डॉ.महेन्द्र यादव की पाती थोड़ी जज़्बाती

इंदौर की धड़कनों को झकझोर देने वाला एक ऐसा सच सामने आया है, जो किसी भी संवेदनशील इंसान की आत्मा को हिला दे।
राजा रघुवंशी — एक होनहार, सजीव, मुस्कुराता चेहरा — जिसकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी थी उसकी नई नवेली पत्नी सोनम रघुवंशी।
11 मई को दोनों ने सात फेरे लिए, सपनों की डोर में बंधे, और 20 मई को चल दिए हनीमून मनाने मेघालय।
मगर यह कोई हनीमून नहीं था…
यह एक सोची-समझी साजिश थी, जो राजा को मौत के गड्ढे तक ले जाने वाली थी — और उसके पीछे कोई और नहीं, बल्कि उसकी पत्नी सोनम ही थी।
ममता के प्रतीक को कलंकित कर गई ‘सोनम’
हमारे समाज में स्त्री को शक्ति का स्वरूप कहा गया है — ममता, करुणा और त्याग की मूर्ति। मगर चंद औरतें — हां, सिर्फ कुछ — आजकल ऐसे वीभत्स अपराधों को अंजाम दे रही हैं कि पूरी नारी जाति को कटघरे में खड़ा होना पड़ रहा है।
राजा की हत्या ने सिर्फ एक बेटे को मां से नहीं छीना, बल्कि उस भरोसे को भी तोड़ दिया है जो समाज स्त्रियों के प्रति संजोए बैठा था।
हनीमून या योजना?
राजा और सोनम हनीमून के लिए निकले, और फिर अचानक सब कुछ खामोश हो गया।
सोनम अपने साथ सभी गहने ले गई थी — ये कहकर कि फोटोशूट करवाना है।
राजा के खाते से लगभग 9 लाख रुपये निकाले गए।
कुछ दिन बाद जब दोनों से संपर्क टूट गया तो परिवार परेशान हुआ, सोशल मीडिया पर पोस्टें आईं, पुलिस हरकत में आई।
10 दिन बाद राजा की लाश मिली — शरीर क्षत-विक्षत, पहचान के लायक नहीं रहा।
सोनम? गायब।
लोगों को उम्मीद थी — “कहीं सोनम खतरे में ना हो?”
किसी ने कमेंट किया — “कहीं सोनम ने ही तो कुछ नहीं किया?”
और समाज ने उसे ही लानतें भेज दीं — “स्त्री को ऐसा कहने की हिम्मत कैसे हुई?”
लोगों को विश्वास था उस करुणामई स्त्री पर। मगर…
असलियत खुली, हकीकत चौंकाने वाली थी
मेघालय और इंदौर पुलिस ने जबरदस्त मेहनत की।
गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) से सोनम को गिरफ्तार किया गया।
सोनम रघुवंशी — वही जिसने कुछ हफ्ते पहले सात वचन लिए थे — अपने ही पति की हत्या की साजिशकर्ता निकली।
मेघालय पुलिस ने पुष्टि की कि सोनम ने सुपारी देकर राजा की हत्या करवाई।
क्या हो गया है आजकल की कुछ लड़कियों को?
क्या पैसा, आज़ादी और झूठे सपनों के पीछे अब प्रेम, विश्वास, और रिश्तों की कीमत खत्म हो गई है?
क्या पति अब सिर्फ एक रास्ता है संपत्ति और योजना पूरी करने का?
क्या अब स्त्री सिर्फ त्याग का प्रतीक नहीं, छल और चाल की मूर्ति बनती जा रही है?
ये सवाल पूरे समाज से जवाब मांगते हैं।
कानून मजबूत है, न्याय जरूर होगा
इस मामले में पुलिस की जितनी प्रशंसा की जाए कम है।
इंदौर और मेघालय पुलिस ने मिलकर न सिर्फ सोनम को ढूंढ निकाला बल्कि इस अंधेरे सच को उजागर किया, जिसे लोग स्वीकार ही नहीं कर पा रहे थे।
सोनम तो मिल गई — जिंदा, सलामत, और अब कानून के शिकंजे में।
मगर राजा?
वो तो अब कभी नहीं लौटेगा…
ना वो मां की गोद में लेटेगा,
ना बहन को रक्षाबंधन पर गिफ्ट देगा,
ना दोस्तों के साथ हँसी बाँटेगा।
सवाल समाज से भी है:
क्या अब भी हम आंख मूंदकर हर स्त्री को देवी मानते रहेंगे?
या अब समय आ गया है कि अच्छाई और बुराई का मूल्यांकन इंसान के कर्मों से हो, उसके लिंग से नहीं।
राजा रघुवंशी को विनम्र श्रद्धांजलि।
और सोनम को सिर्फ एक बात —
“तू तो बच भी गई, मगर तू अब ज़िंदा नहीं…
क्योंकि ज़िंदा वो होते हैं, जो इंसानियत नहीं मारते।”
