जंगल कटाई की खबर ने उनके इस संदेश को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
मुडागांव के मामले में भी ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सहमति के बिना यह कटाई शुरू की गई है। एक आदिवासी महिला ने कहा कि हमारी ग्राम सभा की राय को नजरअंदाज किया गया। हमें न तो सूचना दी गई, न ही हमारी बात सुनी गई। आदिवासी अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कटाई को वन अधिकार अधिनियम 2006 का उल्लंघन बताया है, जो आदिवासियों को उनकी पारंपरिक जमीन और जंगलों पर अधिकार देता है।
पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों पर सवाल
यह घटना एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच टकराव को उजागर करती है। तमनार का क्षेत्र जैव-विविधता से समृद्ध है, और यहाँ के जंगल कार्बन अवशोषण, जल संरक्षण और आदिवासी संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि ऐसी कटाई से न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान होगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धताएँ भी प्रभावित होंगी। मुडागांव में जंगल कटाई के खिलाफ आदिवासी समुदाय और स्थानीय संगठन विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। कुछ कार्यकर्ताओं ने कानूनी कार्रवाई की बात भी कही है।
