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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारत के 8 पूर्व नौसैनिकों मौत के मुंह से निकालने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इन पर जासूसी का आरोप था और कतर में दोहा की अदालत ने इन्हे फांसी की सजा सुनाई थी। दोषमुक्त होने के बाद सभी पूर्व नौसैनिक भारत आ गए हैं और अपने परिवार के साथ बेहद खुश हैं। पूरे परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। बता दें कि इस्लामिक मुल्क कतर के नरम पड़ने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी भूमिका बताई जा रही थी। दुबई में कतर के शेख से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने यह मुद्दा उठाया था। वहीं भारत सरकार ने कानूनी तौर पर भारतीयों की रिहाई के लिए अपील करने में देर नहीं की। इसे भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि भारत सरकार के दखल के बाद स्थिति एकदम बदल गई। दोहा से भारत पहुंचे इन पूर्व नौसैनिकों ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी बदौलत ही वे ये दिन देख पा रहे हैं। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि ये आठ पूर्व नौसैनिक कतर के खिलाफ जासूसी करने के आरोप में छोटे से देश की जेल में बंद थे। कतर की अदालत ने मौत की सजा सुना दी थी जिसके बाद रिहाई बेहद मुश्किल हो गई थी। हालांकि बीते साल दिसंबर में दोहा की अदालत ने इनकी मौत की सजा पर रोक लगा दी थी। भारत ने कूटनीतिक चतुराई के तहत कोर्ट में अपील की थी। इसके बाद भारत ने कतर कोर्ट में मौत की सजा के खिलाफ अपील की। 28 दिसंबर को कोर्ट की कोर्ट ऑफ अपील ने मौत की सजा पर रोक लगा दी। कतर के कोर्ट के इस फैसले को भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के शेख तमीम बिन हमाद अल थानी से दुबाई में मुलाकात की थी। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा था कि उन्होंने कतर में रहने वाले भारतीयों के बारे में चर्चा की। ये आठों भारतीय पहले नौसेना में काम करते थे। इसके बाद वे दोहा के अल दहरा ग्लोबल टेक्नॉलॉजीज में काम करने लगे। यह एक प्राइवेट कंपनी है जो कि कतर की सेना और सुरक्षा एजेंसियों को ट्रेनिंग देती है। वहां गिरफ्तार किए गए इन पूर्व नौसैनिकों के नाम हैं, कैप्टेन नवतेज गिल, सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, अमित नागपाल, एसके गुप्ता, बीके वर्मा, सुगुनकर पकाला और सेलर रागेश। इन्हें अगस्त 2022 में हिरासत में लिया गया था।
