बड़वाह — शहर में फलफूल गया सूदखोरी का काला कारोबार ज्यादातर आत्महत्याओं के पीछे बड़ा कारण बनता जा रहा है।धंधे में पैसा लगाने वालों और किसानों एवं आमनागरिको मजदूरों नोकरी करने वाले कर्मचारियों की मजबूरी का लाभ उठाकर 10 प्रतिशत से ज्यादा ब्याज पर रुपए देकर भारी भरकम रकम वसूली की जा रही है। शहर की गली मोहल्लों सहित अन्य मुख्य मार्गों पर बिना पंजीकृत साहूकार हैं, लेकिन इससे ज्यादा साहूकार शहर के हर कोने में पनप गए हैं, इनके पास न तो लाईसेंस है न ही कोई ऐसा दस्तावेज जिस पर वे लोगों को लोन (कर्ज) देकर ब्याज की वसूली करें। दरअसल बडवाह प्रशासन की निगरानी न होने से सूदखोरी के इस अवैध कारोबार जड़े गहरी हो गई हैं।
10 से 20 प्रतिशत होती है ब्याज की वसूली
शहर में बढ़ती साहूकारी के धंधे के पीछे सबसे बढ़ी बजह यह बताई जा रही है कि, बैंक में जमा राशि 6 साल में दोगुनी होती है, लेकिन अवैध रुप से 10 से लेकर 20 प्रतिशत मासिक तक ब्याज वसूली के चलते साहूकारों की मूल रकम एक साल में ही दोगुनी हो जाती है। बड़े मुनाफा वाला यह धंधा बिना किसी दस्तावेज या वस्तु गिरवी रखे ही चल रहा है।
शहर में गिने चुने लाइसेंसी साहूकार होंगे
सूदखारी का यह धंधा ज्यादातर गरीब बस्तियों में चल रहा है। गल्ला मंडियों, सब्जी बाजार, हाथ ठेला चालकों, मजदूरों, छोटे किसान, खेतीहर मजदूर सफाई कर्मचारी सहित अन्य करीब तबकों में सूदखोर गहरी पैठ बनाए हुए हैं। इस कारोबार में ऐसे लोग फंसते है जो, इसकी शिकायत उच्च स्तर पर नहीं कर पाते। दरअसरल साहूकारी का पंजीयन तहसील कार्यालय में होता था, अब यह कार्य नगरीय निकायों को सौंपा गया है। शहर में ऐसे साहूकार पंजीकृत है जो अधिकृत रुप से ब्याज पर कर्ज दे सकते हैं। पंजीयन की शर्त और सुप्रीम कोर्ट की रुलिंग के मुताबिक कोई भी साहूकार 6 प्रतिशत से अधिक ब्याज नहीं वसूल सकता। ज्यादा वसूली की शिकायत राजस्व विभाग में की जा सकती है।
ऐसे चलता है सूद खोरी
नगर में सूद पर रकम देने वाला साहू कार पहले तो कम ब्याज की लालच देता है, फिर कर्जदार से अधिकतम ब्याज वसूलने लगता है। इसको इस तरह समझा जा सकता है कि, आपने सौ रुपए का कर्ज लिया तो साहूकार आपको 90 रुपए ही देखा। वह सूद की पहली किस्त दिए गए सौ रुपए में से ही वसूल लेता है। समय पर रकम न लौटाए जाने पर ब्याज पर ब्याज की वसूली आरंभ हो जाती है, इस तरह से कर्जदार साहूकार के जाल में फंसता जाता है।
प्रशासन भी नहीं करता अवैध साहूकारों को चिन्हित
सूदखोरी के इस अवैध कारोबार फैलने की बड़ी वजह यह है कि, कर्ज में दबे लोग साहूकार की शिकायत करने आगे नहीं आते, कोई घटना हो जाने के बाद ही पता चलता है कि, वह साहूकार से परेशान है। इधर शहर की पुलिस महकमा भी ऐसे मामलों की सतत मॉनीटरिंग नहीं करते और न ही ऐसे साहूकारों को चिन्हित नहीं किया जाता है जो, अवैध रुप से ब्याज वसूले का कार्य कर रहे हैं।
पंजीयन का कार्य अब निकायों के पास
ब्याज पर कर्ज देने के लिए पूर्व में तहसील कार्यालय में पंजीयन होता था, लेकिन अब यह कार्य नगरीय निकायों को सौंप दिया गया है।
वर्जन
शहर में कुछ ही साहूकार पंजीकृत हैं। लोन राशि पर ब्याज की दर के लिए सुप्रीम कोर्ट की रुलिंग है।
अनुकूल जैन
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बडवाह एवं नगर पालिका प्रशासनिक अधिकारी
