कालांतर में पत्रकारिता एक मिशन हुआ करती थी आज शुद्ध रुप में व्यवसाय बन गई है आजादी की लड़ाई में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए कई पञकार शहीद हुए उनमें से स्व0 लाला जगत नारायण भी हैं जो पत्रकारिता की अलख जगाये रख वलि वेदी पर होम हो गये । छतरपुर जिले की गौरवशाली पत्रकारिता का अपना इतिहास रहा हैं यहां से सबसे अधिक अखबार निकलते छतरपुर जिले को अखबारों की मंडी कहा जाये तो अतिश्योक्क्ति न होगा एक समय जिले के पञकारों का डंका बजता था तब अधिमान्यता जैसे शब्द की जरूरत नही पड़ती थी आज अधिमान्य पञकार के साथ अपराधियों जैसा सलूक होता आया हैं आज के दौर में पञकारों ने विभिन्न नामों से संगठन खड़े कर लिए जिससे पञकारिता लक्ष्य से भटक कर बटी हुई दिखाई दे रही हैं निश्चित रुप से पञकार उत्पीड़न के पीछे किसी पञकार साथी का ही हाथ होता हैं जिस वजह से पञकारों की गुटबाजी का फायदा नेता माफिया अधिकारी और अपराधी उठाते आये हैं आज निष्पक्ष और अधिमान्य पञकारों की अधिमान्यत खतरे में पड़ गई हैं उन्हें सच कहने और दिखाने के बदले उनकी कलम को कुचला जा रहा हैं उन पर केस दर्ज किये जा रहे हैं जनसंपर्क विभाग द्वारा दिया गया तमगा झूठ का पुलिंदा साबित हो रहा है पञकारिता के नैतिक मूल्यों के पतन के पीछे की असली वजह अपराधियों का एक तवका पञकारिता में आ खड़ा हुआ है जो छपास रोग से ग्रसित माफियाओ नेताओं अधिकारियों की गोद में बैठ कर उनके हाथों की कठपुतली बन हुआ हैं आज अधिमान्यता के नाम पर बारहवीं व स्नातक पास जनसंपर्क कार्यालय से अधिमान्यता का तमगा लेकर अपने आपको अधिमान्य लिखना शुरू कर देते हैं पर इनकी अधिमान्यता भी यहां खतरे में पड़ गई अधिमान्य भी आज अपराधियों नेताओं अधिकारियों से सुरक्षित नही इन पर भी केस दर्ज कर अपराधियों के साथ कटघरे में ला खड़ा किया जाता
है फिर कैसी अधिमान्यता जब तक पञकारिता में अधिमान्यता के लिए जनसंपर्क की डिग्री की अनिवार्यता लागू नही की जाती तब तक अधिमान्यता दी ही नही जानी चाहिए अधिमान्यता का कपोल कल्पित स्वरूप अधूरा ही रहेगा, बुद्धिजीवी वर्ग का तो यहां तक कहना है कि जनसंपर्क विभाग जनसंचार डिग्रीधारी को अधिमान्य नही विधि मान्य पञकार कहा जाये और वििधमान्य पञकार के साथ दुर्व्यवहार करने वालों को सीधे जेल का रास्ता दिखाया, जिले की गौरवशाली पत्रकारिता का इतिहास रहा हैं छतरपुर जिले के मूर्धन्य पञकारों में विनीत खरे शिव अनुराग पटैरिया दिनेश निगम त्यागी राजेश बादल पंकज चतुर्वेदी श्याम अग्रवाल रवीन्द्र व्यास हरि अग्रवाल स्व0 रामानंद जौर मनेन्दु पहारिया डाँ0 अजय दोसाज डा0 ऱजज्व खाँ सनत जैन सुरेन्द्र अग्रवाल अशोक नायडू पुष्पेन्द्र सिंह श्याम खरे विकल्प पाठक जैसे सशक्त हस्ताक्षर हैं जिनकी तूती बोलती थी आपने पत्रकारिता की अलख जगाये रख पञकारिता को मिशन के रुप में काम कर छवि निर्माण का कार्य किया आज के दौर में कारपोरेट घराने के लोग पैसा लगाकर कम्पोजीटर को बिठाकर पैसा कमाने के उद्देश्य से घुसपैठ कर गये हैं जहां पञकारिता को पेशे व काले कारोबार के रुप इस्तेमाल किया जा रहा हैं आज अच्छे व शिक्षित वर्ग के लोग पञकारिता में आना नहीं चाहते वहीं बेरोजगार फालतू और पालतू अपराधी किस्म के लोग जिन्हें पञकारिता से दूर तक सरोकार नही हैं इस मिशन में एक बड़ा तबका आ खड़ा होने से लोकतंत्र का शक्तिशाली स्तम्भ आज इतना जर्जर पद भ्रष्ट हो जायेगा किसी ने कभी कल्पना भी नही की होगी ।
