भगवती की आराधना का दिन गुप्त नवरात्रि प्रारंभ,गुप्त सिद्धियो की प्राप्ति के लिए विशेष महत्व
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त: सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 07 बजकर 10 मिनट तक

उज्जैन: आज से भगवती की आराधना का दिन गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो रही है । वर्ष में चार नवरात्रि होती है प्रथम छेत्र मास की द्वितीय आषाढ़ मास तृतीय अश्विन मास की तथा चतुर्थ माघ मास की नवरात्रि होती है जिसमें आज से आषाढ़ मास की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो रही है यह 9 दिन देवी आराधना के हैंइस दौरान मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की पूजा अर्चना गुप्त तरीके से की जाती है। भक्त देवी की उपासना करते हैं और दुर्गा सप्तशती पाठ भी किया जाता है। जिसमें गुप्त सिद्धियो की प्राप्ति के लिए विशेष महत्व है, इस समय अंतराल मे शत्रुओ पर विजय प्राप्ति कोट कचेरी से सम्बन्धित कार्य राजनैतिक कार्य गुप्त धन से सम्बन्धित ऐसे समस्त कार्यो के लिए यह समय अनुकूल होता है नवदीन तक ब्रह्मचर्य का पालन करके मास मदिरा सेवन ना करके अगर निष्ठा से देवी आराधना की जाये तो अवश्य फल प्राप्त होता है।तांत्रिकों को तंत्र साधना करने के लिए गुप्त नवरात्रि का इंतजार रहता है, इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुरा भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।तांत्रिक साल में केवल दो बार ही अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए तांत्रिक साधना में लग सकता है क्योंकि गुप्त नवरात्रि साल में दो बार आती है।मंगलनाथ मंदिर के पुजारी पंडित विपिन शर्मा ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के दिन ग्रहों का उत्तम योग रहेगा। इस दौरान 28 जून को गुरु ग्रह आद्रा नक्षत्र के दूसरे चरण में रहेंगे, वहीं 29 जून को शुक्र वृषभ राशि में गोचर करेंगे। यही नहीं 30 जून को मंगल पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसके अलावा नवरात्रि की कलश स्थापना सर्वार्थ सिद्धि योग में कर सकते हैं, जो 26 जून सुबह 8:48 से 27 जून सुबह 7:22 तक रहेगा। इस योग में सभी काम पूरे होते हैं। इसके अलावा रवि योग 28 जून को बन रहा है, जो 31 जुलाई तक सुबह 9 बजे तक रहेगा। इस प्रकार इस बार के गुप्त नवरात्रि बहुत ही शुभ माने जा रहे हैं। ज्योतिष भव्य तातेड ने बताया कि गुप्त नवरात्रि 2025 एक ऐसा शुभ समय है जब साधक माता की गुप्त रूप से आराधना कर विशेष सिद्धियां प्राप्त कर सकते हैं। यह पर्व 26 जून से 4 जुलाई तक मनाया जाएगा। इस बार गुप्त नवरात्रि पर ग्रहों की चाल साधना को और भी शक्तिशाली बना रही है। बुध ग्रह के प्रभाव से इस समय हमारी बुद्धि और एकाग्रता बढ़ेगी, जिससे मंत्र जाप, पढ़ाई और ध्यान में मन लगेगा। मंगल और केतु की युति से शरीर में जोश और ऊर्जा बढ़ेगी, लेकिन साथ ही गुस्से और आवेग पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। जो लोग गहरी साधना करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय बहुत अनुकूल है। बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर माँ की कृपा, परिवार में सुख और आध्यात्मिक उन्नति लाने वाला है। वहीं शुक्र के वृषभ राशि में होने से जीवन में प्रेम, सौंदर्य और रिश्तों की मिठास बढ़ेगी। कुल मिलाकर, गुप्त नवरात्रि 2025 में ग्रहों की स्थिति साधना, ध्यान, और आत्मिक विकास के लिए बेहद शुभ है – यह समय जीवन में नयी ऊर्जा और माँ की कृपा लाने का सुंदर अवसर है।गुप्त नवरात्रि में उज्जैन के प्रसिद्ध मंदिर हरसिध्दि, गढ़कालिका, भूखी माता मंदिर पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहेगा।
