निःशुल्क चिकित्सा शिविर में उजागर हुईं जमीनी हकीकतें, चलने में असक्षम मरीजों तक भी पहुंची डॉक्टरों की टीम
इंदौर। 30 मई 2025 शहर की घनी आबादी वाली बस्ती शुक्ला नगर में, जहाँ लगभग 1,820 लोग चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जीवनयापन करते हैं, शनिवार को स्केपर्स सोसायटी फॉर सोशल वेलफेयर ने नवलखा स्थित जीवनशाला स्कूल परिसर में एक महत्वपूर्ण निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किया। सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चले इस शिविर में कई स्थानीय निवासियों ने स्वास्थ्य परामर्श और प्राथमिक जांच सेवाओं का लाभ उठाया। यह शिविर इस मायने में भी खास रहा कि यह बस्ती में व्याप्त गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे बच्चों में कुपोषण, महिलाओं में एनीमिया और स्वच्छता के अभाव से जुड़ी बीमारियों की पृष्ठभूमि में आयोजित किया गया था। खास बात यह रही कि जो मरीज चलने में असमर्थ होने के कारणवश शिविर तक नहीं पहुंच सके, उनके लिए डॉक्टरों की टीम ने घर-घर जाकर चिकित्सा सेवाएं दीं – एक ऐसी सुविधा जो यहाँ की टूटी-फूटी झोपड़ियों और सीमित संसाधनों के बीच रहने वाले लोगों के लिए वरदान साबित हुई।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दी बहुमूल्य सेवाएं
शिविर में बाल रोग, स्त्री रोग, पेट और लीवर संबंधी बीमारियों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मौजूद रही। शुक्ला नगर जैसे क्षेत्र में, जहाँ 80% से अधिक वयस्क अस्थायी मजदूरी पर निर्भर हैं और स्वास्थ्य अक्सर प्राथमिकता नहीं बन पाता, तथा जहाँ महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव एक बड़ी चुनौती है, इन विशेषज्ञों की उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण थी। इनमें प्रमुख रूप से डॉ. मयंक जैन, डॉ. जेनिशा जैन, डॉ. मुकेश वर्मा, डॉ. अश्विन रवींद्रन, डॉ. आयुषी जैन, डॉ. अनुराग जैन और डॉ. अल्पना अवस्थी शामिल थे। इन सभी ने निःशुल्क परामर्श के साथ ज़रूरतमंदों को रियायती दरों पर जांच व निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराईं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली।
बुजुर्गों, दिव्यांगों और बच्चों को प्राथमिकता
जो मरीज शारीरिक असमर्थता या उम्रजनित कारणों से शिविर में नहीं पहुंच सके, उनके लिए टीम ने घर जाकर जांच की और उपचार उपलब्ध कराया। शिविर में बुजुर्गों, विकलांगों और बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर परामर्श दिया गया, जो बस्ती के गंदे नालों और विभिन्न संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
- मानसिक रूप से कमजोर बच्चों की पहचान: शिक्षा से जुड़ा एक अहम पहलू
शिविर के दौरान एक चिंताजनक तथ्य सामने आया जब कुछ बच्चों में मानसिक विकास में देरी के लक्षण पाए गए। डॉक्टरों का कहना है कि अगर इन्हें समय पर उचित इलाज मिल जाए तो ये बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं। यह खोज शुक्ला नगर के उस आंकड़े के साथ और भी गंभीर हो जाती है जहाँ 34% बच्चे (0–14 साल) स्कूल से बाहर या अनियमित उपस्थिति वाले हैं। इन बच्चों के विकास में देरी उनकी शिक्षा और भविष्य के लिए एक अतिरिक्त बाधा बन सकती है। संस्था ने ऐसे बच्चों के लिए विशेष फॉलोअप कैम्प की योजना बनाई है।
वाइटनर की लत में फंसे किशोर: बेरोजगारी और नशे का गठजोड़
संस्था के सदस्य पुष्कर सोनी ने बताया कि शिविर में एक और गंभीर स्थिति तब उजागर हुई जब कुछ बेहद कम उम्र के बच्चे वाइटनर जैसे पदार्थों की लत में पाए गए। यह समस्या बस्ती में युवाओं के बीच व्याप्त बेरोज़गारी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के माहौल में और भी भयावह रूप ले लेती है। बच्चों में अपराधिक प्रवृत्ति भी देखी गई है |डॉक्टरों ने बस्ती क्षेत्र में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को गंभीर बताया और इसके लिए प्रशासन और जनभागीदारी की मदद से वृहद स्तर पर नशा-उन्मूलन योजना चलाने की बात कही।
स्कूल प्रबंधन का सराहनीय योगदान
शिविर संचालन में जीवनशाला स्कूल की ओर से समन्वय गुप्ता और श्वेता गुप्ता ने अहम योगदान देते हुए डॉक्टर्स की टीम को बस्ती के प्रमुख बिंदुओं से अवगत कराया, जिससे जरूरतमंदों तक पहुंचना आसान हुआ। स्थानीय लोगों ने स्केपर्स के इस आयोजन की सराहना की और इसे “जरूरतमंदों के लिए जीवनदायिनी सेवा” बताया।
सिर्फ इलाज नहीं, बदलाव की सोच के साथ काम कर रही संस्था
संस्था की संस्थापिका डॉ. जेनिशा जैन (*MD DNB( Neonatology ), नवजात शिशु गहन चिकित्सक* ने बताया कि जनवरी 2020 में स्थापित SKEPURS Society For Social Welfare, अब तक देशभर में 40 से अधिक गंभीर रोगियों की सहायता कर चुकी है और ₹12 लाख से अधिक की राशि समाजसेवा में खर्च की जा चुकी है। इंदौर की 646 बस्तियों में ‘Mission Spandan’ के ज़रिए संस्था मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक पुनर्वास पर काम कर रही है। शुक्ला नगर जैसी बस्तियों में, जहाँ स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता की मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, इस प्रकार के बहुआयामी प्रयास ही वास्तविक और स्थायी बदलाव की नींव रख सकते हैं।
