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वर्चुअल वर्ल्ड मे मौजूदगी बन रही शान , खत्म हो रहे इमोशंस : देवयानी हाडा
इंदौर । यह सच है कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया हमारी जिंदगी के अहम हिस्से बन गये है। दुनियाभर की जानकारी हमें एक क्लिक पर मिल जाती है लेकिन जिस तरह हर चीज के दो पहलू होते है, उसी तरह सोशल मीडिया भी हमारे लिए जितना उपयोगी साबित हो रहा है, उतने ही इसके नकारात्मक प्रभाव भी हमारे जीवन पर पड़ रहे है। सोशल मीडिया के जरिए हम सात समंदर पार बैठे इंसान से जुड़े है लेकिन अपने असल रिश्तों से दूर होते जा रहे हैं। यह बात ‘ वर्चुअल लाइफ में छूटते रिश्ते ’ विषय पर हुई एक चर्चा में स्प्रिचुअल गाइड देवयानी हाड़ा ने कही ।
क्रिएट स्टोरीज एनजीओ के वेबीनार में देवयानी हाडा ने कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में रहते हुए एक–दूसरे से जुड़े रहने का सोशल मीडिया बहुत अच्छा साधन है। एक बेहतरीन मार्केटिंग टूल के साथ यहां जानकारियां भी हमें आसानी से मिल जाती है लेकिन इन सबके साथ हमें इसका दुष्प्रभाव भी देखने को मिल रहे है। छोटे बच्चे भी इन दिनों सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं, ऐसे में इसके माध्यम से उनके पास कई ऐसी जानकारियां पहुंच रही है, जो नहीं पहुंचना चाहिए। वहीं, हम लोग भी उस वर्चुअल वर्ल्ड को ही अपनी शान मानने लगते हैं। हम उस पर फ्रेंड्स बढ़ाने और एक्टिव रहने की कोशिश करते हैं और रियल लाइफ में अपने ही लोगो से दूर होते जा रहे हैं।
लोगों तक पहुंच रही निजी जानकारी – सोशल मीडिया ने हम सभी को इस कदर जकड़ लिया है कि इस वर्चुअल वर्ल्ड पर जुड़े लोगों को इंप्रेस करने के लिए हम अपनी कई निजी जानकारियां शेयर कर देते हैं। इसका फायदा साइबर क्रिमिनल उठाने लगे हैं। हम अपनी आदतों के कारण ही बहुत आसानी से साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं। युवा पीढ़ी भी अपना करियर बनाने की उम्र में रील्स पर न सिर्फ घंटों तक समय बर्बाद कर रही है बल्कि बिन बुलाई मौत को भी दावत दे रहे हैं।
खत्म हो रहे इमोशंस – पहले परिवार के सब लोग साथ बैठकर बातें किया करते थे और अपना सुख-दुख एक दूसरे से बाँटते थे। इससे उनके इमोशंस जुड़े रहते थे। अब यह सब सोशल मीडिया के एक मैसेज में सिमट गया है। इमोजी की मदद से रिएक्शन बता दिया जाता है और इमोशन खत्म होते जा रहे हैं। परिवार के लोग साथ में होकर भी साथ नहीं है क्योंकि सब अपने स्मार्टफोन में व्यस्त है। इसी कारण रिश्ते टूट रहे है। पति–पत्नी के तलाक हो रहे हैं और बच्चे माता–पिता से दूर हो रहे हैं।
इस वर्चुअल वर्ल्ड की हमें इस तरह लत लग गई है की कुछ समय भी हम इससे दूर नहीं रह पाते। यह ना सिर्फ हमारी मेंटल हेल्थ बल्कि फिजिकल हेल्थ को भी खराब कर रहा है। जो लोग इसका शिकार हो चुके हैं वे डॉक्टर की मदद ले रहे हैं और कुछ लोग इन लोगों को देखकर अपनी आदत सुधारने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी भी 70 फीसदी लोग इस सच्चाई से दूर हैं। हमें इस आभासी दुनिया से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया में लौटना होगा, नहीं तो आने वाले समय में इसके गंभीर दुष्प्रभाव हमें देखने को मिलेंगे।
कुछ टिप्स
· सबसे पहले माता–पिता को मोबाइल के इस्तेमाल को कम करना होगा ।
· बच्चों के लिए नियम बनाने से पहले खुद के लिए नियम बनाकर उन पर अमल करना होगा ताकि बच्चा आपको देखकर सीख सके ।
· बच्चों को मोबाइल देने से पहले पैरेंट कंट्रोल और प्राइवेसी लगानी होगा ।
· बच्चा सोशल मीडिया पर क्या देख रहा है, क्या सीख रहा है, किस तरह के लोगों से जुड़ा है, इसकी जानकारी रखनी होगी ।
· स्मार्टफोन चलाने का समय तय करना होगा, जिससे वह पढ़ाई और अन्य गतिविधियों पर भी फोकस कर सके ।
