मुख्यमंत्री साय ने जिले को दी 218 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात
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जगदलपुर, 5 मार्च । बस्तर जिले के ग्राम माड़पाल में रियासत कालीन ऐतिहासिक शाब्दियाें पुरानी परंपरानुसार होलिका दहन में बस्तर दशहरे-बस्तर गाेंचा पर्व की तरह रथ संचालन किया जाता है। इस वर्ष नया रथ बनाया जा रहा है। मावली मंदिर के पुजारी और नये रथ निर्माण में मुख्य भूमिका निभाने वाले भानुप्रताप कश्यप और दल प्रसाद मांझी के साथ अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पांच साल के बाद रथ को पुराना मानकर नए रथ का निर्माण किया जाता है। पिछले कुछ सालों से रथ का निर्माण अलग तरीके से किया जा रहा है। पहले रथ के चक्के पर लोहे की रिंग चढ़ाई जाती थी, लेकिन अब बस्तर दशहरा रथ के समान रथ का निर्माण किया जा रहा है।
उन्हाेने बताया कि राज परिवार के सदस्याें द्वारा मावली माता की पूजा-अर्चना कर माता के छत्र को इस वर्ष नवनिर्मित रथ में रथारूढ़ कर राज परिवार के सदस्याें द्वारा होलिका दहन किये जाने की परंपरा का निर्वहन किया जायेगा। 13 मार्च की रात को होलिका दहन किया जाएगा। होलिका दहन के लिए माड़पाल में तैयारी की जा रही है। माड़पाल की होलिका दहन में तेन्दू की लकड़ी के साथ पलाश, साल, खैर, धवड़ा, हल्दू और बेर की लकड़ी का उपयोग किया जाता है। पहले माड़पाल के जंगल में तेन्दू लकड़ी आसानी से मिल जाती थी, अब यहां के जंगल में नहीं मिलने के कारण माचकोट के जंगल से तेन्दू के साथ अन्य लकड़िया लाई जाएंगी।
