अनुपम खेर इंडस्ट्री में एक्टिंग के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए भी जाने जाते हैं। वो हर मुद्दों पर खुलकर बेबाकी से बात करते हैं। अभी हाल ही में कश्मीरी पंडित की श्रीनगर में हत्या पर अनुपम खेर ने न्यूज़ 18 इंडिया से खास बातचीत में कहा कि त्रासदियों तब तक होती रहेंगी जब तक हम एकजुट हो कर उनकी टुजेडी अपनी ट्रजेडी नहीं समझेंगे, उनके गम को अपना गम नहीं समझेंगे. सेना अपना काम कर रही है सुरक्षा बल अपना काम कर रहे हैं लेकिन इस देश का नागरिक होने के नाते हमारा ये फ़र्ज़ है कि जिनके परिवार के लोग चले गये कम से कम उनको मनोबल तो दे सकते हैं
इस मामले पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, “जो लोग बात-बात पर पहुँच जाते हैं लोगों के पास राजनीति करने के लिए उनको यहाँ भी जाना चाहिए. वो नहीं जाते हैं.”
कश्मीर को लेकर के बातें बड़ी बड़ी की गयी हैं जैसे अनुच्छेद 370, नया कश्मीर, लेकिन कहाँ हैं हिंदू कश्मीर में? इस पर उन्होंने कहा कि इन्हे (मारने वालों को) मीडिया से पहचान मिलती है, मीडीया इनके बारे में बात करता है, मीडीया हेल्प करता है इन्हें डर का माहौल बनाने में, “अगर ये चुपचाप हो जाए और फिर पुलिस इस पर कार्यवाही करे तो इनकी बात बढ़ेगी ही नहीं, पहुॅचेगी ही नहीं बाकी लोगों तक, लेकिन ये अब रुकना चाहिए. अगर आज हमने नहीं रोका तो शायद मेरी पीढ़ी तो चलो बर्दाश कर लेगी लेकिन अगली पीढ़ी, आपके हमारे बच्चे, वहाँ तक तो ये बात बहुत आगे बढ़ जाएगी. हम आज तक नहीं सोचते थे कि अफ़ग़ानिस्तान में ऐसा कुछ हो सकता है.”
ये पूछे जाने पर कि क्या 2021 में 1990 जैसा माहौल है उन्होंने कहा, “सवाल किसी की ग़लती का नहीं है, ये सब तो निर्दोष हैं ये तो दुनिया जानती है, सवाल ये है कि इनकी मौत को एक प्रतीक बना कर आप बाकियों को डरा रहें हैं,
जो इन्होंने 1990 में भी किया था. वो लोग बस अब्रवार में सुर्ख़ियों बने हुए थे और फिर 19 जनवरी 1990 को आए ये लोग हजारों की तादाद में और कश्मीरी पंडितों के दरवाजे खटखटाए सामूहिक रूप से डराया धमकाया गया. अफ़सोस की बात है की उस समय कोई कुछ कह नहीं सकता था.”
