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दरअसल, वाशी कल्याण निवासी अशोक खरे, जो रेलवे से रिटायर्ड ड्राइवर हैं, अपनी भतीजी भाग्यश्री और परिवार के साथ उज्जैन दर्शन करने आए थे। दर्शन के बाद, जब वे वापस होटल पहुंचे, तो जो उन्होंने देखा, वह कोई ख्वाब नहीं था। होटल के कमरे का ताला खोला गया था और सामान बिखरा हुआ था। यही नहीं, भाग्यश्री का मोबाइल गायब था, जबकि वह होटल के अंदर ही छोड़ आई थीं।
जब मोबाइल की रिंग सुनी तो वह होटल मालिक के कमरे से बज रही थी! अब यहां सवाल उठता है, होटल का मालिक कौन था – कोई जादूगर या फिर शायद चोरी के मामलों में बहुत माहिर? खैर, जैसे ही यह राज खुला, मामला एक और मोड़ लेता है। होटल मालिक ने डुप्लीकेट चाबी से कमरे का ताला खोला और महिला कांस्टेबल का आई कार्ड, कपड़े, मोबाइल, और 10 हजार रुपए लेकर चंपत हो गया। परंतु उसे यह अंदाजा नहीं था मामला मुसीबत में फंसा सकता है।
भाग्यश्री और उनके परिवार ने जब होटल मालिक से सवाल किया, तो वह सारा दोष अपने कमरे के लॉक पर डालने में व्यस्त था। वह अपनी सफाई देने के बजाय बहाने बनाने में जुटा हुआ था, लेकिन जब पुलिस आई, तो उसकी हवा निकल गई। मालिक के पिता ने उन 8 हजार रुपए को लौटाया, मोबाइल भी वापस किया, और कपड़े भी दे दिए। हां, आई कार्ड का मामला तो डाक के हवाले कर दिया गया।
अब पुलिस के पास आवेदन है, और कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन क्या यह मामला महज एक ‘चोरी’ का है या होटल व्यवसायियों के बीच बढ़ती ‘कलाकारिता’ की ओर इशारा करता है? जो भी हो, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पुलिस के कदम होटल के मालिक की चाबी से भी ज्यादा तेज़ होंगे।
इसी तरह की घटनाओं के बीच, एक सवाल यह भी उठता है कि क्या हम किसी होटल के कमरे में आराम से सो सकते हैं या वहां भी हमें चोरी का डर सता सकता है?
